नई दिल्ली, 17 अगस्त (युआईटीवी)- जम्मू-कश्मीर अनुच्छेद 370 हटाए जाने के मामले पर देश की सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई शुरू हो चुकी है। 5 अगस्त 2019 को केंद्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर पर लागू संविधान के अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बना दिया था। कुछ विपक्षी दलों ने इसे केंद्र का बिना किसी विचार-विमर्श का उठाया गया फैसला बताया तो वहीं सरकार इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनवाया है। तब ऐसा लग रहा था कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का हटना अंतिम सत्य है लेकिन इसे हटाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ लगी और नियमित आधार पर हो रहे सुनवाई से लगता है कि अभी और कुछ इसमें होना बाकी है।
16 अगस्त को इसकी सुनवाई में शामिल होने से पहले जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि ” मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है, इस मामले में की आज हम जिसे इन्साफ का मंदिर कहा जाता है वहाँ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार यहाँ आयी हूँ और मुझे यहाँ खड़ा रहना,इसके बारे में कुछ भी कहना बहुत मुश्किल हो रहा है। सुनवाई हो रही है अनुच्छेद370 के ऊपर जो हमारे लिए एक जज्बाती मुद्दा है।”
अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को चुनौती देने वाले बीस से अधिक याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। जिस पर पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ सुनवाई कर रही हैं। जिनमें भारत के मुख्य न्यायाधीश धनंजय वाई चंद्रचूड़,जस्टिस संजय किशन कौल, संजीव खन्ना, बीआर गवई और सूर्यकांत शामिल हैं। पाँच न्यायाधीशों की ये बेंच अब तक 2 अगस्त 2023 से छः बार सुनवाई कर चुकी है। 10 अगस्त की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश धनंजय वाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि संविधान में सहमति के कई पहलु हैं लेकिन संसद की विधायी शक्ति पर बंधन लगाने से राज्यों पर भारत की संप्रभुता का प्रभुत्व कम नहीं हुआ है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि “आज मान लेते है कि ये फैसला देश हित में है। कल बहुमत के साथ सत्ता में आया कोई अन्य राजनीतिक दाल ऐसा निर्णय लेने की कोशिश कर सकता है जो देश हित में नहीं हो। अगर ऐसा जम्मू-कश्मीर में किया सकता है, तो गुजरात और महाराष्ट्र में क्यों नहीं किया जा सकता है ? प्रमुख पार्टी होने का ये मतलब नहीं है कि उसे मनचाहा करने की खुली छूट है। ”
दुष्यंत दवे से वरिष्ठ वकील राजीव धवल ने इस मामले पर जिरह की और दैनिक भास्कर के एक रिपोर्ट के मुताबिक वकील राजीव धवल ने कहा कि “जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में परिवर्तित करते समय संविधान के अनुच्छेद 239ए का पालन नहीं किया गया। अनुच्छेद 239ए के मुताबिक कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्थानीय विधान सभाओं या मंत्री परिषद् या दोनों के निर्माण की शक्ति संसद के पास हैं।”
दवे ने बार-बार तर्क दिया कि अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के लिए केंद्र द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया “धोखाधड़ी” थी और उन्होंने संसद द्वारा शक्ति के प्रयोग को “रंगीन” करार दिया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में सर्वोच्च न्यायालय की एक संविधान पीठ। चंद्रचूड़ 2 अगस्त से संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं।
