भोपाल,30 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य प्रदेश में दल बदल के वजह से कांग्रेस के मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के नेताओं का भाजपा की ओर रुख करना कांग्रेस की नींदें उड़ा कर रख दी है। आगे भी यह सिलसिला जारी रहने वाला है। कांग्रेस इन मुश्किल हालातों से बाहर निकलने का रास्ता नहीं खोज पा रही है। लोकसभा चुनाव के दौरान इंदौर में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका लगा, जहाँ नामांकन वापसी के अंतिम दिन पार्टी के उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने मैदान छोड़ दिया और वो भाजपा में शामिल हो गए।
इससे पूर्व खजुराहो में विपक्षी दलों का गठबंधन ‘इंडिया’ को बड़ा झटका लगा था,जहाँ समाजवादी पार्टी को यह सीट आपसी समझौते के चलते दी गई थी। समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार मीरा दीपक यादव के पर्चे को निरस्त कर दिया गया है। इस प्रकार राज्य की 29 लोकसभा सीटों में से खजुराहो और इंदौर की दो सीटों पर कांग्रेस मुकाबले में नहीं है।
राज्य में यदि कांग्रेस की पिछले चार साल की स्थिति पर गौर करें तो लगातार पार्टी को नुकसान झेलना पड़ा है। वर्ष 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में पार्टी के 22 विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया था। इससे राज्य में कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी और अब तक यह सिलसिला जारी है।
पार्टी के कई दिग्गज नेता,विधायक,महापौर और कई पदाधिकारियों ने भाजपा का दामन थाम चुके हैं।
मंगलवार को सियासी गलियारों में कांग्रेस को ग्वालियर चंबल इलाके में एक बड़ा झटका लगने की चर्चा है। जब भिंड में राहुल गांधी जनसभा को संबोधित कर रहे थे,उस समय कांग्रेस के दिग्गज नेता बीजेपी का दामन थाम लिया। इस दिग्गज नेता को बीजेपी में शामिल होने से रोकने के लिए कांग्रेस की ओर से हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन,संभावना कम है कि वह इसमें सफल होंगे।
