नई दिल्ली,29 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत और लिकटेंस्टीन के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को भारत दौरे पर आए लिकटेंस्टीन के युवराज एलोइस से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने निवेश के नए अवसरों, व्यापार विस्तार और भारत तथा यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच लागू व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की। बातचीत का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देना और निवेश के माध्यम से आर्थिक संबंधों को नई दिशा देना रहा। भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच हुए समझौते के तहत 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता को भी इस चर्चा का प्रमुख आधार माना गया।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने लिकटेंस्टीन के युवराज एलोइस के साथ शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान भारत में व्यापार और निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। गोयल ने भारत में कारोबारी माहौल को निवेशकों के अनुकूल बनाने के लिए किए जा रहे सुधारों और कारोबार करने में सुगमता बढ़ाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
भारत सरकार लगातार घरेलू और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने,औद्योगिक विकास को गति देने और कारोबारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर देती रही है। ऐसे में लिकटेंस्टीन जैसे यूरोपीय देश के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश को भारत के व्यापक व्यापारिक संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गोयल ने भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते के तहत 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दोनों पक्षों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की साझा महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। इस तरह के निवेश से उद्योगों को विस्तार देने,नई तकनीकों को अपनाने और रोजगार के अवसर पैदा करने की संभावनाएँ बन सकती हैं।
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की एक प्रमुख पहल है। इस संघ में लिकटेंस्टीन, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और आइसलैंड शामिल हैं। समझौते के तहत ईएफटीए देशों ने 15 वर्षों की अवधि में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
इस निवेश से भारत में लगभग 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। हालाँकि,यह अनुमानित लक्ष्य है और वास्तविक रोजगार सृजन निवेश की मात्रा, परियोजनाओं की प्रगति तथा विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार पर निर्भर करेगा।
समझौते का उद्देश्य केवल निवेश बढ़ाना नहीं है,बल्कि व्यापारिक संबंधों को व्यापक बनाना और दोनों पक्षों के उद्योगों के लिए सहयोग के नए रास्ते खोलना भी है। विदेशी निवेश से भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने,आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने और स्थानीय उद्योगों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
लिकटेंस्टीन के साथ बातचीत इस संदर्भ में अहम है,क्योंकि वह यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ का सदस्य है। दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार के नए अवसरों की पहचान से समझौते के तहत उपलब्ध संभावनाओं का लाभ उठाने में मदद मिल सकती है।
निर्मला सीतारमण ने भी की थी लिकटेंस्टीन के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की मुलाकात से एक दिन पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी लिकटेंस्टीन के युवराज एलोइस और हेरिडिटरी प्रिंसेस सोफी के साथ बैठक की थी। मंगलवार को हुई इस बातचीत में उन्नत इंजीनियरिंग,बुनियादी ढाँचे और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
बैठक में दोनों पक्षों ने निवेश,व्यापार और आर्थिक सहयोग के अवसर बढ़ाकर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर सहमति जताई। साथ ही, उन क्षेत्रों की पहचान करने पर विचार किया गया,जहाँ तकनीकी विशेषज्ञता और पूँजी निवेश के माध्यम से साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सकता है।
उन्नत इंजीनियरिंग और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग से भारत को आधुनिक औद्योगिक तकनीकों तथा विशेषज्ञता तक पहुँच बनाने में मदद मिल सकती है। वहीं,लिकटेंस्टीन के कारोबारियों के लिए भारतीय बाजार में निवेश और विस्तार के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। बुनियादी ढाँचे से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएँ पैदा करता है।
वित्त और वाणिज्य मंत्रालयों के स्तर पर हुई इन बैठकों से स्पष्ट है कि भारत और लिकटेंस्टीन के बीच आर्थिक सहयोग को अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
भारत विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए कारोबारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने, बुनियादी ढाँचे का विस्तार करने और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रहा है। पीयूष गोयल ने अपनी बातचीत में इन प्रयासों का उल्लेख करते हुए निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया।
भारत का बड़ा घरेलू बाजार, औद्योगिक विकास की संभावनाएँ और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती आर्थिक गतिविधियां विदेशी कंपनियों के लिए अवसर उपलब्ध करा सकती हैं। वहीं, यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक साझेदारी से भारतीय कारोबारों को तकनीकी सहयोग, निवेश और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच के नए रास्ते मिल सकते हैं।
हालाँकि,निवेश संबंधी प्रतिबद्धताओं को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए नीतिगत स्पष्टता, परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन और कारोबारी संस्थानों के बीच प्रभावी समन्वय जरूरी होगा। 100 अरब डॉलर के निवेश लक्ष्य को हासिल करने के लिए भी लंबी अवधि में निरंतर प्रयास करने होंगे।
इसी महीने नई दिल्ली में आयोजित इंडिया-ईएफटीए प्रॉस्पेरिटी समिट 2026 ने भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। इस आयोजन से भारत-ईएफटीए सहयोग के साथ-साथ भारत और लिकटेंस्टीन के आर्थिक संबंधों को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई गई है।
ऐसे मंचों के माध्यम से सरकारों, निवेशकों और कारोबारी प्रतिनिधियों को व्यापारिक अवसरों पर चर्चा करने तथा संभावित साझेदारियों की पहचान करने का अवसर मिलता है। इससे समझौते के तहत निवेश की संभावनाओं को ठोस परियोजनाओं में बदलने में सहायता मिल सकती है।
भारत और लिकटेंस्टीन के बीच हालिया बैठकों को इसी व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है। इन चर्चाओं में निवेश, तकनीकी विशेषज्ञता, व्यापार विस्तार और उद्योगों के बीच सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहे।
भारत और लिकटेंस्टीन के बीच बढ़ती बातचीत से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने की संभावनाएँ सामने आई हैं। पीयूष गोयल और युवराज एलोइस की बैठक में निवेश तथा व्यापार के नए अवसरों पर जोर दिया गया,जबकि निर्मला सीतारमण की बैठक में उन्नत इंजीनियरिंग, बुनियादी ढाँचे और नवाचार जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता इस सहयोग के लिए एक व्यापक ढाँचा उपलब्ध कराता है। इसके तहत 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता और लगभग 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार अवसरों का अनुमान भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संभावनाएँ प्रस्तुत करता है।
आने वाले समय में इस साझेदारी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेश प्रतिबद्धताओं को कितनी प्रभावी ढंग से वास्तविक परियोजनाओं में बदला जाता है और दोनों पक्ष कारोबारी सहयोग को किस गति से आगे बढ़ाते हैं। फिलहाल,उच्चस्तरीय बैठकों और आर्थिक संवाद से भारत तथा लिकटेंस्टीन के बीच व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने के प्रयास जारी हैं।
