पीट हेगसेथ (तस्वीर क्रेडिट@AnilYadavmedia1)

होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर अमेरिका सख्त,ईरान को चेतावनी—‘लड़ाई अभी शुरू हुई है’

वाशिंगटन,9 मार्च (युआईटीवी)- मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को किसी भी कीमत पर बनाए रखने के लिए तैयार है। खास तौर पर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माने जाने वाले होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि वह इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और यह भी चेतावनी दी है कि ईरान अमेरिकी सैन्य संकल्प को कम करके आंकने की भूल कर रहा है।

अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने एक प्रमुख टेलीविजन इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी सेना पहले ही ईरान की नौसैनिक क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर चुकी है और यदि जरूरत पड़ी तो आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वाशिंगटन का उद्देश्य केवल सैन्य दबाव बनाना नहीं है,बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में किसी तरह का व्यवधान न आए। उनके अनुसार,अमेरिकी सेना समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए पूरी ताकत के साथ जुटी हुई है।

अमेरिका का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है,जब ईरान के साथ बढ़ते सैन्य टकराव को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है। मध्य-पूर्व लंबे समय से वैश्विक ऊर्जा बाजार का केंद्र रहा है और यहाँ होने वाला कोई भी संघर्ष तेल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर डाल सकता है। खास तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया भर के ऊर्जा विशेषज्ञ लगातार सतर्कता बरत रहे हैं। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

इंटरव्यू के दौरान हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का असर पहले ही दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना अब पहले जैसी मजबूत स्थिति में नहीं है और अमेरिकी बल लगातार उन जहाजों तथा सैन्य संसाधनों को निशाना बना रहे हैं जो समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। उनके अनुसार,अमेरिका का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रकार का समुद्री व्यवधान पैदा ही न हो सके।

उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी सैन्य शक्ति केवल युद्धक कार्रवाई तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका बड़ा हिस्सा समुद्री सुरक्षा और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी केंद्रित है। जब उनसे पूछा गया कि जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है,तो उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना इस दिशा में व्यापक स्तर पर काम कर रही है और क्षेत्र में तैनात नौसैनिक बल पूरी तरह सक्रिय हैं।

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता की आशंका भी बढ़ गई है। तेल और गैस की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है,इसलिए किसी भी सैन्य संघर्ष का असर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों पर तुरंत पड़ सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वाशिंगटन इस संभावित आर्थिक झटके को कम करने के लिए अपने सहयोगियों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय प्राधिकरणों के साथ लगातार संपर्क में है।

हेगसेथ ने इस अभियान को एक व्यापक रणनीतिक प्रयास बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है,जिसके जरिए वह अमेरिकी सेना,क्षेत्रीय सहयोगियों और वैश्विक व्यापार के लिए खतरा पैदा कर सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह अभियान अभी अपने शुरुआती चरण में है और आने वाले समय में सैन्य दबाव और बढ़ाया जा सकता है।

इंटरव्यू के दौरान उनसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बारे में भी पूछा गया जिसमें उन्होंने ईरान को “बिना शर्त आत्मसमर्पण” करने की चेतावनी दी थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हेगसेथ ने कहा कि इस बयान का अर्थ साफ है—अमेरिका इस संघर्ष को जीतने के लिए लड़ रहा है और अंततः शर्तें वही तय करेगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी रणनीति का लक्ष्य उस स्थिति तक पहुँचना है,जब ईरान सैन्य रूप से आगे लड़ने में सक्षम न रह जाए। उनके अनुसार,एक समय ऐसा आएगा,जब ईरान के पास आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल संघर्ष की दिशा को लेकर कई संभावनाएँ खुली हुई हैं और अमेरिका अपने सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है।

इस बीच क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक जटिलताएँ भी बढ़ती दिखाई दे रही हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रूस,अमेरिका की सैन्य गतिविधियों से संबंधित खुफिया जानकारी ईरान के साथ साझा कर सकता है। यदि ऐसा होता है,तो यह संघर्ष और भी जटिल रूप ले सकता है।

इन रिपोर्टों के बारे में पूछे जाने पर हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी कमांडर स्थिति पर करीबी नजर रख रहे हैं और संभावित जोखिमों को अपनी सैन्य योजना में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे उन्नत खुफिया व्यवस्था है और उसे पता है कि क्षेत्र में कौन-कौन से देश किस तरह की गतिविधियों में शामिल हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी किसी भी संभावित सहयोग से अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को बड़ा खतरा नहीं होगा। उनके शब्दों में,अमेरिका ही वह शक्ति है,जो अपने विरोधियों पर दबाव बना रही है और उसे अपनी क्षमताओं पर पूरा भरोसा है।

हालाँकि,हेगसेथ ने सैन्य अभियान की संभावित सीमाओं या आगे की रणनीति के बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान अपनी रणनीति या सीमाओं को सार्वजनिक करना किसी भी सेना के लिए उचित नहीं होता। उनके अनुसार,अमेरिका अपने दुश्मनों को यह नहीं बताना चाहता कि वह किस हद तक जाने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि वाशिंगटन का दृष्टिकोण साफ है—अमेरिका अपने उद्देश्यों को हासिल करने के लिए जितना जरूरी होगा,उतना आगे जाएगा। हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस तरह के सैन्य अभियानों में जोखिम हमेशा मौजूद रहता है और अमेरिकी सैनिकों को हताहत भी होना पड़ सकता है।

हेगसेथ ने कहा कि यदि इस संघर्ष के दौरान अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवाते हैं,तो उन्हें उनके साहस और बलिदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। उनके अनुसार,सेना के जवान यह जानते हैं कि वे किस मिशन का हिस्सा हैं और देश की सुरक्षा के लिए हर जोखिम उठाने को तैयार रहते हैं।

मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर अक्सर यह सवाल उठता रहा है कि क्या यह अभियान इराक और अफगानिस्तान जैसे लंबे युद्धों की दिशा में बढ़ सकता है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि मौजूदा रणनीति को उन युद्धों से अलग तरीके से देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान के समाज या राजनीतिक व्यवस्था को बदलना नहीं है और न ही वह वहाँ लंबे समय तक सैन्य कब्जा बनाए रखना चाहता है। उनके अनुसार,इस अभियान का मुख्य लक्ष्य केवल सुरक्षा से जुड़ा है—अमेरिकी हितों,सहयोगियों और वैश्विक व्यापार मार्गों की रक्षा करना।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर अमेरिका का सख्त रुख केवल सैन्य दृष्टिकोण से ही नहीं,बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि इस जलमार्ग में बाधा उत्पन्न होती है,तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। कई देशों की अर्थव्यवस्थाएँ मध्य-पूर्व से आने वाले तेल और गैस पर निर्भर हैं,इसलिए यहाँ होने वाला कोई भी सैन्य संघर्ष वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता पैदा कर सकता है।

दूसरी ओर,ईरान लंबे समय से यह संकेत देता रहा है कि यदि उसके खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ाया गया,तो वह इस जलमार्ग को बाधित करने की कोशिश कर सकता है। यही कारण है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए इस क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।

मौजूदा परिस्थितियों में यह स्पष्ट हो गया है कि मध्य-पूर्व में तनाव अभी खत्म होने वाला नहीं है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव न केवल क्षेत्रीय,बल्कि वैश्विक स्तर पर भी असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस संघर्ष को कम करने में सफल होते हैं या फिर सैन्य टकराव और तेज होता है।

फिलहाल अमेरिकी प्रशासन का संदेश साफ है—वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के मुक्त प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। साथ ही,उसने यह भी संकेत दे दिया है कि यदि ईरान ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे,तो सैन्य दबाव और बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में मध्य-पूर्व की स्थिति आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।