मुंबई,31 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय सिनेमा के लिए एक और अच्छी खबर सामने आई है। अभिनेत्री और निर्माता प्रियंका चोपड़ा जोनस से जुड़ी भारतीय शॉर्ट फिल्म ‘वी वर हियर’ ने ऑस्कर की दौड़ में शामिल होने की पात्रता हासिल कर ली है। फिल्म की इस उपलब्धि से इसकी पूरी टीम उत्साहित है। प्रियंका चोपड़ा इस परियोजना से कार्यकारी निर्माता के रूप में जुड़ी हुई हैं। उन्होंने फिल्म की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि इसकी कहानी आज के दौर से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय को मनोरंजक और दिलचस्प तरीके से सामने लाती है। फिल्म में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर एक अलग तरह का नजरिया पेश किया गया है।
‘वी वर हियर’ एक मॉक्यूमेंट्री शैली में बनाई गई शॉर्ट फिल्म है। इसकी कहानी भारत के एक छोटे शहर में रहने वाले तीन बुजुर्गों के इर्द-गिर्द घूमती है। ये तीनों बुजुर्ग एआई के बढ़ते इस्तेमाल और उसके प्रभाव से परेशान हैं। इस तकनीक का विरोध करने के लिए वे एक असामान्य रास्ता अपनाते हैं और घरेलू उपकरणों का रूप धारण कर लेते हैं। फिल्म का यह विचार पहली नजर में हास्य पैदा करता है,लेकिन इसके पीछे तकनीक के तेजी से बदलते स्वरूप और आम लोगों की आशंकाओं को समझने की कोशिश भी छिपी है।
फिल्म की कहानी का आधार भले ही एक मजेदार कल्पना हो,लेकिन इसका विषय समकालीन समाज से जुड़ा हुआ है। आज एआई का इस्तेमाल शिक्षा, कारोबार, मनोरंजन, संचार और रोजमर्रा के कई कामों में तेजी से बढ़ रहा है। इस बदलाव के बीच तकनीक को लेकर लोगों के मन में उत्सुकता के साथ कई सवाल और चिंताएँ भी मौजूद हैं। ‘वी वर हियर’ इन्हीं पहलुओं को हल्के-फुल्के अंदाज में प्रस्तुत करती है। फिल्म के तीन बुजुर्ग पात्र अपने अनोखे तरीके से इस बदलाव का विरोध करते हैं। उनके व्यवहार और परिस्थितियों के जरिए कहानी हास्य के साथ तकनीक के प्रति मानवीय प्रतिक्रियाओं को भी सामने लाती है।
ऑस्कर की दौड़ में शामिल होने की पात्रता हासिल करने से पहले फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल चुकी है। इसे कई प्रमुख शॉर्ट फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया और पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। पाम स्प्रिंग्स इंटरनेशनल शॉर्टफेस्ट में फिल्म ने ‘बेस्ट लाइव-एक्शन शॉर्ट फिल्म’ और ‘बेस्ट कॉमेडी शॉर्ट’ का पुरस्कार अपने नाम किया। इन उपलब्धियों के बाद फिल्म ऑस्कर की दौड़ में शामिल होने के लिए योग्य हो गई। इस मान्यता ने फिल्म की टीम को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी कहानी को और अधिक दर्शकों तक पहुँचाने का अवसर दिया है।
प्रियंका चोपड़ा जोनस ने फिल्म से जुड़ने के अपने फैसले के बारे में बताते हुए कहा कि इसकी कहानी एक ऐसे विषय को मजेदार तरीके से उठाती है,जिसकी आज के समय में काफी अहमियत है। उनके मुताबिक,फिल्म का विचार और उसे प्रस्तुत करने का तरीका उन्हें पसंद आया। इसी वजह से वह कार्यकारी निर्माता के रूप में रचनात्मक टीम का साथ देने के लिए तुरंत तैयार हो गईं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कोशिश है कि इस कहानी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचने का मौका मिले।
प्रियंका का मानना है कि फिल्म मनोरंजन के माध्यम से एक जरूरी चर्चा को आगे बढ़ाती है। एआई जैसी तकनीक के प्रभाव पर दुनिया भर में बातचीत हो रही है और इसके इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। ऐसे में किसी गंभीर विषय को हास्य और कल्पनाशीलता के साथ पेश करना दर्शकों को उस पर नए तरीके से सोचने का अवसर दे सकता है। फिल्म की यही विशेषता प्रियंका को इससे जोड़ने की वजह बनी।
फिल्म के लेखक और निर्देशक प्रणव भसीन ने भी इस उपलब्धि पर अपनी खुशी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि ‘वी वर हियर’ का विचार शुरुआत में बेहद छोटा और मजेदार था। उनके दिमाग में तीन ऐसे बुजुर्गों की कल्पना आई थी,जो एआई को रोकना चाहते हैं। शुरुआत में यह केवल एक हास्यपूर्ण विचार था,लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ी,उन्हें इन पात्रों के व्यक्तित्व,उनकी दोस्ती और उनके दृढ़ इरादों से लगाव होने लगा। इसके बाद फिल्म केवल एक मजेदार परिस्थिति की कहानी नहीं रही,बल्कि तीन लोगों के आपसी संबंधों और उनके जिद्दी हौसले को दिखाने वाली रचना बन गई।
प्रणव भसीन के अनुसार,फिल्म की कहानी में भारत के सामाजिक और रोजमर्रा के जीवन की वास्तविकताओं को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत में कई बार वास्तविक घटनाएँ कल्पना से भी अधिक अजीब और अप्रत्याशित होती हैं। मॉक्यूमेंट्री शैली ने उन्हें इस बात का अवसर दिया कि वह फिल्म को असली लोगों और वास्तविक जगहों से जोड़ सकें। इस शैली के जरिए कहानी को वास्तविकता के करीब रखते हुए उसमें मौजूद हास्य और असामान्य परिस्थितियों को भी प्रभावी ढंग से दिखाया जा सका।
निर्देशक ने यह भी बताया कि फिल्म बनाते समय उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनका यह विचार दर्शकों तक किस तरह पहुँचेगा। उन्होंने अपनी रचनात्मक प्रक्रिया के बारे में कहा कि वह आमतौर पर किसी ऐसे विचार से शुरुआत करते हैं, जो उन्हें दिलचस्प या थोड़ा पागलपन भरा लगता है। इसके बाद वह उस विचार को अंत तक ले जाने की कोशिश करते हैं। ‘वी वर हियर’ के साथ भी उन्होंने यही किया। उन्हें शुरुआत में भरोसा नहीं था कि उनके दिमाग में आई यह अनोखी कल्पना दूसरे लोगों को भी समझ आएगी और पसंद आएगी। अब फिल्म का ऑस्कर की दौड़ के लिए योग्य होना उनके लिए किसी बड़े अनुभव से कम नहीं है।
प्रणव भसीन ने अपने बयान में फिल्म से जुड़े अनुभवी कलाकारों और सहयोगियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक युवा फिल्ममेकर के लिए एंड्रयू स्कॉट और प्रियंका चोपड़ा जोनस जैसे अनुभवी लोगों का साथ मिलना बड़ी बात है। उनके अनुसार,इन लोगों के सहयोग से फिल्म को व्यापक दर्शकों तक पहुँचाने की संभावनाएँ बढ़ी हैं। उन्होंने पूरी टीम की ओर से उत्साह जाहिर करते हुए कहा कि सभी चाहते हैं कि फिल्म की कहानी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचे।
‘वी वर हियर’ की खासियत इसका अनोखा कथानक और प्रस्तुति का तरीका है। एक तरफ यह तीन बुजुर्गों की हास्यपूर्ण गतिविधियों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन करती है, तो दूसरी तरफ एआई के बढ़ते प्रभाव जैसे विषय पर ध्यान खींचती है। फिल्म में बुजुर्ग पात्रों को केंद्र में रखकर यह दिखाने की कोशिश की गई है कि तकनीकी बदलाव का अनुभव हर पीढ़ी के लिए एक जैसा नहीं होता। जहाँ नई पीढ़ी तकनीक को तेजी से अपनाने की कोशिश करती है,वहीं कुछ लोगों के लिए यह बदलाव असहजता और चिंता का कारण बन सकता है। फिल्म इसी अंतर को हल्के अंदाज में सामने लाती है।
प्रियंका चोपड़ा जोनस का इस फिल्म से कार्यकारी निर्माता के रूप में जुड़ना भी इसकी अंतर्राष्ट्रीय पहचान के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भारतीय कहानियों को वैश्विक दर्शकों तक पहुँचाने में उनकी सक्रियता पहले भी चर्चा में रही है। अब ‘वी वर हियर’ की ऑस्कर पात्रता ने भारतीय शॉर्ट फिल्म जगत के लिए एक और अवसर पैदा किया है। हालाँकि,ऑस्कर की दौड़ में योग्य होना और अंतिम नामांकन हासिल करना अलग-अलग चरण हैं,लेकिन यह उपलब्धि अपने आप में फिल्म की अंतर्राष्ट्रीय यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
फिलहाल फिल्म की टीम इस सफलता को लेकर उत्साहित है। पाम स्प्रिंग्स इंटरनेशनल शॉर्टफेस्ट में मिले पुरस्कारों के बाद ऑस्कर की पात्रता ने ‘वी वर हियर’ को और अधिक चर्चा में ला दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि तीन बुजुर्गों की एआई के खिलाफ अनोखी मुहिम वाली यह भारतीय कहानी आगे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कितना सफर तय करती है।
