सातवीं रात भी नहीं थमे हमले,अमेरिका-ईरान संघर्ष और गहराया (तस्वीर क्रेडिट@Grimillionaire)

सातवीं रात भी नहीं थमे हमले,अमेरिका-ईरान संघर्ष और गहराया,होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का सबसे बड़ा केंद्र

वाशिंगटन/तेहरान,18 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष लगातार सातवें दिन और सातवीं रात भी थमता नजर नहीं आया। शुक्रवार देर रात अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर एक और बड़े हवाई अभियान को अंजाम दिया। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के अनुसार,इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करना तथा उन संसाधनों को निशाना बनाना था,जिनका इस्तेमाल क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की बात कही है। लगातार बढ़ते इस टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।

ईरानी मीडिया के अनुसार,शुक्रवार देर रात दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी ईरान के कई शहरों में तेज धमाकों और हवाई हमलों की आवाजें सुनाई दीं। सिरिक,अहवाज और यज्द जैसे शहरों में लोगों ने लगातार विस्फोटों की सूचना दी। इन हमलों के बाद कई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया और स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की। हालाँकि,अमेरिकी सेना ने हमलों के सटीक लक्ष्यों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की,लेकिन यह स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य संरचना और संचालन क्षमता को कमजोर करना था।

इसी दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में दो तेल टैंकर बारूदी सुरंगों से टकराने के बाद विस्फोट का शिकार हो गए। आईआरजीसी के अनुसार,यह घटना क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव का परिणाम है। हालाँकि,अमेरिकी सेना ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार ऐसा कोई घटनाक्रम नहीं हुआ है और ईरान की ओर से किया गया दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। इस विरोधाभासी दावे ने क्षेत्र में भ्रम की स्थिति भी पैदा कर दी है।

शनिवार को आईआरजीसी ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि उसने बहरीन के शेख ईसा एयर बेस को निशाना बनाया है। ईरानी पक्ष के अनुसार,इस सैन्य अड्डे पर अमेरिकी लड़ाकू विमान तैनात थे और हमला विशेष रूप से उन ठिकानों पर केंद्रित था,जहाँ से अमेरिकी सैन्य अभियान संचालित किए जा रहे थे। इसके साथ ही आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि बहरीन के बटेलको इंटेलिजेंस डेटा सेंटर पर भी हमला किया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और अमेरिकी या बहरीन प्रशासन की ओर से तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को भी निशाना बनाने का दावा किया। आईआरजीसी के अनुसार,अल-अहमदी बंदरगाह स्थित अमेरिकी नौसैनिक ईंधन सहायता केंद्र तथा अमेरिकी सिग्नल और संचार केंद्र पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। इन दावों के बीच कुवैत ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया। अधिकारियों ने कहा कि संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए यह एहतियाती कदम उठाया गया है,ताकि यात्रियों और विमान संचालन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

उधर ईरान की सरकारी टेलीविजन ने दावा किया कि शुक्रवार को अमेरिकी हवाई हमलों में दक्षिणी होरमोजगान प्रांत के कई महत्वपूर्ण पुलों को निशाना बनाया गया। इन पुलों को बंदर अब्बास तक पहुँचने का प्रमुख मार्ग माना जाता है। बंदर अब्बास ईरान का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण समुद्री बंदरगाह है,जहाँ से देश का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार संचालित होता है। रिपोर्ट के अनुसार इन हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हुई है। हालाँकि,मृतकों की पहचान और नुकसान के विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

इसी अभियान के दौरान चाबहार बंदरगाह क्षेत्र में स्थित एक टावर भी अमेरिकी हमले में ध्वस्त हो गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि इस टावर का उपयोग इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों की निगरानी और जहाजों पर हमलों के समन्वय के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार,इस संरचना को नष्ट करने का उद्देश्य ईरान की समुद्री सैन्य क्षमता को सीमित करना था।

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई केवल बंदरगाहों और सैन्य ढाँचे तक सीमित नहीं रही। ईरानी अधिकारियों के अनुसार,देश के बिजली ढाँचे और इरानशहर हवाई अड्डे को भी निशाना बनाया गया। इन हमलों के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। ईरान के ऊर्जा मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिजली और एयर कंडीशनर का कम से कम उपयोग करें,ताकि ऊर्जा प्रणाली पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके। मंत्रालय ने बताया कि ऊर्जा ढाँचे पर लगातार हो रहे हमलों और दक्षिणी क्षेत्रों में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण बिजली व्यवस्था गंभीर चुनौती का सामना कर रही है।

स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी इस संघर्ष का गहरा असर दिखाई दे रहा है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमनपुर के अनुसार,शुक्रवार सुबह तक अमेरिकी हवाई हमलों में लगभग 38 लोगों की मौत हो चुकी है,जबकि 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं। अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी है और कई स्थानों पर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और मजबूत किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि हमले इसी तरह जारी रहे,तो मानवीय संकट और गहरा सकता है।

लगातार सात दिनों से जारी इस संघर्ष ने पहले हुए अंतरिम समझौते को भी लगभग निष्प्रभावी बना दिया है। दोनों देशों के बीच पहले एक अस्थायी सहमति बनी थी,जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए खुला रखना और स्थायी युद्धविराम की दिशा में बातचीत को आगे बढ़ाना था,लेकिन मौजूदा हालात में यह समझौता पूरी तरह कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। ईरान ने जलडमरूमध्य को बंद करने का फैसला किया है,जबकि अमेरिका ने बुधवार से ईरानी बंदरगाहों और जहाजों पर अपनी नाकेबंदी फिर से लागू कर दी है। इससे समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर निर्यात होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहाँ बढ़ता सैन्य तनाव केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का विषय नहीं रह गया है,बल्कि इसका सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार,तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऊर्जा बाजार पहले ही इस संघर्ष के कारण अस्थिरता का सामना कर रहे हैं और कई देशों ने संभावित आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रहती है,तो पश्चिम एशिया में व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अमेरिका और ईरान दोनों अपने-अपने रुख पर अडिग दिखाई दे रहे हैं और फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से तनाव कम करने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता लगातार बढ़ रही है और कई देश दोनों पक्षों से संयम बरतने तथा कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहे हैं।

फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। लगातार हो रहे हवाई हमले,मिसाइल और ड्रोन हमले,समुद्री मार्गों पर बढ़ता खतरा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाए जाने से यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की रणनीति और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भूमिका इस संकट की दिशा तय करेगी, लेकिन फिलहाल पश्चिम एशिया पर युद्ध के और अधिक व्यापक होने का खतरा लगातार मंडरा रहा है।