नई दिल्ली,1 अगस्त (युआईटीवी)- अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत ने अपने हालिया बयान को लेकर सोशल मीडिया पर उठे विवाद और लगातार हो रही ट्रोलिंग पर पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने युवाओं और बच्चों को वही सीख देने की कोशिश की है, जिसे अपनाकर उन्होंने अपने जीवन में सफलता,सम्मान और पहचान हासिल की है। कंगना ने कहा कि उनके लिए और दूसरों के बच्चों के लिए अलग-अलग नियम नहीं हो सकते। उनका मानना है कि जिन मूल्यों और अनुशासन ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ाया, वही बातें उन्होंने सार्वजनिक रूप से भी कही हैं।
हाल के दिनों में कंगना रनौत का एक बयान सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा। इस बयान में उन्होंने नई पीढ़ी,विशेष रूप से जेन-जी और छात्र प्रदर्शनों के दौरान अपनाए जा रहे कुछ तौर-तरीकों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से अभद्र भाषा के इस्तेमाल और विरोध प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया के लिए रील बनाने जैसी गतिविधियों पर आपत्ति जताई थी। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं और कई लोगों ने उनके विचारों का विरोध किया। विवाद बढ़ने के साथ ही उनके पुराने वीडियो और बयान भी सोशल मीडिया पर फिर से साझा किए जाने लगे।
इन प्रतिक्रियाओं के बीच कंगना रनौत ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपने विचारों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपने परिवार और बच्चों को जिन मूल्यों के साथ बड़ा करता है,वही मूल्य समाज के अन्य बच्चों के लिए भी उपयुक्त मानता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जो कुछ कहा,वह किसी विशेष वर्ग या पीढ़ी को निशाना बनाकर नहीं कहा था,बल्कि वह अपने जीवन के अनुभवों के आधार पर एक सामान्य सलाह थी।
कंगना ने कहा कि उन्होंने वही बातें सार्वजनिक रूप से दोहराई हैं,जो अपने घर के बच्चों को भी सिखाई जाती हैं। उनके अनुसार,परिवार में बच्चों को अनुशासन,सम्मान,मेहनत और जिम्मेदारी का महत्व बताया जाता है। यही शिक्षा उन्हें अपने माता-पिता और परिवार से मिली और इसी ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जब वही बातें वह समाज के अन्य युवाओं के लिए कहती हैं तो उसका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं होता,बल्कि सकारात्मक दिशा दिखाना होता है।
अपने बयान के दौरान कंगना रनौत ने कहा कि जिन सिद्धांतों और मूल्यों के आधार पर उन्होंने अपने जीवन में सफलता,समाज में सम्मान,पहचान,आर्थिक समृद्धि और लोकप्रियता प्राप्त की,वही बातें उन्होंने युवाओं से साझा की हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें अपने अनुभवों से कुछ सीख मिली है, तो स्वाभाविक रूप से वह उसी अनुभव को दूसरों के साथ साझा करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी और के अनुभवों की बात नहीं कर सकतीं,क्योंकि उन्होंने स्वयं जो देखा और जिया है, वही उनके विचारों का आधार है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी व्यक्ति को उनकी बातें अच्छी लगती हैं तो वह उन्हें स्वीकार कर सकता है,लेकिन यदि किसी को उनसे असहमति है,तो उसे अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपने निर्णय स्वयं ले सकता है और अपने जीवन का रास्ता भी स्वयं चुन सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समय ही यह तय करेगा कि कौन-सा रास्ता व्यक्ति को किस मुकाम तक पहुँचाता है।
कंगना रनौत ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने लिए और दूसरों के लिए अलग-अलग मानदंड कभी नहीं बनाए। उनका कहना था कि यदि वह अपने परिवार के बच्चों को किसी व्यवहार के लिए प्रेरित करती हैं,तो वही सलाह समाज के अन्य युवाओं के लिए भी उपयुक्त मानती हैं। उन्होंने कहा कि उनके विचारों में कोई दोहरापन नहीं है और उन्होंने हमेशा वही कहा है,जिस पर स्वयं विश्वास करती हैं।
विवाद की शुरुआत तब हुई थी,जब कंगना रनौत ने कुछ छात्र प्रदर्शनों और नई पीढ़ी के व्यवहार को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से अभद्र भाषा के इस्तेमाल और सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान रील बनाने की प्रवृत्ति पर नाराजगी जताई थी। उनके अनुसार,विरोध दर्ज कराने का लोकतांत्रिक अधिकार सभी को है,लेकिन विरोध की भाषा और तरीका भी मर्यादित होना चाहिए।
कंगना के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी आलोचना की। कई युवाओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने पूरी जेन-जी पीढ़ी को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कई पुराने वीडियो तथा बयान भी साझा किए जाने लगे,जिनमें कंगना के अलग-अलग समय पर दिए गए विचारों की तुलना की गई।
विवाद बढ़ने के बाद कंगना रनौत ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पूरी युवा पीढ़ी का अपमान करना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी केवल उन लोगों के लिए थी जो सार्वजनिक स्थानों पर अशोभनीय व्यवहार करते हैं या विरोध के नाम पर मर्यादा का उल्लंघन करते हैं। उनके अनुसार,अधिकांश युवा मेहनती,जिम्मेदार और देश के भविष्य को बेहतर बनाने की क्षमता रखने वाले हैं,इसलिए उनकी आलोचना किसी पूरी पीढ़ी के खिलाफ नहीं थी।
उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर किसी बयान का एक छोटा हिस्सा अलग संदर्भ में प्रस्तुत कर दिया जाता है,जिससे उसके वास्तविक अर्थ को समझने में भ्रम पैदा हो जाता है। उनके अनुसार,किसी भी वक्तव्य को उसके पूरे संदर्भ के साथ देखा और समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह हमेशा अपने विचार स्पष्ट रूप से रखती हैं और समाज में अनुशासन,जिम्मेदारी तथा सम्मान की भावना को महत्वपूर्ण मानती हैं।
कंगना रनौत लंबे समय से अपने बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं। फिल्म उद्योग से लेकर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों तक,वह अक्सर खुलकर अपनी राय व्यक्त करती रही हैं। यही कारण है कि उनके बयान कई बार समर्थन और विरोध दोनों का कारण बनते हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि वह बिना किसी दबाव के अपने विचार रखती हैं, जबकि आलोचकों का मानना है कि उनके कुछ बयान विवाद को जन्म देते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के बयानों का समाज और विशेष रूप से युवाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी टिप्पणी को किस तरह देखा और समझा जाता है। कंगना रनौत ने हालाँकि,अपने ताजा बयान में साफ कर दिया है कि उन्होंने जो कुछ कहा,वह उनके व्यक्तिगत अनुभव और जीवन मूल्यों पर आधारित था। उनका कहना है कि यदि उनके शब्दों से किसी को असहमति है,तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी को अपनी राय रखने का अधिकार है,लेकिन उन्होंने वही कहा है,जिसे वह अपने जीवन की सफलता का आधार मानती हैं।
