नई दिल्ली,26 अगस्त (युआईटीवी)- सुप्रीम कोर्ट ने तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को बड़ा झटका देते हुए 2013 के दुष्कर्म मामले में आत्मसमर्पण से छूट देने की उनकी याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। अदालत ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उनकी दोषसिद्धि और 10 साल के कठोर कारावास की सजा के खिलाफ दायर अपील पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई तभी की जाएगी,जब वह पहले आत्मसमर्पण करेंगे। अदालत ने तेजपाल को 22 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति आलोक आराधे की एकल पीठ ने इस मामले में तरुण तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनीं। सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से अदालत से आत्मसमर्पण से छूट देने का अनुरोध किया गया था। उनके वकील ने उनकी उम्र और मुकदमे के दौरान जमानत पर रहने समेत कई परिस्थितियों का हवाला देते हुए राहत की माँग की। हालाँकि, गोवा सरकार ने इस माँग का विरोध किया और कहा कि आत्मसमर्पण के बिना अपील पर सुनवाई नहीं की जा सकती।
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को तेजपाल को आत्मसमर्पण करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। उन्होंने कहा कि तेजपाल मुकदमे के शुरुआती छह महीनों को छोड़कर लगभग पूरी अवधि के दौरान जमानत पर रहे हैं। उन्होंने यह भी अदालत के सामने रखा कि तेजपाल अब वरिष्ठ नागरिक हैं। इसी आधार पर उनकी ओर से आत्मसमर्पण से छूट की माँग की गई।
कपिल सिब्बल ने अपनी दलील के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट (क्रिमिनल अपीलेट जुरिस्डिक्शन एक्सटेंशन) एक्ट,1970 का भी हवाला दिया। उनका तर्क था कि आत्मसमर्पण से छूट देने की अर्जी पर अपील के साथ ही सुनवाई की जा सकती है। यानी उनकी ओर से अदालत से अनुरोध किया गया कि पहले आत्मसमर्पण की शर्त को लागू किए बिना उनकी अपील पर सुनवाई की जाए।
वहीं,गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस माँग का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत से कहा कि जब तक तरुण तेजपाल आत्मसमर्पण नहीं करते या अदालत की ओर से उन्हें आत्मसमर्पण से छूट नहीं दी जाती,तब तक उनकी अपील पर सुनवाई नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जिस 1970 के कानून का हवाला दिया गया है,वह इस मामले में लागू नहीं होता।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की आत्मसमर्पण से छूट की याचिका खारिज कर दी। हालाँकि,अदालत ने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए अतिरिक्त समय देने की अनुमति दी। अदालत ने पूछा कि उन्हें सरेंडर करने के लिए कितना समय चाहिए। इस पर कपिल सिब्बल ने दो सप्ताह का समय माँगा। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि 22 सितंबर तक तरुण तेजपाल सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल कर देते हैं,तो उसी दिन उनकी अपील पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई की जाएगी। इसका मतलब है कि अदालत अब उनकी अपील की वास्तविक कानूनी दलीलों और दोषसिद्धि के खिलाफ उठाए गए मुद्दों पर तभी विचार करेगी,जब आत्मसमर्पण की शर्त पूरी हो जाएगी।
यह मामला नवंबर 2013 का है और करीब एक दशक से अधिक समय से न्यायिक प्रक्रिया में है। उस समय तरुण तेजपाल की एक जूनियर महिला सहकर्मी ने गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म का आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर गोवा पुलिस ने मामला दर्ज किया था। इसके बाद नवंबर 2013 में तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था। जुलाई 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी थी।
मामले की सुनवाई आगे बढ़ने के बाद सत्र अदालत ने वर्ष 2021 में तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। हालाँकि,गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को सत्र अदालत के बरी करने के फैसले को पलट दिया और तेजपाल को दुष्कर्म तथा अन्य संबंधित अपराधों में दोषी ठहराया। इसके बाद अदालत ने उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और आत्मसमर्पण के लिए समय दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनकी अपील में दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दी गई है। हालाँकि,अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अपील पर आगे की सुनवाई के लिए पहले उन्हें आत्मसमर्पण करना होगा। इस आदेश के बाद तेजपाल के सामने फिलहाल 22 सितंबर तक आत्मसमर्पण कर सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल करने की समयसीमा है।
सुप्रीम कोर्ट का मंगलवार का आदेश इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अदालत ने फिलहाल दोषसिद्धि और सजा की वैधता पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। उसने केवल आत्मसमर्पण से संबंधित याचिका पर फैसला दिया है। अब यदि तेजपाल निर्धारित समय के भीतर आत्मसमर्पण करते हैं,तो उनकी अपील पर अदालत में विस्तृत सुनवाई का रास्ता खुलेगा।
इस मामले में आगे की कार्यवाही पर अब 22 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। उस दिन सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट उनकी अपील पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई कर सकता है। ऐसे में करीब 13 साल पुराने इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया में अब एक और महत्वपूर्ण चरण सामने आ गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार तरुण तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा और उसके बाद ही उनकी दोषसिद्धि तथा 10 साल की सजा के खिलाफ अपील पर अदालत में विस्तृत सुनवाई आगे बढ़ सकेगी।
