नई दिल्ली,11 जून (युआईटीवी)- भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी ) ने एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन संबंधी खुलासों के नियमों को अधिक व्यावहारिक और संतुलित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बाजार नियामक ने एक नया प्रस्ताव जारी किया है,जिसके तहत व्यक्तिगत अधिकारियों के नाम के साथ वेतन सार्वजनिक करने की मौजूदा व्यवस्था को बदलकर समेकित आँकड़ों पर आधारित प्रणाली लागू की जा सकती है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखने के साथ-साथ कर्मचारियों की निजता और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक जरूरतों के बीच संतुलन स्थापित करना है।
सेबी का मानना है कि निवेशकों को कंपनियों की वेतन संरचना के बारे में पर्याप्त जानकारी मिलनी चाहिए,लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि व्यक्तिगत कर्मचारियों की निजी जानकारी अनावश्यक रूप से सार्वजनिक न हो। इसी सोच के तहत बाजार नियामक ने सुझाव दिया है कि एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ अपनी वेबसाइट पर वरिष्ठ प्रबंधन के कुल वेतन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएँ,लेकिन किसी व्यक्ति विशेष के नाम के साथ उसका वेतन सार्वजनिक करने की आवश्यकता न हो।
नए प्रस्ताव के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी,मुख्य निवेश अधिकारी और मुख्य परिचालन अधिकारी जैसे वरिष्ठ पदों पर कार्यरत अधिकारियों के वेतन की जानकारी समेकित रूप में प्रकाशित की जाएगी। इसके अलावा,सबसे अधिक वेतन पाने वाले शीर्ष दस कर्मचारियों के कुल वेतन और निर्धारित सीमा से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के कुल पारिश्रमिक का भी खुलासा किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत व्यक्तिगत स्तर पर वेतन का विवरण देने के बजाय सामूहिक आँकड़े उपलब्ध कराए जाएँगे,जिससे निवेशकों को कंपनी की वेतन संरचना का व्यापक आकलन करने में मदद मिल सकेगी।
सेबी के प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वे सभी कर्मचारी इस खुलासा व्यवस्था के दायरे में आएँगे जिनकी वार्षिक आय कम से कम 1.02 करोड़ रुपये है। वहीं यदि कोई कर्मचारी पूरे वर्ष के बजाय वर्ष के किसी हिस्से में कार्यरत रहा है,तो उसके लिए 8.5 लाख रुपये प्रति माह की आय सीमा लागू होगी। इस प्रकार नियामक ने उच्च वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को पहचानने के लिए स्पष्ट मानदंड तय करने का सुझाव दिया है।
यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है,जब म्यूचुअल फंड उद्योग की संस्था एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया ने वेतन संबंधी खुलासों को लेकर अपनी चिंताएँ सेबी के सामने रखी थीं। उद्योग संगठन का कहना था कि व्यक्तिगत वेतन संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने से कर्मचारियों की निजता प्रभावित हो सकती है और इससे उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा ऐसी जानकारी का निवेशकों के निवेश संबंधी निर्णयों पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया ने सुझाव दिया कि एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को अपनी वेतन और पारिश्रमिक नीति का खुलासा करना चाहिए,लेकिन व्यक्तिगत वेतन सार्वजनिक करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। संगठन ने यह भी प्रस्ताव दिया कि मुख्य कर्मचारियों और उनकी संख्या से जुड़ी मौजूदा जानकारी को एकीकृत करके एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जाए,ताकि सूचना व्यवस्था अधिक सरल और व्यवस्थित बन सके।
उद्योग संगठन ने फंड मैनेजरों के वेतन संबंधी जानकारी को लेकर भी एक अलग सुझाव दिया है। उसके अनुसार फंड मैनेजरों के पारिश्रमिक से जुड़ी जानकारी स्कीम स्तर पर उपलब्ध कराई जा सकती है,लेकिन यह जानकारी केवल उन निवेशकों को दी जानी चाहिए जिन्होंने संबंधित स्कीम में निवेश किया हो और जो इसकी माँग करें। इससे निवेशकों की सूचना संबंधी जरूरतें भी पूरी होंगी और कर्मचारियों की गोपनीयता भी बनी रहेगी।
सेबी ने अपने परामर्श पत्र में कहा है कि प्रस्तावित व्यवस्था से वरिष्ठ प्रबंधन के वेतन की अधिक व्यवस्थित और व्यापक जानकारी उपलब्ध होगी। इसके माध्यम से यूनिटधारक यह समझ सकेंगे कि किसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी में वरिष्ठ स्तर पर कुल कितना पारिश्रमिक दिया जा रहा है। नियामक का मानना है कि समेकित आँकड़े निवेशकों को आवश्यक जानकारी प्रदान करेंगे और साथ ही व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा भी करेंगे।
उद्योग की ओर से यह भी तर्क दिया गया है कि निवेश संबंधी निर्णय मुख्य रूप से किसी स्कीम के प्रदर्शन,जोखिम प्रबंधन,परिसंपत्ति आवंटन,निवेश रणनीति और व्यय अनुपात जैसे कारकों के आधार पर लिए जाते हैं। किसी व्यक्ति विशेष को मिलने वाले वेतन की जानकारी निवेशकों के निर्णयों को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक नहीं होती। इसलिए व्यक्तिगत वेतन का सार्वजनिक खुलासा निवेशकों के हित में कोई विशेष अतिरिक्त लाभ नहीं पहुंचाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि म्यूचुअल फंड उद्योग आज प्रतिभाशाली पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए कई अन्य वित्तीय क्षेत्रों से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज और वैकल्पिक निवेश फंड जैसे क्षेत्रों में इस प्रकार की व्यक्तिगत वेतन जानकारी सार्वजनिक करने की बाध्यता नहीं है। ऐसे में केवल म्यूचुअल फंड उद्योग पर यह नियम लागू होने से प्रतिभा आकर्षित करने और बनाए रखने में चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं।
इसके अतिरिक्त,व्यक्तिगत वेतन जानकारी सार्वजनिक होने से कर्मचारियों की निजी सुरक्षा और डेटा गोपनीयता से जुड़े जोखिम भी बढ़ सकते हैं। उद्योग जगत का मानना है कि उच्च वेतन पाने वाले अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक होने पर उनके निजी डेटा के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है। यही कारण है कि उद्योग लंबे समय से अधिक संतुलित और गोपनीयता का सम्मान करने वाली व्यवस्था की माँग करता रहा है।
सेबी का नया प्रस्ताव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। इसमें पारदर्शिता और जवाबदेही को बनाए रखते हुए कर्मचारियों की निजता की रक्षा करने की कोशिश की गई है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है,तो एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को वेतन संबंधी खुलासों के लिए अधिक व्यावहारिक ढाँचा मिलेगा और निवेशकों को भी वरिष्ठ प्रबंधन के पारिश्रमिक से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध होती रहेगी।
अब इस प्रस्ताव पर बाजार सहभागियों,उद्योग संगठनों और अन्य हितधारकों की राय ली जाएगी। प्राप्त सुझावों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर सेबी अंतिम नियम तैयार करेगा। वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है,तो यह भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार साबित हो सकता है।
