पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (तस्वीर क्रेडिट@msaurabhshukla)

यूएन में शहबाज शरीफ ने भारत पर साधा निशाना,राइट टू रिप्लाई में मिला जवाब; ‘फॉर्म-47’ और आतंकवाद पर घेरा

न्यूयॉर्क,26 सितंबर (युआईटीवी)- संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन के दौरान भारत को लेकर कई आरोप लगाए और कश्मीर तथा सिंधु नदी के पानी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सिंधु जल संधि को लेकर भारत पर निशाना साधते हुए कहा कि सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए जीवनरेखा है। वहीं, भारत ने पाकिस्तान के इन दावों पर संयुक्त राष्ट्र में राइट टू रिप्लाई के तहत जवाब दिया और पाकिस्तान के राजनीतिक रिकॉर्ड, आतंकवाद तथा अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए।

शहबाज शरीफ ने 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कश्मीर को पाकिस्तान की ‘गले की नस’ बताया। उन्होंने अपने भाषण में कश्मीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और भारत की नीतियों पर आरोप लगाए। इसके साथ ही उन्होंने सिंधु नदी के पानी का मुद्दा भी उठाया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि सिंधु नदी प्रणाली केवल पाकिस्तान के लोगों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है,बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए जीवनरेखा है।

शहबाज शरीफ ने भारत पर पानी को कथित तौर पर ‘हथियार’ के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नदियों को देशों को जोड़ना चाहिए, उन्हें बांटने का माध्यम नहीं बनना चाहिए। हालाँकि,अपने भाषण में शांति और संवाद की आवश्यकता पर जोर देने के साथ ही उन्होंने भारत के खिलाफ कड़े तेवर भी दिखाए। पाकिस्तान की ओर से पहले भी सिंधु जल संधि और भारत की जल परियोजनाओं को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर चिंता जताई जाती रही है।

शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ लगाए जाने वाले आरोपों को दोहराया और अपने देश के रुख को सही ठहराने की कोशिश की। भारत की ओर से हालांकि पाकिस्तान के इन दावों को स्वीकार नहीं किया गया और संयुक्त राष्ट्र में जवाब देने के लिए राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल किया गया।

भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के भाषण का जवाब दिया। उन्होंने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए उसके राजनीतिक और आतंकवाद से जुड़े रिकॉर्ड का मुद्दा उठाया। भारत ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लगाए जा रहे आरोपों का आकलन उसके अपने रिकॉर्ड के संदर्भ में किया जाना चाहिए।

भारत के जवाब में पाकिस्तान की चुनावी राजनीति में चर्चित रहे ‘फॉर्म-47’ का भी उल्लेख किया गया। वर्ष 2024 के आम चुनाव के बाद पाकिस्तान में कई निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों को लेकर विवाद सामने आया था। विपक्षी दलों और उम्मीदवारों ने कुछ सीटों पर शुरुआती परिणामों और बाद में घोषित परिणामों के बीच अंतर के आरोप लगाए थे। इसी संदर्भ में फॉर्म-47 का नाम पाकिस्तान की चुनावी राजनीति में लगातार चर्चा में रहा है।

भारत ने इसी मुद्दे को पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया। राइट टू रिप्लाई के दौरान पाकिस्तान के लोकतांत्रिक ढाँचे और राजनीतिक प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए गए। भारत की ओर से यह संकेत दिया गया कि पाकिस्तान को दूसरे देशों की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर टिप्पणी करने से पहले अपने राजनीतिक और संस्थागत रिकॉर्ड पर भी ध्यान देना चाहिए।

भारतीय पक्ष ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी पाकिस्तान को घेरा। पेटल गहलोत ने पाकिस्तान में अल-कायदा के पूर्व प्रमुख ओसामा बिन लादेन के लंबे समय तक मौजूद रहने का संदर्भ दिया। ओसामा बिन लादेन को 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी अभियान में मारा गया था। भारत ने इस घटना का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ उसके दावों और उसके रिकॉर्ड के बीच अंतर पर सवाल उठाया।

भारत ने पाकिस्तान में धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों की स्थिति का मुद्दा भी उठाया। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कट्टरता, नफरत और ईशनिंदा कानूनों से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया। भारत का कहना था कि पाकिस्तान को दूसरे देशों में मानवाधिकारों और अधिकारों की स्थिति पर टिप्पणी करने से पहले अपने यहां की परिस्थितियों पर भी ध्यान देना चाहिए।

राइट टू रिप्लाई में भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य टकराव को लेकर भी तीखी बयानबाजी हुई। शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई और उसके दावों को सफलता के रूप में पेश करने की कोशिश की थी। इसके जवाब में भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के इन दावों पर सवाल उठाया और सैन्य ठिकानों से जुड़ी तस्वीरों और अन्य सबूतों का हवाला दिया।

पेटल गहलोत ने कहा कि दुनिया के सामने उपग्रह तस्वीरें और अन्य सबूत मौजूद हैं, जिनमें भारतीय कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान के सैन्य एयरबेस को हुए नुकसान का उल्लेख किया जा सकता है। उन्होंने पाकिस्तान के जीत के दावे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि क्षतिग्रस्त रनवे और जले हुए हैंगर पाकिस्तान को जीत लगते हैं, तो वह उस जीत का जश्न मनाने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की सेना ने संघर्षविराम की मांग की थी।

इस बयान के जरिए भारत ने पाकिस्तान के उस नैरेटिव को चुनौती दी,जिसमें वह सैन्य टकराव के दौरान अपनी जीत का दावा करता रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य घटनाओं की अलग-अलग व्याख्या की जाती रही है और इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के दावों में स्पष्ट अंतर देखने को मिलता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के जवाब ने इस मतभेद को एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सामने ला दिया।

शहबाज शरीफ की संयुक्त राष्ट्र यात्रा के दौरान केवल महासभा का भाषण ही चर्चा में नहीं रहा। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रवेश करते समय उन्हें पत्रकारों के सवालों का भी सामना करना पड़ा। इन सवालों में भारत के खिलाफ पाकिस्तान के आरोपों के बजाय पाकिस्तान के अपने आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड को लेकर सवाल पूछे गए।

एक पत्रकार ने शहबाज शरीफ से सवाल किया कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेगा। सवाल सीधे तौर पर पाकिस्तान की उस छवि से जुड़ा था, जिस पर भारत लंबे समय से अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सवाल उठाता रहा है। शहबाज शरीफ ने पत्रकार के सवाल का जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गए।

इसके बाद पत्रकार ने पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद को लेकर भी सवाल किया। उनसे पूछा गया कि पाकिस्तान हाफिज सईद के खिलाफ कब मुकदमा चलाएगा। इस सवाल पर भी शहबाज शरीफ ने कोई जवाब नहीं दिया। वह बिना प्रतिक्रिया दिए आगे बढ़ गए।

हाफिज सईद का नाम भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद से जुड़े विवादों में लंबे समय से सामने आता रहा है। उसे संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है। भारत उसे 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल मानता है। अमेरिकी सरकार ने भी उसके बारे में जानकारी देने के लिए इनाम की घोषणा की थी।

इस घटनाक्रम ने शहबाज शरीफ की संयुक्त राष्ट्र यात्रा के दो अलग-अलग पहलुओं को सामने रखा। एक तरफ उन्होंने महासभा के मंच से भारत के खिलाफ कश्मीर, पानी और सैन्य कार्रवाई जैसे मुद्दे उठाए,वहीं दूसरी तरफ जब पत्रकारों ने उनसे पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड और हाफिज सईद को लेकर सीधे सवाल किया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देते हुए केवल कश्मीर और पानी के मुद्दे तक अपनी प्रतिक्रिया सीमित नहीं रखी। उसने पाकिस्तान की चुनावी व्यवस्था,आतंकवाद, अल्पसंख्यकों की स्थिति और सैन्य दावों को भी चर्चा में ला दिया। खास तौर पर फॉर्म-47 का उल्लेख पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था को लेकर भारत के पलटवार का हिस्सा रहा।

पाकिस्तान में वर्ष 2024 के आम चुनाव के बाद चुनावी नतीजों को लेकर विपक्षी दलों और उम्मीदवारों की ओर से सवाल उठाए गए थे। कई निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों ने परिणामों में बदलाव या शुरुआती और अंतिम आँकड़ों के बीच अंतर के आरोप लगाए थे। फॉर्म-47 चुनाव परिणामों से जुड़ा आधिकारिक दस्तावेज है और इसी को लेकर पाकिस्तान में राजनीतिक विवाद सामने आया था। भारत ने इसी विवाद का संदर्भ देते हुए पाकिस्तान के लोकतांत्रिक दावों पर सवाल उठाया।

पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर, पानी, आतंकवाद और सैन्य घटनाओं को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे। शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में भारत के खिलाफ पाकिस्तान के पारंपरिक मुद्दों को उठाया, जबकि भारत ने राइट टू रिप्लाई के जरिए पाकिस्तान के राजनीतिक और आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड को सामने रखा।

इस बीच,पत्रकारों के सवालों का घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से जब आतंकवादियों को कथित पनाह देने और हाफिज सईद पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब नहीं दिया। इसके विपरीत,संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान के आरोपों का विस्तार से जवाब दिया और उसके सामने कई ऐसे मुद्दे रखे, जिन पर पाकिस्तान को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से बहस होती रही है।

इस तरह शहबाज शरीफ की संयुक्त राष्ट्र यात्रा में एक ओर भारत के खिलाफ कड़े आरोप और दूसरी ओर भारत का जवाब प्रमुख चर्चा का विषय बन गया। कश्मीर और सिंधु जल संधि से शुरू हुई बयानबाजी फॉर्म-47, आतंकवाद, ओसामा बिन लादेन, अल्पसंख्यकों की स्थिति और सैन्य दावों तक पहुँच गई। संयुक्त राष्ट्र महासभा का मंच एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच पुराने विवादों और दोनों देशों के अलग-अलग दावों का केंद्र बना रहा।