डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

अमेरिका में बीफ की बढ़ती कीमतों पर ट्रंप का बड़ा फैसला,कम शुल्क पर 3 लाख मीट्रिक टन लीन बीफ ट्रिमिंग्स के आयात की मंजूरी

वॉशिंगटन,27 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका में बीफ की बढ़ती कीमतों और घरेलू मवेशियों की घटती संख्या के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने लीन बीफ ट्रिमिंग्स यानी कम वसा वाले बीफ के कटे हुए हिस्सों के आयात के लिए कम शुल्क वाली व्यवस्था को अस्थायी रूप से बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत अतिरिक्त तीन लाख मीट्रिक टन बीफ ट्रिमिंग्स अमेरिका में कम, कोटा आधारित शुल्क दर पर आयात किए जा सकेंगे। सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्राउंड बीफ की घरेलू आपूर्ति बढ़ाना और अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए इसकी कीमतों को कम करना है। यह फैसला ऐसे समय में आया है,जब अमेरिका में मवेशियों का झुंड ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुँच गया है और घरेलू बीफ उत्पादन पर दबाव बना हुआ है।

नए फैसले के तहत अतिरिक्त आयात की अनुमति एक सितंबर से शुरू होने वाली 90 दिनों की अवधि के लिए होगी। तीन लाख मीट्रिक टन के इस अतिरिक्त कोटे को एक-एक लाख मीट्रिक टन के तीन हिस्सों में बाँटा गया है। इन हिस्सों का आवंटन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा। पहले चरण की शुरुआत एक सितंबर से होगी और यह 30 सितंबर तक चलेगा। दूसरा चरण एक अक्टूबर से शुरू होकर 30 अक्टूबर तक जारी रहेगा। तीसरा और अंतिम चरण 31 अक्टूबर से शुरू होगा। यह चरण या तो कोटा पूरा होने तक चलेगा या 30 नवंबर को समाप्त हो जाएगा। दोनों में से जो स्थिति पहले आएगी,उसी के आधार पर तीसरे चरण को समाप्त किया जाएगा।

व्हाइट हाउस की ओर से जारी तथ्य पत्रक के अनुसार,यह व्यवस्था सभी तरह के बीफ आयात पर लागू नहीं होगी। इसका दायरा केवल उन कम वसा वाले बीफ ट्रिमिंग्स तक सीमित रहेगा,जिन्हें अमेरिकी बीफ के साथ मिलाकर ग्राउंड बीफ तैयार किया जाता है। यानी सरकार का उद्देश्य विशेष रूप से उस बीफ की उपलब्धता बढ़ाना है,जिसका इस्तेमाल अमेरिकी बाजार में व्यापक रूप से खाए जाने वाले ग्राउंड बीफ के उत्पादन में किया जाता है। प्रशासन का मानना है कि इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और माँग तथा उपलब्धता के बीच पैदा हुए दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

इस फैसले से उन देशों के साथ अमेरिका के मौजूदा व्यापारिक समझौतों में कोई बदलाव नहीं होगा, जिनके साथ मुक्त व्यापार समझौते हैं। इसके अलावा,विशेष बीफ कोटे के तहत होने वाले मौजूदा आयात भी प्रभावित नहीं होंगे। नया तीन लाख मीट्रिक टन का अतिरिक्त कोटा अलग से उपलब्ध कराया गया है। इसका उद्देश्य तत्काल घरेलू आपूर्ति की कमी को पूरा करना है,न कि मौजूदा व्यापारिक समझौतों या पहले से निर्धारित आयात व्यवस्था में व्यापक बदलाव करना।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आदेश में कहा कि अमेरिका में घरेलू बीफ उत्पादन मौजूदा मांग को उचित कीमतों पर पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों और बड़े बाजार व्यवधानों को भी घरेलू उत्पादन में आई कमी की वजहों में शामिल किया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि मेहनतकश अमेरिकी नागरिक अपने और अपने परिवार के लिए भोजन खरीद सकें और उसका खर्च उठा सकें। प्रशासन के अनुसार,बीफ की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे अमेरिकी परिवारों के खाद्य बजट पर पड़ रहा है और इसलिए आपूर्ति बढ़ाना जरूरी हो गया है।

सरकार का अनुमान है कि अस्थायी आयात कोटे के कारण अमेरिका में बीफ की कुल उपलब्ध आपूर्ति लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। प्रशासन का मानना है कि अतिरिक्त आयात का मुख्य मुकाबला उन बूढ़ी या उत्पादन से बाहर हो चुकी गायों से होगा, जिनका इस्तेमाल बीफ बाजार में किया जाता है। सरकार का तर्क है कि इससे तैयार किए जाने वाले मवेशियों के बाजार पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। इस तरह प्रशासन घरेलू पशुपालकों के उस हिस्से पर सीधा दबाव डालने से बचना चाहता है,जो भविष्य के बीफ उत्पादन के लिए मवेशियों को तैयार करता है।

हालाँकि,ट्रंप प्रशासन ने आयात बढ़ाने के साथ कीमतों पर निगरानी की व्यवस्था भी की है। कृषि मंत्री और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को यह निगरानी करने का निर्देश दिया गया है कि विस्तारित कोटे के तहत अमेरिका पहुँचने वाला बीफ बाजार की मौजूदा कीमत की तुलना में कम से कम 25 प्रतिशत सस्ती दर पर बेचा जा रहा है या नहीं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम शुल्क के तहत आने वाले अतिरिक्त आयात का वास्तविक लाभ अमेरिकी उपभोक्ताओं तक पहुंचे। यदि आयात बढ़ने के बावजूद खुदरा बाजार में कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं आती है,तो प्रशासन इस व्यवस्था की समीक्षा कर सकता है।

ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर फैसले के बाद आयातित ग्राउंड बीफ की कीमतें कम नहीं होती हैं,तो वह इस व्यवस्था को समाप्त कर सकते हैं। उनका कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा सकता है ताकि विदेशी उत्पादकों को अनुचित लाभ न मिले। इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन इस अस्थायी कोटे को स्थायी व्यापार नीति के बजाय तत्काल आपूर्ति संकट से निपटने के उपाय के रूप में देख रहा है। सरकार की नजर इस बात पर रहेगी कि अतिरिक्त आयात का असर बीफ की कीमतों पर कितना पड़ता है और उसका लाभ उपभोक्ताओं तक किस हद तक पहुँचता है।

अमेरिका में बीफ उत्पादन में कमी के पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें मेक्सिको से जीवित मवेशियों के आयात पर लगाए गए प्रतिबंध भी शामिल हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार, इन प्रतिबंधों का उद्देश्य न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म नामक कीट के प्रसार को रोकना है। इस कीट को लेकर चिंता के कारण मेक्सिको से मवेशियों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए और दक्षिणी सीमा के कुछ बंदरगाहों पर आवागमन प्रभावित हुआ। प्रशासन का कहना है कि इस व्यवधान ने अमेरिकी पशुपालन और बीफ उत्पादन पर अतिरिक्त दबाव डाला।

मेक्सिको से जीवित मवेशियों की आवाजाही अमेरिका के बीफ उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। दक्षिणी सीमा पर बंदरगाहों के बंद रहने के कारण अमेरिका में संभावित रूप से उत्पादित होने वाला लाखों टन बीफ उत्पादन प्रभावित हुआ। हालांकि, कुछ बंदरगाहों को आवश्यक सुरक्षा उपायों के साथ चरणबद्ध तरीके से दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रशासन को उम्मीद है कि जैसे-जैसे सीमा के रास्ते सामान्य होंगे,मवेशियों की आपूर्ति में भी सुधार आएगा और घरेलू बीफ उद्योग पर दबाव कुछ कम होगा।

इसके अलावा,सूखा,जंगल की आग और पशुओं के चारे की सीमित उपलब्धता ने भी अमेरिका के प्रमुख पशुपालन क्षेत्रों को प्रभावित किया है। खराब मौसम की परिस्थितियों ने पशुपालकों की लागत बढ़ाई और कई क्षेत्रों में मवेशियों को पालना कठिन बनाया। जब चारे की उपलब्धता कम होती है और उसकी कीमत बढ़ती है,तो पशुपालकों के लिए बड़े झुंड को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप मवेशियों की संख्या घट सकती है और आगे चलकर बीफ उत्पादन पर असर पड़ता है। प्रशासन ने इन सभी परिस्थितियों को मौजूदा आपूर्ति संकट से जोड़कर देखा है।

अमेरिकी कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक,2026 में देश का घरेलू बीफ उत्पादन 2025 के स्तर की तुलना में करीब चार प्रतिशत कम हो सकता है। यह गिरावट ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब अमेरिकी बाजार में बीफ की माँग मजबूत बनी हुई है। प्रशासन के अनुसार,अमेरिका का मवेशी झुंड पिछले 75 वर्षों के सबसे निचले स्तर तक पहुँच गया था। हालाँकि,कृषि विभाग के आँकड़ों में जुलाई के दौरान कुछ सकारात्मक संकेत भी दिखाई दिए हैं। शुरुआती आँकड़ों से पता चलता है कि मवेशियों की कुल संख्या में अब धीरे-धीरे सुधार की शुरुआत हो सकती है।

ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में मवेशियों की संख्या घटने के लिए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन की नीतियों और महँगाई को भी जिम्मेदार ठहराया है। प्रशासन का कहना है कि बढ़ती महँगाई के कारण किसानों और पशुपालकों की उत्पादन लागत में इजाफा हुआ। चारे,श्रम और अन्य आवश्यक संसाधनों की लागत बढ़ने से पशुपालकों के लिए मवेशियों का बड़ा झुंड बनाए रखना मुश्किल हुआ। हालाँकि,अब प्रशासन का कहना है कि परिस्थितियों में कुछ बदलाव दिखाई दे रहे हैं।

सरकार के मुताबिक,अमेरिकी पशुपालक अब अधिक संख्या में बछियों को अपने पास रखने लगे हैं। इसका उद्देश्य भविष्य में प्रजनन क्षमता बढ़ाना और मवेशियों के झुंड को दोबारा मजबूत करना है। प्रशासन का दावा है कि 2018 के बाद पहली बार अमेरिका में कुल मवेशियों की संख्या में बढ़ोतरी शुरू हुई है। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो आने वाले वर्षों में घरेलू बीफ उत्पादन में सुधार हो सकता है,लेकिन मवेशियों की संख्या बढ़ने और बाजार में पर्याप्त मात्रा में बीफ उपलब्ध होने के बीच समय का अंतर होता है। इसलिए तत्काल माँग को पूरा करने के लिए आयात का सहारा लिया जा रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने बीफ आयात के कोटे में बदलाव किया है। इससे पहले फरवरी में अर्जेंटीना से आने वाले कम वसा वाले बीफ ट्रिमिंग्स के 2026 के कोटे में 80 हजार मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की गई थी। हालाँकि,बुधवार को जारी नए आदेश में अर्जेंटीना के लिए पहले से बढ़ाए गए उस कोटे में कोई अतिरिक्त बदलाव नहीं किया गया है। इसके बजाय तीन लाख मीट्रिक टन का नया अतिरिक्त कोटा अन्य पात्र देशों और क्षेत्रों के लिए उपलब्ध कराया गया है।

नया फैसला उरुग्वे राउंड एग्रीमेंट्स एक्ट के तहत लिया गया है। यह अमेरिकी कानून राष्ट्रपति को विशेष परिस्थितियों में कृषि उत्पादों के आयात को अस्थायी रूप से बढ़ाने का अधिकार देता है। जब प्राकृतिक आपदा,बीमारी या बड़े बाजार संकट के कारण घरेलू कृषि आपूर्ति पर्याप्त नहीं रह जाती है,तब इस कानून के तहत आयात में अस्थायी राहत दी जा सकती है। ट्रंप प्रशासन ने मौजूदा बीफ संकट को इसी तरह की असाधारण परिस्थिति के रूप में देखा है।

बीफ आयात बढ़ाने के इस फैसले का असर अमेरिकी उपभोक्ताओं के साथ-साथ घरेलू पशुपालकों और विदेशी बीफ उत्पादकों पर भी पड़ सकता है। एक ओर अतिरिक्त आयात से बाजार में आपूर्ति बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है,वहीं दूसरी ओर घरेलू उत्पादकों को विदेशी आपूर्ति से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। हालाँकि,प्रशासन का दावा है कि नया कोटा मुख्य रूप से उन उत्पादों को प्रभावित करेगा जो ग्राउंड बीफ तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं और इससे तैयार किए जा रहे मवेशियों के बाजार पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

फिलहाल ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता अमेरिकी उपभोक्ताओं को बीफ की ऊँची कीमतों से राहत दिलाना और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है। तीन लाख मीट्रिक टन का अतिरिक्त कोटा केवल 90 दिनों के लिए उपलब्ध रहेगा,इसलिए इसे दीर्घकालिक समाधान के बजाय तत्काल राहत के उपाय के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय में अमेरिका को अपनी घरेलू मवेशी संख्या और बीफ उत्पादन बढ़ाने पर निर्भर रहना होगा। यदि पशुपालकों द्वारा बछियों को अधिक संख्या में रखने का मौजूदा रुझान जारी रहता है और मवेशियों का झुंड बढ़ता है,तो भविष्य में घरेलू आपूर्ति में सुधार की संभावना बन सकती है। तब तक सरकार को आयात, कीमतों और घरेलू उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।