कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@GunstPhilip)

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का पहला भारत दौरा,2 मार्च को पीएम मोदी से होगी अहम मुलाकात;व्यापार,ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली,28 फरवरी (युआईटीवी)- कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अपनी पत्नी डायना फॉक्स कार्नी के साथ चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत पहुँच चुके हैं। बतौर प्रधानमंत्री यह उनका पहला भारत दौरा है,जिसे दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान वे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 2 मार्च को नई दिल्ली में मुलाकात करेंगे। इस उच्चस्तरीय बैठक में व्यापार,ऊर्जा,प्रौद्योगिकी,रक्षा, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों जैसे कई अहम विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का भारत के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर मुंबई पहुँचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। महाराष्ट्र सरकार के प्रोटोकॉल और मार्केटिंग मंत्री जय कुमार रावल ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। मंत्रालय ने कहा कि यह दौरा भारत-कनाडा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। दोनों देशों के बीच साझेदारी साझा लोकतांत्रिक मूल्यों,लोगों के बीच मजबूत रिश्तों और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग पर आधारित है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार,28 फरवरी को प्रधानमंत्री कार्नी मुंबई में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद वे 1 मार्च को नई दिल्ली पहुँचेंगे,जहाँ 2 मार्च को उनका व्यस्त कार्यक्रम निर्धारित है। सुबह 9 बजे वे होटल लीला पैलेस में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे। इसके बाद सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। इस बैठक के दौरान विभिन्न समझौतों और सहयोगी परियोजनाओं से जुड़े एमओयू पर हस्ताक्षर और आदान-प्रदान किया जाएगा। बैठक के बाद दोनों नेता संयुक्त प्रेस वक्तव्य भी जारी करेंगे।

दोपहर एक बजकर 50 मिनट पर भारत मंडपम में भारत-कनाडा सीईओ फोरम का आयोजन किया जाएगा,जिसमें दोनों देशों के प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे। इस मंच का उद्देश्य व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देना और निवेश के नए अवसरों की पहचान करना है। शाम छह बजे प्रधानमंत्री कार्नी अपने देश के लिए रवाना हो जाएँगे।

इस दौरे के दौरान दोनों देश व्यापार और निवेश,ऊर्जा,आवश्यक खनिज,कृषि,शिक्षा,शोध एवं नवाचार और लोगों के बीच संबंधों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में चल रहे सहयोग की समीक्षा करेंगे। साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर भी विचारों का आदान-प्रदान होगा। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और कनाडा के बीच संबंध सामान्य होने की दिशा में एक अहम मोड़ पर हैं। हाल के वर्षों में कुछ मुद्दों के कारण द्विपक्षीय संबंधों में तनाव देखा गया था,लेकिन अब दोनों पक्ष रचनात्मक और संतुलित साझेदारी को आगे बढ़ाने के इच्छुक दिखाई दे रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने पहले ही आपसी सम्मान,लोगों के बीच मजबूत संबंधों और बढ़ती आर्थिक परस्परता पर आधारित साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। आगामी बैठक इस सकारात्मक गति और साझा दृष्टिकोण को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी।

इससे पहले कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि यह दौरा कनाडा-भारत संबंधों को बढ़ाने और मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा। इसमें व्यापार,ऊर्जा,प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,प्रतिभा और संस्कृति तथा रक्षा क्षेत्र में महत्वाकांक्षी नई साझेदारियों की संभावनाओं पर चर्चा शामिल है। कार्नी भारतीय और कनाडाई व्यापारिक नेताओं से भी मुलाकात करेंगे,ताकि कनाडा में निवेश के अवसरों की पहचान की जा सके और दोनों देशों के व्यवसायों के बीच नई साझेदारियाँ स्थापित की जा सकें।

कनाडा सरकार ने अपने बयान में यह भी कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कनाडा के तीन सबसे मजबूत साझेदार देशों के दौरों के माध्यम से प्रधानमंत्री क्षेत्रीय संबंधों को और गहरा करेंगे,जो देश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हैं। बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों के बीच कनाडा अपने व्यापार को विविधतापूर्ण बनाने और अपने श्रमिकों एवं व्यवसायों के लिए नए अवसर सृजित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। विदेशों में नई साझेदारियाँ स्थापित कर घरेलू स्तर पर अधिक स्थिरता,सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करना कनाडा की प्राथमिकता है।

भारत को लेकर कनाडा सरकार ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और वैश्विक वाणिज्य तथा प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। 2024 में भारत कनाडा का सातवां सबसे बड़ा वस्तु और सेवा व्यापारिक साझेदार रहा और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 30.8 अरब डॉलर तक पहुँच गया। यह आँकड़ा दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ती परस्पर निर्भरता और सहयोग की संभावनाओं को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा और आवश्यक खनिजों के क्षेत्र में भारत और कनाडा के बीच सहयोग की अपार संभावनाएँ हैं। कनाडा प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है,जबकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और हरित संक्रमण के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए विश्वसनीय साझेदारों की तलाश में है। इसी तरह,शिक्षा और प्रतिभा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र कनाडा में अध्ययन करते हैं,जिससे लोगों के बीच संबंध और मजबूत हुए हैं।

रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग भी इस दौरे का एक अहम पहलू हो सकता है। वैश्विक स्तर पर बदलते सामरिक समीकरणों के बीच दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ा सकते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और नवाचार भी एजेंडे में शामिल हो सकता है।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का यह पहला भारत दौरा दोनों देशों के संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यदि प्रस्तावित समझौते और सहयोगी पहलें ठोस रूप लेती हैं,तो यह साझेदारी व्यापारिक,रणनीतिक और जन-से-जन संबंधों के स्तर पर नई ऊँचाइयों को छू सकती है। आने वाले दिनों में नई दिल्ली में होने वाली उच्चस्तरीय वार्ता इस बात को स्पष्ट करेगी कि भारत और कनाडा किस दिशा में अपने संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं।