नई दिल्ली,16 सितंबर (युआईटीवी)- नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद भारत-चीन संबंधों को लेकर चीन की ओर से सहयोग बढ़ाने का संदेश सामने आया है। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा है कि चीन दोनों नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमतियों को लागू करने और दोनों देशों के बीच सहयोग के क्षेत्रों का विस्तार करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा।
चीनी राजदूत ने सोशल मीडिया मंच पर अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह तीन वर्षों में दोनों नेताओं की तीसरी मुलाकात है। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात कजान और तियानजिन में हुई थी। चीन की ओर से जारी बयानों में इन बैठकों को भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने और मतभेदों को उचित तरीके से संभालने की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
शू फेइहोंग ने कहा कि दोनों देशों के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमतियों में यह बात शामिल है कि चीन और भारत को साझेदार के तौर पर काम करना चाहिए। उनके मुताबिक,दुनिया के दो बड़ी आबादी वाले देशों और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्यों के रूप में भारत और चीन के लिए विकास पर ध्यान देना साझा हित का प्रमुख क्षेत्र है। उन्होंने मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान बढ़ाने और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
चीनी राजदूत ने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को लेकर भी दोनों देशों की चिंताओं को संतुलित तरीके से दूर करने की बात कही। उनके अनुसार, भारत और चीन को एक-दूसरे की आर्थिक और व्यापारिक चिंताओं को समझते हुए द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के स्थिर और स्वस्थ विकास को आगे बढ़ाना चाहिए। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार जारी रहने के बावजूद व्यापार असंतुलन, बाजार पहुँच और आपूर्ति शृंखला से जुड़े विषय लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। हालिया बैठकों में दोनों पक्षों ने आर्थिक एवं व्यापारिक संपर्क को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है।
सीमा से जुड़े मुद्दे भी भारत-चीन संबंधों में महत्वपूर्ण बने हुए हैं। दोनों नेताओं की बातचीत में सीमा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा मतभेदों को उचित तरीके से सँभालने पर जोर दिया गया। भारतीय पक्ष ने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए परस्पर सम्मान,परस्पर संवेदनशीलता और परस्पर हित के सिद्धांतों को महत्वपूर्ण बताया है। वहीं,चीनी पक्ष ने मतभेदों को नियंत्रित करने और संवाद एवं सहयोग बढ़ाने की बात कही है।
चीन के राजदूत ने ब्रिक्स के स्तर पर भी भारत के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देश ब्रिक्स की अध्यक्षता में एक-दूसरे का समर्थन करने, ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। दोनों देशों की ओर से बहुपक्षीय मंचों पर संवाद और सहयोग बढ़ाने पर जोर ऐसे समय में सामने आया है,जब ब्रिक्स के भीतर आर्थिक, तकनीकी और विकास से जुड़े मुद्दों पर सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हुआ। इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया। उनका भारत दौरा करीब सात वर्षों बाद हुआ। नई दिल्ली में उनकी मौजूदगी और प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत को दोनों देशों के संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया। दोनों नेताओं की यह बैठक ऐसे समय में हुई,जब भारत और चीन पिछले कुछ वर्षों में सीमा से जुड़े तनाव के बाद संबंधों को स्थिर करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।
ब्रिक्स के संदर्भ में चीन ने ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता भी रेखांकित की है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शिखर सम्मेलन में बहुपक्षीय सहयोग, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विनिर्माण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की पहल का उल्लेख किया। इससे संकेत मिलता है कि चीन ब्रिक्स को आर्थिक और विकास संबंधी सहयोग के एक व्यापक मंच के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
भारत और चीन के बीच संबंधों में सीमा विवाद के साथ-साथ व्यापार, निवेश, तकनीक, संपर्क और लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं। हाल के दौर में दोनों देशों के बीच कुछ संपर्कों को फिर से आगे बढ़ाने के प्रयास हुए हैं। भारतीय पक्ष ने जहां सीमा पर शांति को द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति के लिए जरूरी बताया है,वहीं चीन ने भी मतभेदों को उचित तरीके से सँभालने और सहयोग के क्षेत्रों को बढ़ाने की बात कही है।
शू फेइहोंग ने कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर दोनों नेताओं के बीच बनी सहमतियों को लागू करने, सहयोग की सूची को और लंबा करने,लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और बहुपक्षीय मंचों पर करीबी सहयोग जारी रखने के लिए काम करेगा। उन्होंने दोनों देशों के विकास और पुनरुत्थान के लिए एक-दूसरे के समर्थन की भी बात कही।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि भारत और चीन के बीच संवाद को आगे बढ़ाने और सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को विस्तार देने पर जोर दिया जा रहा है। हालाँकि,सीमा से जुड़े मुद्दों, व्यापार असंतुलन और अन्य द्विपक्षीय मतभेदों का समाधान आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रहेगा। दोनों देशों के बीच हालिया उच्चस्तरीय संपर्क और आधिकारिक बयानों से यह संकेत जरूर मिलता है कि संवाद और सहयोग को बनाए रखने पर दोनों पक्ष जोर दे रहे हैं। अब इन बैठकों में बनी सहमतियों को किस तरह लागू किया जाता है और इसका द्विपक्षीय संबंधों पर क्या असर पड़ता है,इस पर आगे नजर रहेगी।
