तनुश्री दत्ता (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

नाना पाटेकर पर तनुश्री दत्ता की टिप्पणी से भड़का विवाद,सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने की कड़ी निंदा

मुंबई,9 अक्टूबर (युआईटीवी)- अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर अभिनेत्री तनुश्री दत्ता की प्रतिक्रिया ने फिल्म जगत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। नाना पाटेकर के निधन के बाद तनुश्री ने उन्हें ‘इविल डेड’ कहकर संबोधित किया था। इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने नाराजगी जताई। अब ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने भी अभिनेत्री के बयान की आलोचना करते हुए इसे अनुचित बताया है। संगठन का कहना है कि किसी व्यक्ति के निधन के समय इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करना संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष इंजीनियर सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक बयान जारी कर तनुश्री की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जब फिल्म जगत और देश के लोग किसी कलाकार के निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हों,तब इस तरह की प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है। संगठन ने नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है,जब नाना पाटेकर के निधन की खबर के बाद उनके प्रशंसक और फिल्म जगत से जुड़े लोग उन्हें याद कर रहे हैं। वहीं,तनुश्री की टिप्पणी और उस पर संगठन की प्रतिक्रिया ने सोशल मीडिया पर बहस को और तेज कर दिया है।

ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने अपने बयान में कहा कि संगठन नाना पाटेकर के निधन पर तनुश्री दत्ता की ओर से इस्तेमाल किए गए शब्दों की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर भारतीय फिल्म जगत के जाने-माने कलाकार थे और उनके निधन से उनके प्रशंसकों तथा परिचितों को दुख पहुँचा है।

गुप्ता ने नाना पाटेकर के सार्वजनिक जीवन और सामाजिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान देश के लिए उनकी भूमिका का भी जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने किसानों के परिवारों की सहायता के लिए नाना पाटेकर से जुड़े फाउंडेशन के योगदान की बात कही।

एसोसिएशन अध्यक्ष ने कहा कि संगठन इस दुख की घड़ी में दिवंगत अभिनेता के परिवार के साथ खड़ा है और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता है। उनके अनुसार, किसी कलाकार के जीवन और योगदान को याद करने के समय अपमानजनक टिप्पणी करने के बजाय संवेदना और सम्मान व्यक्त करना अधिक उचित है।

गुप्ता ने अपने बयान में यह भी कहा कि फिल्म जगत में किसी व्यक्ति के निधन के बाद इस तरह की टिप्पणी का उदाहरण उनके सामने नहीं आया है। उन्होंने तनुश्री को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे अवसरों पर शब्दों का चयन सोच-समझकर किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में किसी कलाकार के निधन पर इस तरह की टिप्पणी दोबारा नहीं की जाएगी।

एसोसिएशन के अध्यक्ष ने तनुश्री दत्ता के बयान पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को अपनी बात रखते समय परिस्थिति और समय का ध्यान रखना चाहिए। उनके मुताबिक,किसी व्यक्ति के निधन पर शोक व्यक्त करने का अवसर होता है और उस समय इस्तेमाल किए गए शब्द लोगों की भावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

गुप्ता ने अभिनेत्री को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग से जुड़े लोग जानते हैं कि किसी दुखद घटना के समय क्या कहना चाहिए और कब मौन रहना उचित होता है। उनके अनुसार,किसी के निधन के बाद ऐसे शब्दों का प्रयोग करना मर्यादा के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी कलाकार के प्रति असहमति या व्यक्तिगत अनुभव अपनी जगह हो सकते हैं,लेकिन निधन के अवसर पर प्रतिक्रिया देते समय संवेदनशीलता बरतना जरूरी है। हालाँकि,एसोसिएशन का बयान तनुश्री की टिप्पणी पर संगठन के रुख को दर्शाता है। इससे अभिनेत्री के निजी अनुभवों या उनके पहले लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।

अपने बयान में सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने तनुश्री दत्ता की ओर से लखनऊ में एक कार्यक्रम में शामिल होने और अपने व्यस्त कार्यक्रम का जिक्र किए जाने पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अभिनेत्री अपने काम पर ध्यान दें और ऐसी प्रतिक्रिया देने से बचें,जिसकी उनसे किसी ने माँग नहीं की थी।

गुप्ता ने अपने बयान में लखनऊ और लंदन का उल्लेख करते हुए कहा कि अभिनेत्री का कार्यक्रम कहीं भी हो,यह उनका निजी मामला है। लेकिन जिस दिन फिल्म जगत एक वरिष्ठ कलाकार के निधन पर शोक मना रहा है,उस दिन अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों की चर्चा करना उचित नहीं लगता। उन्होंने इसे असंवेदनशील रवैया बताते हुए अभिनेत्री के बयान की आलोचना की।

एसोसिएशन अध्यक्ष ने अपने संदेश के अंत में नाना पाटेकर की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। संगठन की ओर से जारी इस प्रतिक्रिया में दिवंगत अभिनेता के प्रति सम्मान और परिवार के प्रति संवेदना को प्रमुखता दी गई।

तनुश्री दत्ता और नाना पाटेकर के बीच विवाद का उल्लेख वर्ष 2018 में मीटू आंदोलन के दौरान भी हुआ था। उस समय तनुश्री ने एक फिल्म की शूटिंग से जुड़े पुराने अनुभव को लेकर नाना पाटेकर पर आरोप लगाए थे। इस मामले ने भारतीय फिल्म उद्योग में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और शिकायतों को गंभीरता से लेने की जरूरत पर व्यापक चर्चा शुरू की थी। नाना पाटेकर ने उस समय आरोपों को खारिज किया था।

अब अभिनेता के निधन के बाद तनुश्री की टिप्पणी ने पुराने विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है। अभिनेत्री ने अपने बयान के बाद सफाई देते हुए दावा किया था कि मीटू आंदोलन के बाद उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपनी निजी परेशानियों और कथित घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा था कि उनके अनुभवों को समझे बिना उनकी प्रतिक्रिया पर फैसला नहीं सुनाया जाना चाहिए।

इस तरह मामले में दो अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। एक ओर सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने निधन के बाद इस्तेमाल किए गए शब्दों को अनुचित बताते हुए अभिनेत्री की आलोचना की है,तो दूसरी ओर तनुश्री अपनी प्रतिक्रिया को निजी अनुभवों से जुड़ा बता चुकी हैं। उनके दावों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अलग विषय है।

तनुश्री की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। कुछ लोगों ने उनके शब्दों को असंवेदनशील बताया,जबकि इस विवाद में उनके पुराने अनुभवों का उल्लेख भी किया जा रहा है। एसोसिएशन के बयान के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।

फिलहाल,संगठन ने अपने बयान में नाना पाटेकर के योगदान को याद करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है और तनुश्री की टिप्पणी की आलोचना की है। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सार्वजनिक हस्तियों को संवेदनशील मौकों पर अपनी बात किस तरह रखनी चाहिए और व्यक्तिगत अनुभवों पर चर्चा करते समय भाषा तथा परिस्थिति का ध्यान कैसे रखा जाना चाहिए।

नाना पाटेकर के निधन पर जारी शोक के बीच यह विवाद फिल्म जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं,एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि उसके विचार में किसी व्यक्ति के निधन के समय अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और ऐसे अवसर पर संवेदना तथा सम्मान को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।