सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट के घटिया निर्माण को लेकर दोषी अधिकारियों की सीबीआई करे जांच: डीडीए

सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट के घटिया निर्माण को लेकर दोषी अधिकारियों की सीबीआई करे जांच: डीडीए

नई दिल्ली, 4 मार्च (युआईटीवी/आईएएनएस)- दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने मुखर्जी नगर में सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट के खराब निर्माण में शामिल डीडीए अधिकारियों, ठेकेदारों और बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए सीबीआई से शिकायत दर्ज की है, जिसने सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में डाल दी है। अपार्टमेंट 2007-2009 के दौरान बनाए गए थे और 2011-2012 में निवासियों को आवंटित किए गए थे। लेकिन कुछ ही सालों में बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स संरचनात्मक रूप से असुरक्षित हो गया है।

336 एचआईजी/एमआईजी फ्लैटों वाले बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स में ‘खामियों’ को गंभीरता से लेते हुए उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने 24 जनवरी को तत्काल कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों/बिल्डरों/निर्माण एजेंसियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई तत्काल की जाए और उक्त इमारतों के निर्माण में चूक के लिए जिम्मेदार सभी डीडीए अधिकारियों की पहचान करने के लिए एक सतर्कता जांच हो। जांच में घटना के लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

डीडीए ने अब सीबीआई से अनुरोध किया है कि वह धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, दूसरों के जीवन और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के लिए शामिल सभी ठेकेदारों सहित विनर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और ग्रोवर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, परीक्षण एजेंसियों भारत टेस्ट हाउस और दिल्ली टेस्ट हाउस, सभी संबंधित डीडीए अधिकारियों और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें।

दोषी डीडीए अधिकारियों में इस अवधि के दौरान तीन सदस्य (इंजीनियरिंग), छह चीफ इंजीनियर, नौ सुपरिंगटेनडिंग इंजीनियर, नौ एग्क्यूटिव इंजीनियर, चार असिस्टेंट इंजीनियर और आठ ज्यूनियर इंजीनियर शामिल हैं।

एलजी के निदेशरें के अनुसार, डीडीए द्वारा मामले में दोषी अधिकारियों की भूमिका का पता लगाने के लिए एक सतर्कता जांच की गई थी।

सतर्कता जांच ने डीडीए के अधिकारियों और बिल्डरों/ठेकेदारों के बीच मिलीभगत की पुष्टि की है, जिसके चलते निर्माण के दौरान गुणवत्ता और संरचनात्मक सुरक्षा की आवश्यकता से समझौता किया गया। सैकड़ों निवासियों के जीवन और संपत्ति को खतरे में डालने के अलावा डीडीए को गलत नुकसान हुआ।

उपराज्यपाल ने डीडीए को आरडब्ल्यूए के परामर्श से परिसर के पुनर्विकास और पुनर्वास योजना तैयार करने का आदेश दिया है।

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