जबलपुर,3 जनवरी (युआईटीवी)- मध्य प्रदेश के जबलपुर में शुक्रवार की रात कमनिया गेट इलाके में एक छोटा-सा विवाद अचानक बड़े हंगामे में बदल गया। ऐतिहासिक कमनिया गेट के पास स्थित एक मशहूर मिठाई की दुकान पर शुरू हुई कहासुनी देखते-देखते इतनी बढ़ गई कि जैन समुदाय के लोग भारी संख्या में इकट्ठा होकर विरोध-प्रदर्शन करने लगे। मामला तूल पकड़ता देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया।
शिकायत के अनुसार,स्थानीय व्यवसायी राजकुमार जैन शुक्रवार शाम अपने माता-पिता और कुछ रिश्तेदारों के साथ मिठाई और अन्य सामान खरीदने के लिए दुकान पर गए थे। उनका आरोप है कि दुकान पर जो सामान परोसा गया,वह पूरी तरह ठंडा और खराब क्वालिटी का था। जब उन्होंने इस बारे में दुकान के मैनेजर से बात की तो बहस शुरू हो गई। बदनामी का डर बताते हुए मैनेजर ने बात को शांत करने के बजाय स्टाफ को बुला लिया और दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ती चली गई।
राजकुमार जैन का आरोप है कि बहस के दौरान दुकान के कर्मचारियों ने न केवल उनके परिवार के साथ बदसलूकी की,बल्कि पूरे जैन समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियाँ भी कीं। पुलिस के मुताबिक,यह कथित टिप्पणी विवाद को अचानक धार्मिक और सामुदायिक स्वरूप दे बैठी। अपमान महसूस करते हुए राजकुमार और उनके रिश्तेदारों ने इसका विरोध किया और वहीं धक्का-मुक्की शुरू हो गई,जिससे दुकान का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
घटना की जानकारी कुछ ही समय में आसपास के जैन समाज के लोगों तक पहुँच गई। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर सूचना तेजी से फैलने लगी और देखते-देखते सैकड़ों लोग दुकान के बाहर जमा हो गए। जमा हुई भीड़ ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की और नारेबाजी शुरू कर दी। धीरे-धीरे भीड़ का गुस्सा बढ़ने लगा और कुछ लोग दुकान के भीतर घुसने की कोशिश करने लगे। इससे स्थिति और बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया।
हालात नियंत्रण से बाहर जाते देख कोतवाली थाना क्षेत्र सहित पाँच से अधिक थानों की पुलिस को मौके पर बुलाया गया। पुलिस अधिकारियों ने सबसे पहले लोगों को शांत करने और समझाने की कोशिश की,लेकिन तनाव लगातार बढ़ता गया। जब भीड़ हटने को तैयार नहीं हुई और हालात बिगड़ते दिखे, तब पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज कर भीड़ को पीछे धकेलने की कोशिश की।
समुदाय के सदस्यों का दावा है कि विरोध शांतिपूर्ण था और लोग केवल न्याय की माँग कर रहे थे। उनका कहना है कि अचानक हुए लाठीचार्ज से कई लोगों को चोटें आईं,जिनमें कुछ नाबालिग भी शामिल हैं। उन्होंने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक भीड़ ने कोई तोड़फोड़ या हिंसा नहीं की थी,तब तक लाठीचार्ज की जरूरत नहीं थी।
उधर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल पर माहौल लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा था और दुकान के अंदर घुसने की कोशिश से हिंसा भड़कने की आशंका थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लाठीचार्ज एक एहतियाती कदम था,ताकि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर न चली जाए और किसी को गंभीर नुकसान न पहुँचे। पुलिस के अनुसार,इस दौरान एक सब-इंस्पेक्टर को भी चोट आई है,हालाँकि वे मेडिकल रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं।
राजकुमार जैन की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मिठाई दुकान के मालिक और दो कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। आरोपियों पर अभद्र व्यवहार,धमकी और सामुदायिक भावनाएँ भड़काने संबंधी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज,प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मोबाइल वीडियो के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जैन समुदाय के नेताओं ने इस घटना को धार्मिक भावनाओं पर हमला बताते हुए कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि अगर किसी ग्राहक को सेवा को लेकर शिकायत थी,तो उसे सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए था,न कि पूरे समुदाय को अपमानित किया जाता। उन्होंने माँग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए प्रशासन स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे।
घटना के बाद प्रशासन और पुलिस दोनों सतर्क हो गए हैं। इलाके में धारा-144 जैसी पाबंदियाँ नहीं लगाई गईं,लेकिन एहतियातन अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस लगातार गश्त कर रही है ताकि किसी तरह की अफवाह फैलकर स्थिति को फिर से बिगाड़ न दे। सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है और लोगों से अपील की गई है कि वे अपुष्ट खबरें साझा न करें।
स्थानीय व्यापारी संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ऐसी घटनाएँ बाजार की शांति और भरोसे को प्रभावित करती हैं। व्यापारियों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कानून पर भरोसा रखने की अपील की। वहीं शहर के कई सामाजिक संगठनों ने कहा है कि किसी भी विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए,क्योंकि एक छोटी-सी चिंगारी बड़े तनाव में बदल सकती है।
जबलपुर पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जाँच निष्पक्ष ढंग से की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा,उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाएगा। फिलहाल,घटनास्थल के आसपास शांति है,लेकिन लोगों के मन में असंतोष और चिंता अभी भी कायम है।
यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि सार्वजनिक स्थानों पर छोटी-छोटी बहसें आखिर इतनी जल्दी हिंसक या सामुदायिक रूप क्यों ले लेती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती संवेदनशीलता,सोशल मीडिया पर तेज सूचना-विनिमय और आपसी संवाद की कमी अक्सर ऐसी स्थितियों को भड़का देती है। जब तक संयम,संवाद और संवेदनशीलता को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी,तब तक ऐसे विवाद बार-बार सामने आ सकते हैं।
फिलहाल,सभी की निगाहें पुलिस जाँच और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं। प्रशासन उम्मीद कर रहा है कि जल्द ही सच सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी,ताकि शहर में सामान्य माहौल बहाल हो सके और लोग फिर से बिना डर-भय के अपने रोजमर्रा के कामों में लग सकें।
