राजपाल यादव (तस्वीर क्रेडिट@askshivanisahu)

राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से मिली दो हफ्ते की राहत,2 करोड़ जमा करने का आखिरी मौका

नई दिल्ली,16 सितंबर (युआईटीवी)- अभिनेता राजपाल यादव को सात चेक बाउंस मामलों में चल रही कानूनी लड़ाई के बीच सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है। अदालत ने उन्हें रकम का इंतजाम करने के लिए दो सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है। इस अवधि में उन्हें कम से कम 2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा। इसके साथ ही अदालत ने उनका पासपोर्ट जमा कराने का भी निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राजपाल यादव को दिया गया यह अंतिम मौका है और उन्हें तय शर्तों का पालन करना होगा।

सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत से कुछ और समय देने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि अभिनेता को दोबारा जेल भेजने से फिलहाल शिकायतकर्ता को भी रकम हासिल नहीं होगी। ऐसे में उन्हें थोड़ी मोहलत दी जाए, ताकि वह बकाया राशि की व्यवस्था कर सकें। अदालत ने इस अनुरोध पर दो सप्ताह का समय तो दिया,लेकिन साथ ही आर्थिक शर्त भी तय कर दी। राजपाल यादव को इस अवधि के भीतर कम से कम 2 करोड़ रुपये जमा करने होंगे और आगे की रकम के भुगतान को लेकर ठोस प्रस्ताव सामने रखना होगा।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव के पिछले आचरण को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि पहले के व्यवहार को देखते हुए उन पर भरोसा करना आसान नहीं है। अभिनेता सुनवाई में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े हुए थे। अदालत की टिप्पणी के बीच उन्हें साफ तौर पर यह संकेत दिया गया कि अब उन्हें अपने किए गए वादों को पूरा करके दिखाना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि राजपाल यादव फिल्मों में अभिनय के लिए जाने जाते हैं और उम्मीद है कि वह अदालत की कार्यवाही को उसी तरह नहीं लेंगे।

यह पूरा विवाद मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सात चेक बाउंस मामलों का है। इन मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक मामले में तीन महीने की सजा सुनाई थी। हालाँकि,सभी मामलों की सजा एक साथ चलाने का आदेश दिया गया था। हाईकोर्ट के इस फैसले को राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने उन्हें फिलहाल राहत देते हुए रकम जमा करने का अंतिम अवसर दिया है।

मामले की जड़ करीब 16 साल पुरानी है। वर्ष 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद ली थी। राजपाल यादव इस फिल्म से बतौर निर्देशक भी जुड़े थे। फिल्म वर्ष 2012 में रिलीज हुई,लेकिन दर्शकों के बीच अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी। फिल्म के कमजोर प्रदर्शन के बाद उसके निर्माण से जुड़ी वित्तीय देनदारी को चुकाना राजपाल यादव के लिए मुश्किल होता चला गया।

समय बीतने के साथ मूल रकम के अलावा ब्याज और अन्य देनदारियाँ भी जुड़ती गईं। इसी दौरान रकम की वापसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच समझौते और भुगतान की कोशिशें हुईं। कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक जब बैंक से पास नहीं हुए,तो विवाद ने कानूनी रूप ले लिया। इसके बाद मुरली प्रोजेक्ट्स की ओर से राजपाल यादव और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज कराए गए।

इन सात मामलों में चेक बाउंस होने के बाद अदालतों में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। वर्ष 2018 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को दोषी ठहराया। इसके बाद मामले को आगे की अदालतों में चुनौती दी गई। अलग-अलग स्तरों पर सुनवाई के बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुँचा,जहाँ सातों मामलों में राजपाल यादव की दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया। हाईकोर्ट ने प्रत्येक मामले में तीन महीने की सजा सुनाई और सभी सजाओं को एक साथ चलाने का आदेश दिया।

इस कानूनी विवाद के दौरान बकाया रकम चुकाने को लेकर कई बार भुगतान की बात सामने आई। शिकायतकर्ता को कुछ राशि का भुगतान भी किया गया,लेकिन पूरी देनदारी का समाधान नहीं हो सका। इसके बाद राजपाल यादव को सजा भुगतने के लिए जेल जाने की स्थिति का सामना करना पड़ा। अब उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और इसी याचिका पर शीर्ष अदालत में सुनवाई चल रही है।

सुप्रीम कोर्ट की ताजा सुनवाई में अदालत ने फिलहाल उनकी तत्काल जेल वापसी को टालते हुए दो सप्ताह की मोहलत दी है। हालाँकि,यह राहत पूरी तरह बिना शर्त नहीं है। राजपाल यादव को 2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा और अपना पासपोर्ट भी अदालत के निर्देश के अनुसार जमा करना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब आगे कोई और अवसर मिलना तय नहीं है।

अब सभी की नजरें 5 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं। उस समय यह देखा जाएगा कि राजपाल यादव अदालत की तय शर्तों को किस हद तक पूरा कर पाते हैं और बकाया रकम के भुगतान को लेकर क्या ठोस प्रस्ताव सामने रखते हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने उन्हें कुछ समय जरूर दिया है,लेकिन अदालत की सख्त टिप्पणियों से साफ है कि इस मामले में आगे की कार्रवाई तय शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी।