पुणे,25 जून (युआईटीवी)- पुणे में चर्चित केतन हत्याकांड की जाँच लगातार नए मोड़ ले रही है। अब इस मामले में पुलिस की जाँच का दायरा और बढ़ गया है तथा एक नए व्यक्ति की भूमिका भी जाँच के केंद्र में आ गई है। पुलिस ने आरोपी चेतन चौधरी के करीबी दोस्त और कर्मचारी नीरज कुमार को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू की है। जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना से पहले और घटना वाले दिन नीरज कुमार की क्या भूमिका रही थी और क्या वह किसी भी रूप में इस कथित साजिश या उससे जुड़े घटनाक्रम की जानकारी रखता था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार,जाँच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं,जिन्होंने मामले को और अधिक जटिल बना दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जिस दिन लोहगढ़ किले पर ट्रेकिंग के दौरान कथित रूप से केतन की हत्या की गई,उस दिन चेतन चौधरी अपना मोबाइल फोन अपने साथ नहीं ले गया था। प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि उसने अपना निजी फोन घर या दुकान पर छोड़ दिया था और अपने साथ नीरज कुमार का मोबाइल फोन लेकर गया था। इसी तथ्य ने नीरज कुमार की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं और अब पुलिस हर पहलू की बारीकी से जाँच कर रही है।
जाँच एजेंसियों के अनुसार, घटना के दिन चेतन चौधरी और सह-आरोपी सिया गोयल के बीच जो संपर्क हुआ,वह कथित तौर पर नीरज कुमार के मोबाइल फोन के माध्यम से हुआ था। पुलिस का मानना है कि इस डिजिटल संपर्क की पूरी श्रृंखला को समझना बेहद महत्वपूर्ण है,क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि घटना की योजना कैसे बनाई गई और उसे अंजाम देने से पहले आरोपियों के बीच किस प्रकार का संवाद हुआ।
मामले में एक और महत्वपूर्ण जानकारी चेतन चौधरी के परिवार की ओर से सामने आई है। चेतन के चाचा ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि चेतन और नीरज कुमार के बीच काफी करीबी संबंध थे। उनके अनुसार,दोनों अक्सर एक-दूसरे के मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया करते थे और यह उनके लिए कोई असामान्य बात नहीं थी। उन्होंने बताया कि नीरज पिछले तीन से चार वर्षों से परिवार के साथ काम कर रहा है और उसे परिवार का भरोसेमंद व्यक्ति माना जाता रहा है।
परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि चेतन अक्सर अपने फोन को दुकान या घर पर छोड़ देता था और आवश्यकता पड़ने पर नीरज का फोन इस्तेमाल कर लेता था। हालाँकि,पुलिस इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने में जुटी है। जाँच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस बार भी फोन का आदान-प्रदान सामान्य परिस्थितियों में हुआ था या इसके पीछे कोई विशेष उद्देश्य था।
पुलिस का आरोप है कि चेतन चौधरी और सिया गोयल ने मिलकर केतन की हत्या की साजिश रची थी। जाँच एजेंसियों का दावा है कि दोनों ने एक कैफे में बैठकर इस कथित योजना पर चर्चा की थी। अधिकारियों के अनुसार,हत्या की योजना को अंजाम देने के लिए कई प्रयास किए गए थे,लेकिन वे सफल नहीं हो सके। इसके बाद लोहगढ़ किले पर ट्रेकिंग के दौरान कथित रूप से इस वारदात को अंजाम दिया गया।
अब जाँच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा डिजिटल साक्ष्य बन चुके हैं। पुलिस नीरज कुमार के मोबाइल फोन की विस्तृत फॉरेंसिक जाँच करवा रही है। फोन से जुड़े कॉल रिकॉर्ड,संदेश, चैट हिस्ट्री,लोकेशन डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक जानकारियों का विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से मामले की कई महत्वपूर्ण कड़ियाँ जुड़ सकती हैं।
विशेषज्ञों की मदद से यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना वाले दिन मोबाइल फोन किन-किन स्थानों पर सक्रिय था और उससे किस प्रकार की बातचीत की गई थी। जाँच टीम यह जानने का प्रयास कर रही है कि नीरज कुमार को अपने फोन के इस्तेमाल की जानकारी थी या नहीं। यदि उसे जानकारी थी,तो वह किस सीमा तक घटनाक्रम से अवगत था और यदि जानकारी नहीं थी,तो फोन उसके पास से किस परिस्थिति में लिया गया।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि फिलहाल नीरज कुमार को आरोपी नहीं माना गया है,लेकिन उससे पूछताछ इसलिए की जा रही है,ताकि घटना के दिन की गतिविधियों का पूरा क्रम समझा जा सके। जाँच एजेंसियाँ किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी तथ्यों और साक्ष्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण कर रही हैं।
इस बीच,केतन हत्याकांड ने स्थानीय स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। मामले में लगातार सामने आ रहे नए तथ्यों के कारण लोगों की रुचि भी बढ़ी है। पुलिस पर जल्द से जल्द मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने का दबाव है। अधिकारियों का कहना है कि जाँच पूरी तरह साक्ष्य आधारित तरीके से की जा रही है और किसी भी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं माना जाएगा।
जाँच में शामिल अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक आपराधिक मामलों में डिजिटल साक्ष्य अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मोबाइल फोन,कॉल रिकॉर्ड,इंटरनेट गतिविधियाँ और लोकेशन डेटा कई बार ऐसे तथ्य सामने ला देते हैं,जो सामान्य जाँच में पता नहीं चल पाते। यही कारण है कि इस मामले में भी मोबाइल फोन और उससे जुड़ी जानकारी जाँच का सबसे अहम हिस्सा बन गई है।
पुलिस अब यह भी जाँच कर रही है कि घटना से पहले आरोपियों के बीच कितनी बार बातचीत हुई थी और क्या किसी अन्य व्यक्ति से भी संपर्क किया गया था। इसके लिए तकनीकी टीम विभिन्न संचार माध्यमों का विश्लेषण कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में डिजिटल जाँच से और भी महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आ सकती हैं।
फिलहाल नीरज कुमार से पूछताछ जारी है और पुलिस उसके बयान की तुलना अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से कर रही है। जाँच एजेंसियों का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहराई से पड़ताल की जा रही है,ताकि किसी भी तथ्य को नजरअंदाज न किया जाए। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है,वैसे-वैसे इस हत्याकांड की नई परतें खुलती जा रही हैं।
पुलिस का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल आरोप तय करना नहीं,बल्कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई को सामने लाना है। यही कारण है कि हर डिजिटल रिकॉर्ड,हर कॉल विवरण और हर संभावित कड़ी की जाँच की जा रही है। आने वाले दिनों में नीरज कुमार की भूमिका को लेकर और अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है,जिससे यह तय होगा कि वह केवल एक महत्वपूर्ण गवाह है या इस मामले में उसकी भूमिका इससे कहीं अधिक गहरी रही है। फिलहाल पूरे मामले पर पुलिस की नजर बनी हुई है और जाँच लगातार आगे बढ़ रही है।
