कंगना रनौत

कंगना रनौत ने विचारधारा और निजी बदलाव पर रखी बेबाक राय,कहा- समय के साथ सोच बदलना हर व्यक्ति का अधिकार

मुंबई,4 अगस्त (युआईटीवी)- बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में हैं। सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए पहचानी जाने वाली कंगना ने इस बार अपने वैचारिक सफर,व्यक्तिगत बदलाव और समाज की सोच को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को समय के साथ अपनी सोच,विचारधारा और जीवन के नजरिए में बदलाव करने का अधिकार है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समाज को ऐसे बदलावों को संदेह या पूर्वाग्रह की नजर से देखने के बजाय उनका सम्मान करना चाहिए।

कंगना ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किए गए वीडियो में कहा कि वह संसद जाने के लिए तैयार हो रही थीं,लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने मन की बात लोगों के साथ साझा करना जरूरी समझा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी पर अपने विचार थोपने की कोशिश नहीं कर रही हैं,बल्कि केवल अपनी भावनाओं और व्यक्तिगत अनुभवों को सामने रख रही हैं।

वीडियो में कंगना ने फिल्म उद्योग में अपने लंबे अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कई अभिनेत्रियों और महिला कलाकारों को करीब से देखा है। उनके अनुसार, फिल्मी दुनिया में करियर की शुरुआत करने वाले कई युवा कलाकार धर्म और राजनीति जैसे विषयों पर स्पष्ट विचार नहीं रखते और अक्सर तटस्थ रहना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ जब किसी व्यक्ति के जीवन में नए रिश्ते,नई दोस्तियाँ या विवाह जैसे बदलाव आते हैं,तो कई बार उसकी सोच और जीवन के प्रति दृष्टिकोण भी बदल जाता है।

कंगना ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के अनुसार धर्म, विचारधारा और जीवन शैली चुनने की स्वतंत्रता देता है। उनका मानना है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी सोच में बदलाव लाता है या किसी नई विचारधारा को अपनाता है,तो इसे लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में अक्सर ऐसे बदलावों को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलती हैं,जबकि हर व्यक्ति की अपनी व्यक्तिगत यात्रा और अनुभव होते हैं।

अभिनेत्री ने अपने राजनीतिक और वैचारिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने करियर के दौरान कई ऐसे मुद्दों पर आवाज उठाई,जिन पर बोलने से लोग अक्सर बचते रहे। उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग में उन्होंने भाई-भतीजावाद के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखी और बड़े कलाकारों के प्रभावशाली नेटवर्क को भी चुनौती दी। उनके अनुसार,उन्होंने हमेशा अपने विचारों को बिना किसी डर के सार्वजनिक रूप से रखा है।

कंगना ने अपने वैचारिक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन के एक दौर में वह स्वयं को केवल एक सामान्य हिंदू मानती थीं,लेकिन समय के साथ उनकी सोच में बदलाव आया और अब वह खुद को हिंदू विचारधारा से अधिक जागरूक और गहराई से जुड़ा हुआ महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव किसी दबाव का परिणाम नहीं बल्कि उनके व्यक्तिगत अनुभवों,अध्ययन और आत्ममंथन का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि उनसे अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि वह कब और कैसे एक विशेष विचारधारा से जुड़ीं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अपनी सोच बदलने या किसी नई विचारधारा को अपनाने का संवैधानिक और व्यक्तिगत अधिकार है,तो इस पर बार-बार सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज को यह स्वीकार करना चाहिए कि इंसान समय के साथ बदलता है और उसके विचार भी विकसित होते हैं।

अपने वीडियो में कंगना ने अपने अतीत और वर्तमान के बीच आए बदलाव का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में ऐसा समय आता है,जब वह अपने पुराने अनुभवों से सीखकर आगे बढ़ना चाहता है। उनके अनुसार,यदि कोई व्यक्ति पहले एक अलग तरह का जीवन जी रहा था और बाद में अपनी प्राथमिकताओं,मूल्यों या जीवन शैली में बदलाव करना चाहता है,तो उसे यह अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने समाज के दोहरे रवैये पर भी सवाल उठाए। कंगना ने कहा कि कई लोग आज भी उनकी दस वर्ष पुरानी बातों या उनके पुराने फिल्मी करियर का हवाला देकर उन पर टिप्पणी करते हैं। उन्होंने कहा कि यह सही नहीं है कि किसी व्यक्ति को हमेशा उसके अतीत के आधार पर ही आंका जाए। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में फिल्मों में डांस नंबर और व्यावसायिक भूमिकाएँ की थीं,लेकिन यदि आज वह अपने जीवन में अलग दिशा चुनना चाहती हैं,तो समाज को इसे स्वीकार करना चाहिए।

कंगना ने कहा कि यदि समाज दूसरों को बदलने और आगे बढ़ने का अवसर देता है,तो वही अधिकार उन्हें भी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के अतीत को बार-बार सामने लाकर उसके वर्तमान को नकारना उचित नहीं है। उनके अनुसार,बदलाव जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है और हर व्यक्ति को अपने अनुभवों के आधार पर नए निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।

अभिनेत्री ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पुराने कार्यों से तय नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इंसान समय के साथ परिपक्व होता है,नए अनुभव प्राप्त करता है और उसके विचारों में परिवर्तन आता है। ऐसे में समाज को भी लोगों को बदलने और आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए।

कंगना रनौत पहले भी कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपने स्पष्ट बयानों के कारण सुर्खियों में रही हैं। उन्होंने फिल्म उद्योग,राजनीति,संस्कृति और सामाजिक विषयों पर कई बार खुलकर अपनी राय रखी है। उनके कई बयान जहां समर्थकों के बीच सराहे गए हैं,वहीं कई बार उन्हें आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद कंगना लगातार सार्वजनिक मंचों पर अपनी बात बेबाकी से रखती रही हैं।

इस नए वीडियो के सामने आने के बाद भी सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणियों को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। उनके समर्थक इसे व्यक्तिगत अभिव्यक्ति और वैचारिक स्वतंत्रता का उदाहरण बता रहे हैं,जबकि कुछ लोग उनके विचारों पर अलग-अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से साझा किया जा रहा है और लोग इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं।

कंगना ने अपने संदेश के अंत में यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनका उद्देश्य किसी पर अपनी विचारधारा थोपना नहीं है,बल्कि यह बताना है कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में बदलाव करने और अपनी पसंद के अनुसार आगे बढ़ने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समाज वास्तव में लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करता है,तो उसे लोगों की व्यक्तिगत यात्रा और वैचारिक परिवर्तन का सम्मान करना चाहिए।

कंगना रनौत के इस बयान ने एक बार फिर व्यक्तिगत स्वतंत्रता,वैचारिक परिवर्तन और सामाजिक स्वीकार्यता जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में उनके इस वीडियो और उसमें व्यक्त विचारों को लेकर राजनीतिक,सामाजिक और फिल्मी जगत में चर्चा जारी रहने की संभावना है।