तेहरान,30 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है, जहाँ ईरान और अमेरिका के बीच समुद्री गतिविधियों को लेकर टकराव खुलकर सामने आने लगा है। ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक,ईरान ने अमेरिका की कथित ‘समुद्री नाकेबंदी’ को ‘समुद्री डकैती और गुंडागर्दी’ करार देते हुए चेतावनी दी है कि इसका जवाब ‘व्यावहारिक और अभूतपूर्व सैन्य कार्रवाई’ से दिया जा सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है,जब होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर गतिविधियाँ तेज हो गई हैं।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार,एक वरिष्ठ सुरक्षा सूत्र के हवाले से बताया गया है कि ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “धैर्य की भी एक सीमा होती है।” यदि अमेरिका अपनी ‘गैरकानूनी’ कार्रवाई जारी रखता है और होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी जहाजों को निशाना बनाता रहता है,तो ईरान को जवाबी कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इस चेतावनी ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है,जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य या राजनीतिक तनाव न केवल क्षेत्रीय देशों बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। यही कारण है कि यहाँ बढ़ती गतिविधियों पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की पैनी नजर बनी हुई है।
ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी जहाजों को जब्त कर रहा है,जो कि अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने इस मुद्दे को लेकर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को लिखे पत्र में कहा कि अमेरिका की कार्रवाई “कानूनी व्यापार में गैरकानूनी हस्तक्षेप” है और इसे ‘समुद्री डकैती’ के समान माना जाना चाहिए।
इस बीच,अमेरिका की ओर से भी इस कार्रवाई की पुष्टि की गई है। वाशिंगटन डीसी की जिला अटॉर्नी जीनीन पिरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी दी कि अमेरिकी अधिकारियों ने ‘एमटी मैजेस्टिक’ और ‘एमटी टिफनी’ नामक दो जहाजों को जब्त किया है। इन जहाजों में लगभग 3.8 मिलियन बैरल ईरानी तेल मौजूद था,जिसे अमेरिका ने अपने कब्जे में ले लिया है। अमेरिका का दावा है कि यह कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत की गई है,जबकि ईरान इसे पूरी तरह अवैध बता रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक,अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में यह सख्ती उस समय बढ़ाई जब 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान के साथ हुई बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच सकी। इस असफल वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में हाल ही में हुआ सैन्य संघर्ष भी शामिल है। 28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान और उसके कई शहरों पर हमले किए थे। इस हमले में ईरान के शीर्ष नेतृत्व और कई नागरिकों की मौत हुई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। करीब 40 दिनों तक चले इस संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को युद्धविराम लागू हुआ,लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर यह टकराव आगे और गंभीर रूप ले सकता है। ईरान पहले ही इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति मजबूत कर चुका है और वह इसे अपनी रणनीतिक ताकत के रूप में देखता है। वहीं अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक गतिविधियों के जरिए अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है।
इस घटनाक्रम का वैश्विक असर भी देखने को मिल सकता है। तेल आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उछाल आ सकता है,जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा,क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ने से अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग और व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल,दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीद कर रहा है,लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव और गहरा सकता है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाते हैं या यह विवाद किसी बड़े संघर्ष का रूप ले लेता है।
