नोरा फतेही

‘सरके चुनर’ विवाद पर महिला आयोग के सामने पेश हुईं नोरा फतेही,माँगी माफी और किया अनाथ बच्चियों की शिक्षा का बड़ा सामाजिक संकल्प

नई दिल्ली,8 मई (युआईटीवी)- कन्नड़ फिल्म केडी द डेविल के चर्चित गाने सरके चुनर को लेकर उठे विवाद के बीच अभिनेत्री नोरा फतेही गुरुवार को राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष पेश हुईं। पिछले कई दिनों से यह मामला सोशल मीडिया से लेकर फिल्म जगत तक चर्चा का विषय बना हुआ था। गाने में उनकी प्रस्तुति को लेकर कई लोगों ने आपत्ति जताई थी और आरोप लगाया था कि इस प्रकार की प्रस्तुतियाँ महिलाओं की छवि को गलत तरीके से पेश करती हैं। बढ़ते विवाद के बाद महिला आयोग ने अभिनेत्री को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा था।

महिला आयोग के सामने पेश होने के बाद नोरा फतेही ने मीडिया से बातचीत करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी माँगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना या महिलाओं की गरिमा को नुकसान पहुँचाना नहीं था। अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि एक कलाकार होने के नाते उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को और अधिक गंभीरता से समझना चाहिए था। उन्होंने कहा कि कभी-कभी मनोरंजन की दुनिया में कलाकार ऐसी परिस्थितियों में फँस जाते हैं,जहाँ चीजें अनजाने में विवाद का रूप ले लेती हैं।

नोरा ने कहा, “मैं अपने किए पर माफी माँगती हूँ। मेरा उद्देश्य किसी की भी भावना को ठेस पहुँचाना नहीं था। मैं सिर्फ एक ऐसी स्थिति में फँस गई थी,जहाँ बातें विवादित हो गईं। एक कलाकार होने के नाते मुझे जिम्मेदार होना चाहिए। इसलिए मैं दिल से माफी माँगती हूँ।” अभिनेत्री के इस बयान को कई लोग विवाद को शांत करने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।

महिला आयोग के साथ हुई बातचीत को लेकर भी नोरा ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आयोग के सदस्यों ने उनकी बात को बहुत संवेदनशीलता और धैर्य के साथ सुना। अभिनेत्री ने आयोग का आभार जताते हुए कहा कि चर्चा केवल विवाद तक सीमित नहीं रही,बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी बातचीत हुई। इसी दौरान उन्होंने एक बड़ा सामाजिक फैसला लेने की घोषणा की।

नोरा फतेही ने बताया कि उन्होंने कुछ अनाथ लड़कियों की पढ़ाई का खर्च उठाने का निर्णय लिया है। उनके अनुसार,यदि समाज कलाकारों से जिम्मेदारी की अपेक्षा करता है,तो कलाकारों को भी समाज के लिए कुछ सकारात्मक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कदम केवल विवाद से निकलने के लिए नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की भावना से उठाया गया है। अभिनेत्री के इस फैसले की कई लोगों ने सराहना भी की है।

इस पूरे मामले में यह पहला अवसर नहीं है,जब फिल्म से जुड़े कलाकार महिला आयोग के सामने पेश हुए हों। इससे पहले अभिनेता संजय दत्त भी 27 अप्रैल को आयोग के समक्ष उपस्थित हुए थे। सुनवाई के दौरान उन्होंने भी गाने को लेकर उठे विवाद पर खेद व्यक्त किया था। इसके साथ ही संजय दत्त ने सामाजिक कल्याण की दिशा में कदम उठाते हुए 50 आदिवासी बच्चियों की शिक्षा का खर्च उठाने का ऐलान किया था। अब नोरा फतेही द्वारा भी अनाथ लड़कियों की पढ़ाई का जिम्मा लेने के फैसले को उसी कड़ी में देखा जा रहा है।

दरअसल, ‘सरके चुनर’ गाने के रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिली थीं। कुछ लोगों ने गाने के बोल और प्रस्तुति को अश्लील बताते हुए इसका विरोध किया। वहीं कई सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी सवाल उठाए कि क्या मनोरंजन के नाम पर महिलाओं की छवि को इस प्रकार पेश करना उचित है। कई यूजर्स ने कलाकारों और फिल्म निर्माताओं की सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर भी बहस छेड़ दी थी।

हालाँकि,दूसरी ओर कुछ लोगों ने इस विवाद को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी जोड़कर देखा। उनका कहना था कि फिल्मों और गीतों को केवल मनोरंजन के नजरिए से देखा जाना चाहिए और कलाकारों को हर बार विवादों के घेरे में लाना सही नहीं है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर लंबे समय तक बहस चलती रही,जहाँ एक पक्ष ने गाने का विरोध किया,तो दूसरा पक्ष कलाकारों के समर्थन में खड़ा दिखाई दिया।

फिल्म उद्योग में इस तरह के विवाद कोई नई बात नहीं हैं। इससे पहले भी कई गानों और फिल्मों को लेकर सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के नाम पर विरोध होता रहा है,लेकिन इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग की सक्रियता ने इसे और अधिक गंभीर बना दिया। आयोग का मानना था कि लोकप्रिय कलाकारों की प्रस्तुतियों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और ऐसे में उन्हें अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का ध्यान रखना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि मनोरंजन उद्योग और समाज के बीच संतुलन बनाए रखना आज के दौर में बड़ी चुनौती बन चुका है। एक ओर निर्माता और कलाकार दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए नए प्रयोग करते हैं, वहीं दूसरी ओर समाज का एक वर्ग सांस्कृतिक मूल्यों और महिलाओं की गरिमा को लेकर चिंतित रहता है। इसी कारण ऐसे विवाद अक्सर बड़े सामाजिक विमर्श का रूप ले लेते हैं।

फिलहाल, नोरा फतेही की माफी और उनके सामाजिक संकल्प के बाद विवाद कुछ हद तक शांत होता दिखाई दे रहा है। हालाँकि,यह मामला एक बार फिर यह सवाल छोड़ गया है कि मनोरंजन और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आने वाले समय में फिल्म उद्योग के लिए यह घटना एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है,जहाँ लोकप्रियता और जिम्मेदारी दोनों को साथ लेकर चलने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।