दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (तस्वीर क्रेडिट@shivanandrajlko)

राहुल गांधी को रेखा गुप्ता की खुली चुनौती,बोलीं- संसद में आइए, 1975 की इमरजेंसी और 1984 के दंगों पर होगी बहस

नई दिल्ली,4 नवंबर (युआईटीवी)- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक मंच पर बहस की चुनौती देने वाले राहुल गांधी को अब रेखा गुप्ता ने संसद में आमने-सामने चर्चा करने का खुला न्योता दिया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए कांग्रेस नेता को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें बहस करनी है,तो संसद में आएँ और देश के सामने अपनी बात रखें। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल से जुड़े कई विवादित ऐतिहासिक मुद्दों का भी जिक्र किया। इनमें 1975 में देश में लगाया गया आपातकाल और 1984 में दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगे प्रमुख रहे।

रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी की पोस्ट को साझा करते हुए उन्हें सीधे संबोधित किया। उन्होंने लिखा, “राहुल गांधी जी, ओपन चैलेंज। संसद में आइए। बहस करते हैं!” इसके बाद मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 1975 में राहुल गांधी की दादी और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था। उस दौरान विपक्षी नेताओं को जेल में बंद किया गया और प्रेस की स्वतंत्रता पर पाबंदियाँ लगाई गई थीं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर दौर बताते हुए कांग्रेस को घेरा।

दिल्ली की मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में वर्ष 1984 की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे, जब दिल्ली में हजारों निर्दोष सिखों की हत्या हुई थी। रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज भी उस घटना से जुड़ी राजनीतिक विरासत के सवालों से बच नहीं पाई है। उनके मुताबिक,इन मुद्दों पर संसद में खुलकर चर्चा होनी चाहिए,ताकि देश के सामने दोनों पक्ष अपनी बात रख सकें।

अपने पोस्ट के अंत में रेखा गुप्ता ने राहुल गांधी पर राजनीतिक तंज भी कसा। उन्होंने वर्ष 2014, 2019 और 2024 के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि लगातार तीन चुनावी कार्यकाल के बाद चौथा कार्यकाल राहुल गांधी के लिए सबसे बड़ा बुरा सपना होगा। उन्होंने कांग्रेस नेता को बहस से पीछे नहीं हटने की नसीहत देते हुए लिखा कि बहस की जगह भारत की संसद,नई दिल्ली होगी और इसके लिए किसी वीजा की जरूरत नहीं पड़ेगी। मुख्यमंत्री का यह संदेश सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में दोनों नेताओं के बीच संभावित बहस को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

दरअसल,रेखा गुप्ता की यह प्रतिक्रिया राहुल गांधी की उस चुनौती के बाद आई,जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक मंच पर बहस करने के लिए कहा था। राहुल गांधी ने मंगलवार शाम सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर प्रधानमंत्री से सवाल किया था कि विपक्ष को देशद्रोही बताने के आरोपों पर वह खुलकर चर्चा क्यों नहीं करते। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री अपनी सुविधा के अनुसार बहस का मंच और स्थान चुन सकते हैं। राहुल गांधी ने यह भी प्रस्ताव दिया था कि चर्चा के दौरान मीडिया और देश के युवा मौजूद रहें तथा किसी निष्पक्ष व्यक्ति को निर्णायक की भूमिका दी जा सकती है।

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा था कि प्रधानमंत्री को उनके साथ आमने-सामने बैठकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि देशद्रोही कौन है और विदेशी ताकतों से संबंध किसके हैं। उन्होंने आरोपों को लेकर सार्वजनिक चर्चा की माँग करते हुए कहा कि इस विषय पर जल्द से जल्द बहस होनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने अपने संदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का नाम भी लिया और सुझाव दिया कि यदि प्रधानमंत्री चाहें,तो उन्हें चर्चा के दौरान निर्णायक बनाया जा सकता है।

राहुल गांधी ने संभावित बहस के विषयों का भी विस्तार से उल्लेख किया था। उन्होंने कहा कि चर्चा में देश की वित्तीय व्यवस्था और आर्थिक ढाँचे से जुड़े सवाल उठाए जाएँगे। इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच हुए समझौते को लेकर भी उन्होंने कई सवाल पूछे। राहुल गांधी ने जानना चाहा कि यह समझौता किस प्रक्रिया के तहत हुआ,इसे इतनी जल्दी क्यों पूरा किया गया और इस संबंध में मंत्रिमंडल को जानकारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने एपस्टीन से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर सार्वजनिक रूप से चर्चा होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता ने अपने संदेश में यह भी कहा कि उनके खिलाफ पहले से कई मानहानि के मुकदमे चल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके ऊपर लगभग 45 मानहानि के मामले दर्ज हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि विदेशी संबंधों को लेकर लगाए गए उनके आरोपों पर आपत्ति है तो इस मामले में भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि बहस के दौरान सभी सवालों पर खुलकर बात होनी चाहिए, जिससे आरोपों और जवाबों की वास्तविकता सामने आ सके। अपने संदेश के आखिर में उन्होंने दीपावली की शुभकामनाएँ भी दीं।

राहुल गांधी की इस चुनौती के बाद रेखा गुप्ता ने बहस का स्थान संसद तय करते हुए कांग्रेस के पुराने कार्यकाल से जुड़े मुद्दे सामने रख दिए। इस तरह राजनीतिक बहस का केंद्र प्रधानमंत्री और राहुल गांधी के बीच प्रस्तावित चर्चा से आगे बढ़कर कांग्रेस के ऐतिहासिक फैसलों और घटनाओं तक पहुँच गया है। दोनों नेताओं के सोशल मीडिया संदेशों में अलग-अलग मुद्दों को उठाया गया है और एक-दूसरे को सार्वजनिक रूप से जवाब देने की चुनौती दी गई है।

फिलहाल, राहुल गांधी की ओर से रेखा गुप्ता की संसद में बहस करने की चुनौती पर कोई प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राहुल गांधी के प्रस्ताव पर कोई जवाब देंगे या नहीं। हालाँकि,दोनों पक्षों की ओर से किए गए इन पोस्ट के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह चुनौती संसद में किसी वास्तविक चर्चा का रूप लेगी या फिर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला सोशल मीडिया तक ही सीमित रहेगा।