वाशिंगटन,27 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक नया कूटनीतिक कदम उठाते हुए पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को प्रस्ताव भेजा है,जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और मौजूदा टकराव को समाप्त करने की बात कही गई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है,जब क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालाँकि,इस प्रस्ताव में यह भी संकेत दिया गया है कि परमाणु मुद्दे पर बातचीत को फिलहाल टालने की बात कही गई है,जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी अभी भी बनी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े शीर्ष अधिकारियों के साथ स्थिति कक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में ईरान के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा और आगे की रणनीति तय की जाएगी। यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है,जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
ईरान की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अमेरिका को उन प्रतिबंधों को हटाना होगा,जो ईरानी संपत्तियों पर लगाए गए हैं,खासकर उन जहाजों और कंटेनरों पर जो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हैं। ईरान का मानना है कि जब तक ये प्रतिबंध बने रहेंगे,तब तक किसी भी तरह की स्थायी शांति संभव नहीं है। वहीं,अमेरिकी पक्ष ने अभी तक इन शर्तों को स्वीकार करने के संकेत नहीं दिए हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा कि जब तक ईरान के साथ एक व्यापक और ठोस समझौता नहीं हो जाता,तब तक प्रतिबंध हटाने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने ईरान की स्थिति को कमजोर बताते हुए कहा कि उनके तेल निर्यात पर दबाव बढ़ता जा रहा है। ट्रंप के अनुसार,यदि ईरान अपने तेल को बाजार तक नहीं पहुँचा पाता है,तो उसकी आंतरिक व्यवस्था पर भी इसका गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस स्थिति में ईरान के पास बहुत सीमित समय बचा है और यदि हालात नहीं सुधरे तो उसकी ऊर्जा संरचना को स्थायी नुकसान हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण बन गई है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की हालिया इस्लामाबाद यात्रा के दौरान यह प्रस्ताव तैयार किया गया और पाकिस्तानी अधिकारियों के जरिए अमेरिकी पक्ष तक पहुँचाया गया। ईरान ने इस संदेश में अपनी सीमाएँ और प्राथमिकताएँ स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा,खासकर परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से वैश्विक स्तर पर आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ रहा है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और यहाँ से दुनिया का लगभग एक तिहाई तेल गुजरता है। ऐसे में इसका बंद होना न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर संकट पैदा कर सकता है। कई देशों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है और जल्द-से-जल्द समाधान निकालने की अपील की है।
इस बीच,ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने साफ कर दिया है कि उनका फिलहाल नाकाबंदी हटाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा है और इसके जरिए वे क्षेत्र में अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाए रखना चाहते हैं। इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि ईरान अपने रुख पर अडिग है और वह किसी भी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति बेहद जटिल होती जा रही है,जहाँ एक ओर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं,वहीं दूसरी ओर सैन्य और आर्थिक दबाव भी बढ़ता जा रहा है। ईरान का यह प्रस्ताव एक तरह से बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश है,लेकिन इसमें कई शर्तें जुड़ी हुई हैं,जिन्हें स्वीकार करना अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा। दूसरी ओर,अमेरिका भी अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए कोई भी फैसला लेने से पहले सभी पहलुओं पर गहन विचार कर रहा है।
मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गंभीर हो सकता है। यदि दोनों पक्षों के बीच कोई ठोस समझौता नहीं होता है,तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में उछाल,व्यापारिक मार्गों में बाधा और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता जैसी समस्याएँ सामने आ सकती हैं।
फिलहाल,पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि अमेरिका और ईरान इस प्रस्ताव को लेकर क्या रुख अपनाते हैं। क्या यह प्रस्ताव तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित होगा या फिर यह भी अन्य प्रयासों की तरह विफल हो जाएगा,यह आने वाला समय ही बताएगा,लेकिन इतना तय है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी यह टकराव वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
