तमिलनाडु में पलानीस्वामी के दावे से बदले राजनीतिक समीकरण (तस्वीर क्रेडिट@JaikyYadav16)

तमिलनाडु में सत्ता का सस्पेंस गहराया,पलानीस्वामी के दावे से बदले राजनीतिक समीकरण

चेन्नई,8 मई (युआईटीवी)- तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुँच चुकी है। विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य में ऐसी स्थिति पैदा कर दी है,जहाँ किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है और सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता लगातार बनी हुई है। इसी बीच,अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा है कि आखिरकार तमिलनाडु में सरकार अन्नाद्रमुक ही बनाएगी। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित गठबंधनों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

इस चुनाव में अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर जीत दर्ज की है। हालाँकि,सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत के आँकड़ें तक पहुँचने के लिए पार्टी को अभी कम-से-कम 10 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है। यही कारण है कि राज्यपाल की ओर से अभी तक विजय को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया गया है। राज्य में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति ने राजनीतिक गतिविधियों को और अधिक तेज कर दिया है।

इसी पृष्ठभूमि में अन्नाद्रमुक ने अपने विधायकों को पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के एक आलीशान रिसॉर्ट में ठहराया है। पार्टी के इस कदम को राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार,गुरुवार देर रात पलानीस्वामी ने रिसॉर्ट में मौजूद विधायकों के साथ लंबी बैठक की। इस बैठक में तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक स्थिति,संभावित गठबंधन और सरकार गठन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान पलानीस्वामी को सर्वसम्मति से अन्नाद्रमुक विधायक दल का नेता चुना गया। विधायकों ने उनके समर्थन में हस्ताक्षर किए हुए पत्र भी सौंपे। इस घटनाक्रम को अन्नाद्रमुक की अंदरूनी एकजुटता का संकेत माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह सत्ता की दौड़ से बाहर नहीं है और अभी भी सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सूत्रों के मुताबिक,पलानीस्वामी ने विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें धैर्य बनाए रखना चाहिए क्योंकि तमिलनाडु में अंततः सरकार अन्नाद्रमुक के नेतृत्व में ही बनेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में राजनीतिक परिस्थितियाँ तेजी से बदल सकती हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में अटकलों का दौर और तेज कर दिया है।

अन्नाद्रमुक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा है और उसने इस चुनाव में 47 सीटें हासिल की हैं। पार्टी के लगभग 28 विधायक फिलहाल पुडुचेरी के रिसॉर्ट में ठहरे हुए हैं। इसके अलावा,मन्नारगुडी से जीतने वाले अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम के विधायक एस. कामराज भी कथित तौर पर अन्नाद्रमुक खेमे के साथ मौजूद बताए जा रहे हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि पलानीस्वामी अपने समर्थन का दायरा बढ़ाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

रिसॉर्ट राजनीति को लेकर तमिलनाडु में चर्चाएँ जोरों पर हैं। सूत्रों का कहना है कि रिसॉर्ट के कमरे अगले सात दिनों के लिए बुक किए गए हैं और विधायकों को बिना अनुमति परिसर से बाहर नहीं जाने के निर्देश दिए गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम विधायकों को टूट-फूट या विरोधी दलों के संपर्क से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है। भारतीय राजनीति में इससे पहले भी कई राज्यों में ऐसे घटनाक्रम देखे जा चुके हैं,जहाँ बहुमत के संकट के दौरान विधायकों को रिसॉर्ट में रखा गया था।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्यपाल ने संकेत दिया है कि जो भी दल या गठबंधन आवश्यक संख्या बल साबित करेगा,उसी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इस बयान के बाद सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं और समर्थन जुटाने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और अन्नाद्रमुक के बीच संभावित समझौते को लेकर हो रही है। हालाँकि,दोनों दल लंबे समय से कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं,लेकिन सत्ता की गणित ने नई संभावनाओं को जन्म दे दिया है। अगर ऐसा कोई समझौता होता है,तो तमिलगा वेट्री कझगम के कई विधायक सामूहिक इस्तीफे पर विचार कर सकते हैं। इससे राज्य की राजनीति में और अधिक अस्थिरता पैदा होने की संभावना है।

विश्लेषकों का कहना है कि विजय की पार्टी ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसने तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। लंबे समय से राज्य की राजनीति द्रमुक और अन्नाद्रमुक के इर्द-गिर्द घूमती रही है,लेकिन इस चुनाव ने एक नए राजनीतिक केंद्र को जन्म दिया है। हालाँकि,बहुमत से दूर रहने के कारण विजय की राह आसान नहीं दिखाई दे रही है।

उधर,द्रमुक भी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी संभावित राजनीतिक अवसर को गंवाना नहीं चाहती। पार्टी नेतृत्व फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से बच रहा है,लेकिन अंदरखाने लगातार रणनीति बनाई जा रही है। राज्य में सरकार गठन को लेकर अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

तमिलनाडु की जनता अब यह देखने का इंतजार कर रही है कि आखिर सत्ता की इस जंग में कौन बाजी मारता है। क्या विजय समर्थन जुटाकर सरकार बनाएँगे या फिर पलानीस्वामी का दावा सच साबित होगा,यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा। फिलहाल राज्य की राजनीति में सस्पेंस,रणनीति और जोड़-तोड़ का दौर अपने चरम पर पहुँच चुका है।