मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (तस्वीर क्रेडिट@PMishra_Journo)

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग तेज,बीआरएस 10 अक्टूबर को हैदराबाद में करेगी प्रदर्शन

हैदराबाद/नई दिल्ली,9 अक्टूबर (युआईटीवी)- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर विपक्षी दलों का विरोध अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। अब तेलंगाना की भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने भी इस मुद्दे पर खुलकर मैदान में उतरने का ऐलान किया है। पार्टी 10 अक्टूबर को हैदराबाद में तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करेगी। बीआरएस ने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र जाँच कराने की माँग की है।

पार्टी का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने में अनियमितताएँ हुई हैं। बीआरएस के मुताबिक, इसका असर खासतौर पर उन विधानसभा क्षेत्रों में देखने को मिला है,जहाँ उसके विधायक निर्वाचित हुए हैं। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए,ताकि किसी भी पात्र मतदाता को अपने मताधिकार से वंचित न होना पड़े। इन आरोपों के आधार पर बीआरएस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटीआर ने मामले की जाँच सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराने की माँग की है। उनका कहना है कि एसआईआर के दौरान सामने आई कथित गड़बड़ियों की व्यापक और स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए,जिससे पूरी प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की माँग भी की है। बीआरएस का मानना है कि मतदाता सूची से जुड़े गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जाँच लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी है।

पार्टी ने स्पष्ट किया है कि 10 अक्टूबर को हैदराबाद में होने वाला प्रदर्शन उसके विरोध अभियान का एक अहम हिस्सा होगा। इसके बाद बीआरएस इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए दिल्ली में भी अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। हालाँकि,राजधानी में होने वाले कार्यक्रम की तारीख और अन्य विवरण बाद में घोषित किए जाएँगे। इस फैसले से संकेत मिलता है कि पार्टी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को केवल तेलंगाना तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनाना चाहती है।

इस बीच,चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में विपक्षी दलों का विरोध जारी है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए,जो मतदान के पात्र थे। उनका कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार है और इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है। हालाँकि,मतदाता सूची में नाम हटाए जाने से संबंधित आरोपों और उनकी वास्तविक स्थिति का निर्धारण जाँच तथा उपलब्ध आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।

विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए राजधानी दिल्ली में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई है। संसद मार्ग और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई है, जहाँ राजनीतिक दल और संगठन अक्सर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हैं। विपक्षी दलों के लगातार विरोध और बीआरएस के प्रस्तावित प्रदर्शन के बीच चुनाव आयोग से जुड़े विवाद ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

इस विवाद के बीच चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अन्य चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कुछ फैसलों पर लगभग 10 महीने के भीतर 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इन आपत्तियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। इन दावों ने आयोग के भीतर आपसी सहमति और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर बहस को जन्म दिया है।

मामला अब न्यायिक स्तर पर भी पहुँच गया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य सदस्यों की मंजूरी के बिना कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। याचिका में उठाए गए सवालों और लगाए गए आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचार किया जाना है। फिलहाल,इन आरोपों को अंतिम रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता और मामले की स्थिति संबंधित कानूनी कार्यवाही तथा उपलब्ध रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।

विपक्षी दलों की माँग है कि चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जाँच कराई जाए और मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। वहीं,बीआरएस ने हैदराबाद से शुरू होने वाले अपने अभियान को आगे दिल्ली तक ले जाने की घोषणा की है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित प्रदर्शन और न्यायिक कार्यवाही इस विवाद को किस दिशा में ले जाते हैं। फिलहाल,मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे,एसआईआर की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर राजनीतिक बहस तेज बनी हुई है।