कंगना रनौत

‘सरके चुनर तेरी’ विवाद पर कंगना रनौत का तीखा हमला,बोलीं- बॉलीवुड सस्ती पब्लिसिटी के लिए पार कर रहा सारी हदें

मुंबई, 18 मार्च (युआईटीवी)- फिल्म ‘केडी: द डेविल’ के गाने ‘सरके चुनर तेरी’ को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस को तेज कर दिया है। इस पूरे मामले पर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए हिंदी फिल्म इंडस्ट्री पर निशाना साधा है। संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि बॉलीवुड अब सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है और उसे आलोचना के बावजूद कोई शर्म नहीं आ रही है।

कंगना रनौत ने कहा कि इस तरह के गाने और कंटेंट कोई नई बात नहीं हैं,लेकिन अब इनका प्रभाव ज्यादा स्पष्ट और चिंताजनक रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा, “लोग बचपन से इस तरह के गाने सुनते आ रहे हैं,लेकिन अब इसका असर समाज पर ज्यादा साफ दिखाई देने लगा है। हिंदी सिनेमा पर कुछ हद तक नियंत्रण जरूरी हो गया है।” उनके इस बयान ने सेंसरशिप और फिल्मी कंटेंट की गुणवत्ता को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में परिवार के साथ बैठकर फिल्में या टीवी देखना मुश्किल होता जा रहा है,क्योंकि कंटेंट में अश्लीलता और डबल मीनिंग संवादों की भरमार हो गई है। उनका मानना है कि मनोरंजन के नाम पर जो सामग्री परोसी जा रही है,वह समाज के सांस्कृतिक मूल्यों को प्रभावित कर रही है। इस संदर्भ में उन्होंने सेंसर बोर्ड को और सख्त बनाने की माँग की,ताकि दर्शकों को साफ-सुथरा और पारिवारिक माहौल में देखने लायक कंटेंट मिल सके।

दरअसल,यह पूरा विवाद फिल्म ‘केडी: द डेविल’ के गाने ‘सरके चुनर तेरी’ के रिलीज के बाद शुरू हुआ। इस गाने में नोरा फतेही और संजय दत्त नजर आए थे। गाने के सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसके बोल और डांस स्टेप्स को लेकर तीखी आलोचना शुरू हो गई। कई यूजर्स ने इसे अश्लील और आपत्तिजनक बताते हुए विरोध जताया।

विवाद तब और बढ़ गया जब मशहूर गायक अरमान मलिक ने भी इस गाने की आलोचना करते हुए इसे “गीत लेखन का नया निचला स्तर” बताया। उनके इस बयान ने बहस को और हवा दे दी और फिल्म इंडस्ट्री के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद सामने आने लगे।

लगातार बढ़ते विरोध के बीच फिल्म के निर्माताओं ने एक अहम फैसला लेते हुए गाने को यूट्यूब से हटा लिया। साथ ही उन्होंने यह घोषणा की कि गाने को नए वर्जन के साथ दोबारा तैयार किया जाएगा,जिसमें आपत्तिजनक माने जा रहे बोलों को बदला जाएगा। निर्माताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं है और वे दर्शकों की भावनाओं का सम्मान करते हैं।

हालाँकि,अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गाने का संशोधित संस्करण कब रिलीज किया जाएगा,लेकिन मेकर्स ने संकेत दिया है कि वे इसे जल्द ही नए रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच,यह मामला केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा,बल्कि संस्थागत स्तर पर भी पहुँच गया है।

इस विवाद ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस गाने को लेकर नोटिस जारी किया। आयोग ने गाने में इस्तेमाल किए गए शब्दों और उसकी प्रस्तुति पर चिंता जताते हुए संबंधित पक्षों से जवाब माँगा है। एनएचआरसी की इस कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि मामला केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके सामाजिक और नैतिक प्रभावों को भी गंभीरता से देखा जा रहा है।

कंगना रनौत के बयान ने इस पूरे विवाद को एक नई दिशा दे दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म इंडस्ट्री को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और दर्शकों के प्रति जवाबदेह बनना होगा। उनके अनुसार,केवल व्यावसायिक लाभ के लिए इस तरह के कंटेंट को बढ़ावा देना उचित नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद भारतीय सिनेमा के बदलते स्वरूप और दर्शकों की अपेक्षाओं के बीच टकराव को दर्शाता है। एक ओर जहाँ कुछ फिल्म निर्माता नए और बोल्ड कंटेंट के जरिए दर्शकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं,वहीं समाज का एक बड़ा वर्ग इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

फिलहाल, ‘सरके चुनर तेरी’ विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फिल्मी कंटेंट को लेकर समाज में संवेदनशीलता बढ़ रही है और दर्शक अब अपनी आवाज बुलंद करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म इंडस्ट्री इस तरह के विवादों से क्या सीख लेती है और अपने कंटेंट में किस तरह के बदलाव करती है।