बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@harnathsinghmp)

नेतन्याहू ने गाजा पर पूर्ण कब्जे के इरादे को दोहराया,ट्रंप से मतभेद की खबरों को का किया खंडन

यरूशलम,22 मई (युआईटीवी)- इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर से साफ कर दिया है कि गाजा पट्टी में जारी युद्ध को लेकर उनकी सरकार किसी भी तरह के समझौते या समझदारी के मूड में नहीं है। बुधवार को पश्चिम यरूशलम स्थित अपने कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेतन्याहू ने न सिर्फ गाजा पर “पूरी तरह से दोबारा कब्जा करने” की अपनी योजना को दोहराया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि वह फिलहाल युद्ध को समाप्त करने के किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रहे हैं।

अपने संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल के कब्जे में अब भी 20 बंधक जीवित हैं,जबकि 38 अन्य के मारे जाने की आशंका है। उन्होंने यह जानकारी देते हुए किसी भी प्रकार के युद्धविराम या कैदियों की अदला-बदली को लेकर फिलिस्तीनी प्रतिरोध समूहों,विशेष रूप से हमास की शर्तों को सिरे से खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि, “हमास की माँगें अस्वीकार्य हैं। हम तब तक पीछे नहीं हटेंगे,जब तक गाजा को पूरी तरह से आतंकवाद से मुक्त नहीं कर देते और इजरायल की सुरक्षा को स्थायी रूप से सुनिश्चित नहीं कर लेते।”

दूसरी ओर,हमास की ओर से कई बार यह प्रस्ताव सामने आया है कि यदि इजरायल, युद्धविराम को स्वीकार करे,गाजा से सेना हटाए और फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करे, तो वह इजरायली बंधकों को एकमुश्त रिहा करने को तैयार है,लेकिन नेतन्याहू ने इस प्रस्ताव को “दबाव की रणनीति” बताते हुए नकार दिया और गाजा पर पूर्ण नियंत्रण की नीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक हमास और अन्य प्रतिरोध संगठनों का पूरी तरह से निरस्त्रीकरण नहीं होता, इजरायल अपनी सैन्य कार्रवाई नहीं रोकेगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक और महत्वपूर्ण बात जो नेतन्याहू ने कही,वह यह थी कि जैसे ही इजरायल अपने सैन्य और रणनीतिक लक्ष्य हासिल कर लेगा,उसके बाद वह “ट्रंप योजना” को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

यह योजना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान प्रस्तावित हुई थी और इसे गाजा से फिलिस्तीनियों के पुनर्वास की व्यापक योजना के रूप में देखा जाता है। हालाँकि,इस योजना की बारीकियों पर नेतन्याहू ने विस्तार से कुछ नहीं कहा,लेकिन संकेत दिया कि यह इजरायल की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खाड़ी देशों की यात्रा को लेकर इजरायली मीडिया और वैश्विक विश्लेषकों के बीच कई सवाल उठने लगे थे। ट्रंप की यह यात्रा सऊदी अरब,कतर और संयुक्त अरब अमीरात तक सीमित रही और इसमें इजरायल को शामिल नहीं किया गया।

ट्रंप ने इस यात्रा में कई बड़े व्यापारिक सौदों पर हस्ताक्षर किए और यमन में हूती विद्रोहियों पर अमेरिकी हमलों को समाप्त करने की घोषणा भी की। इससे यह अटकलें तेज हो गईं कि अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में दरार आ गई है।

नेतन्याहू ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैं इजरायल के हितों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हूँ और ट्रंप प्रशासन के साथ हमारे संबंध अटूट हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि कुछ दिनों पहले उनकी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस से बातचीत हुई थी,जिसमें वेंस ने उन्हें आश्वस्त किया कि, “हमारे बीच दरार की जो खबरें चल रही हैं,वे फर्जी हैं। उन पर ध्यान न दें।”

गाजा में लगातार बढ़ते मानवीय संकट और अंतर्राष्ट्रीय आलोचनाओं के बीच अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में इजरायल से आग्रह किया था कि वह युद्ध को जल्द समाप्त करने की दिशा में काम करे और मानवीय राहत सामग्री की आपूर्ति को रोके नहीं।

संयुक्त राष्ट्र,यूरोपीय संघ और अरब लीग जैसे कई वैश्विक मंचों से भी इजरायल पर दबाव डाला जा रहा है कि वह स्थायी युद्धविराम और राजनीतिक समाधान की ओर बढ़े,लेकिन नेतन्याहू फिलहाल इन माँगों को आंतरिक सुरक्षा के नाम पर खारिज करते जा रहे हैं।

बेंजामिन नेतन्याहू की रणनीति अब पूरी तरह से स्पष्ट हो गई है कि गाजा में किसी भी प्रकार की सहमति,वार्ता या समझौते को दरकिनार कर सैन्य वर्चस्व को ही एकमात्र समाधान मानना। उनकी यह नीति ना सिर्फ गाजा में तनाव को और गहरा कर रही है, बल्कि इजरायल के वैश्विक रिश्तों और उसके दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को भी चुनौती दे रही है।

अब यह देखना बाकी है कि क्या इजरायल का यह सैन्य अभियान अपने लक्ष्य तक पहुँचता है या फिर अंतर्राष्ट्रीय दबाव और आंतरिक विरोध उसे कोई और रास्ता अपनाने के लिए मजबूर करता है,लेकिन फिलहाल,नेतन्याहू की प्राथमिकता साफ है कि गाजा पर पूरी सैन्य पकड़ और हमास का अंत।