नई दिल्ली,22 सितंबर (युआईटीवी)- माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में अपनी क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़ी अवसंरचना को विस्तार देते हुए हैदराबाद में अपना नया क्लाउड रीजन शुरू किया है। कंपनी का यह भारत में चौथा क्लाउड रीजन है। ‘इंडिया साउथ सेंट्रल’ नाम से शुरू किया गया यह क्लाउड रीजन कंपनी के पुणे, चेन्नई और मुंबई स्थित मौजूदा क्लाउड क्षेत्रों से जुड़ गया है। इसके साथ ही भारत में माइक्रोसॉफ्ट की हाइपरस्केल क्लाउड अवसंरचना की मौजूदगी और मजबूत हुई है।
हैदराबाद में नए क्लाउड रीजन की शुरुआत ऐसे समय हुई है,जब भारत में डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ रही है और कंपनियाँ अपने कारोबार में एआई तकनीक के इस्तेमाल को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित सेवाओं, डिजिटल एप्लीकेशन और क्लाउड कंप्यूटिंग की माँग में और तेजी आ सकती है। ऐसे में देश में पर्याप्त डिजिटल और भौतिक अवसंरचना तैयार करना आवश्यक होगा।
यह नया क्लाउड रीजन माइक्रोसॉफ्ट के भारत में पहले घोषित 20.5 अरब डॉलर के निवेश कार्यक्रम का हिस्सा है। इस निवेश कार्यक्रम के तहत कंपनी भारत में क्लाउड क्षमताओं और एआई अवसंरचना के विस्तार के साथ-साथ कौशल विकास और परिचालन क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है। कंपनी की योजना भारत में बढ़ती डिजिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी तकनीकी क्षमता को व्यापक स्तर पर मजबूत करने की है।
नए क्लाउड रीजन के लॉन्च के अवसर पर माइक्रोसॉफ्ट इंडिया एवं दक्षिण एशिया के अध्यक्ष पुनीत चंदोक ने भारत में तेजी से बढ़ती डिजिटल गतिविधियों और डेटा की मात्रा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी डिजिटल परिवर्तन यात्रा के एक महत्वपूर्ण चरण में पहुँच चुका है और दुनिया के सबसे बड़े डेटा उत्पादक देशों में तेजी से उभर रहा है। उनके मुताबिक, भारत में पैदा होने वाले डेटा और देश में उपलब्ध डेटा सेंटर क्षमता के बीच बड़ा अंतर है,जिसे आने वाले वर्षों में दूर करने की जरूरत होगी।
पुनीत चंदोक के अनुसार, भारत दुनिया के कुल डेटा का करीब 20 प्रतिशत उत्पन्न करता है, जबकि वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में देश की हिस्सेदारी केवल लगभग 3 प्रतिशत है। उन्होंने इस अंतर को भारत के लिए आने वाले दशक का एक बड़ा अवसर बताया। उनका कहना है कि जिस गति से देश में डिजिटल सेवाओं का विस्तार हो रहा है,उसके अनुरूप डेटा को संग्रहित करने, संसाधित करने और सुरक्षित रखने के लिए डेटा सेंटर क्षमता भी बढ़ानी होगी।
वर्तमान में भारत में लगभग 2 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता होने का अनुमान है। पुनीत चंदोक ने कहा कि वर्ष 2035 तक यह क्षमता बढ़कर 12 से 14 गीगावाट के बीच पहुँच सकती है। इस अनुमान से यह संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में भारत में डेटा सेंटर निर्माण और उससे जुड़े बुनियादी ढाँचे में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। बिजली, नेटवर्क कनेक्टिविटी, स्टोरेज, कंप्यूटिंग क्षमता और डेटा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी समानांतर विकास आवश्यक होगा।
क्लाउड रीजन की संख्या बढ़ने से भारत में माइक्रोसॉफ्ट के ग्राहकों को क्लाउड सेवाओं के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। क्लाउड अवसंरचना का इस्तेमाल कंपनियां डेटा स्टोरेज, कंप्यूटिंग, सॉफ्टवेयर सेवाओं और एआई आधारित एप्लीकेशन के लिए करती हैं। स्थानीय स्तर पर क्लाउड क्षमता बढ़ने से संस्थानों को अपने डिजिटल संचालन को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिल सकती है।
माइक्रोसॉफ्ट के लिए एआई इस विस्तार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुनीत चंदोक ने कहा कि कंपनियाँ,सरकारी विभाग और विभिन्न संस्थान अब एआई के केवल प्रयोगात्मक इस्तेमाल तक सीमित नहीं हैं। वे एआई आधारित एप्लीकेशन और सेवाओं को बड़े पैमाने पर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे एआई कंप्यूटिंग क्षमता की माँग में लगातार बढ़ोतरी होने की संभावना है।
एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अधिक शक्तिशाली कंप्यूटिंग संसाधनों की जरूरत पड़ती है। एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने और उन्हें संचालित करने के लिए बड़ी मात्रा में कंप्यूटिंग शक्ति,डेटा स्टोरेज और नेटवर्क क्षमता की आवश्यकता होती है। ऐसे में क्लाउड रीजन और डेटा सेंटर नेटवर्क का विस्तार डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा बनता जा रहा है।
पुनीत चंदोक ने यह भी कहा कि एआई सेवाओं की माँग पहले से मजबूत है और अब चुनौती भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त अवसंरचना तैयार करने की है। उनके अनुसार, देश जिस डिजिटल पैमाने पर आगे बढ़ रहा है, उसके अनुरूप भौतिक अवसंरचना का विस्तार भी जरूरी है। उन्होंने डिजिटल और भौतिक अवसंरचना के बीच संतुलन को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में रेखांकित किया।
हैदराबाद में नया क्लाउड रीजन शुरू होने से दक्षिण भारत में माइक्रोसॉफ्ट की क्लाउड उपस्थिति को भी विस्तार मिला है। पुणे, चेन्नई और मुंबई के बाद हैदराबाद में क्लाउड क्षेत्र की शुरुआत कंपनी के भारत में क्षेत्रीय स्तर पर बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। अलग-अलग क्षेत्रों में क्लाउड क्षमता मौजूद होने से ग्राहकों को अपनी जरूरतों के मुताबिक सेवाओं का इस्तेमाल करने के अधिक विकल्प मिल सकते हैं।
भारत में डिजिटल परिवर्तन के बढ़ते दायरे के बीच बड़ी तकनीकी कंपनियाँ क्लाउड और एआई अवसंरचना में निवेश बढ़ा रही हैं। ई-कॉमर्स, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य, विनिर्माण, सरकारी सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने से डेटा की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही एआई को कारोबार और प्रशासन में शामिल करने की कोशिशें तेज हो रही हैं।
माइक्रोसॉफ्ट का नया क्लाउड रीजन इसी बदलते डिजिटल परिदृश्य का हिस्सा है। कंपनी का निवेश केवल डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है,बल्कि एआई अवसंरचना, कौशल विकास और परिचालन विस्तार को भी इसमें शामिल किया गया है। आने वाले वर्षों में यदि भारत में डेटा उत्पादन और एआई अपनाने की गति इसी तरह बनी रहती है,तो क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर क्षेत्र में बड़े विस्तार की जरूरत होगी।
हैदराबाद में ‘इंडिया साउथ सेंट्रल’ क्लाउड रीजन की शुरुआत के साथ माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में अपनी क्लाउड अवसंरचना का एक और महत्वपूर्ण चरण पूरा किया है। कंपनी के लिए यह विस्तार भारत के बढ़ते डिजिटल बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के साथ-साथ एआई आधारित भविष्य की जरूरतों के लिए आधार तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
