नई दिल्ली,22 सितंबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में महिला आरक्षण से संबंधित 128वां संवैधानिक संशोधन, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक-2023’ के नाम से जाना जाता है, मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया। इसे बुधवार को 454 वोटों और दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दिया गया।
इस मौके पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए शाह ने साफ किया, ‘जिनकी जड़ें भारत से हैं, वे महिलाओं को कमजोर नहीं मानते। महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों से ज्यादा ताकतवर हैं।’
दरअसल, विपक्षी दलों ने चिंता जताई थी कि महिलाओं को आरक्षण देने का मतलब यह है कि महिलाएं कमजोर हैं। आरोप ये भी लगे कि बिल संसद के इसी विशेष सत्र में पास हो जाएगा, लेकिन इसे 2029 से पहले लागू क्यों नहीं किया जा सका?
इन चिंताओं को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, ‘महिला आरक्षण के नाम पर सरकार ने चुनावी हंगामा खड़ा कर दिया है क्योंकि जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से पहले आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता है।’
इन आरोपों के जवाब में बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने कहा, ‘जिनकी जड़ें भारत से हैं, वे महिलाओं को कमजोर नहीं मानते। वेदों में नारी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इस बिल के साथ ही महिलाओं के अधिकारों के लिए लंबे समय से चली आ रही लड़ाई खत्म हो गई है।
यह विधेयक, जो मोदी के ‘महिला नेतृत्व विकास’ दृष्टिकोण को साकार करेगा, देश में निर्णय लेने और नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को आगे बढ़ाएगा। महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जनगणना और परिसीमन दोनों प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हैं। इसलिए, 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बनने वाली नई सरकार जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करेगी।’
यह विधेयक देश की लोकतांत्रिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। यह विडम्बना है कि देवेगौड़ा सरकार से लेकर मनमोहन सिंह सरकार तक इस विधेयक को पारित कराने की चार बार कोशिशें हुईं, लेकिन राजनीतिक कारणों से यह कभी सफल नहीं हो सकीं।
27 साल से लंबित यह बिल अब शाह के मार्गदर्शन में लोकसभा में पारित हो गया है। लोकसभा और राज्यसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण प्रदान करने वाले ‘नारी-शक्ति वंदन अधिनियम’ को लोकसभा में अधिकांश दलों का समर्थन मिला।
पिछले नौ वर्षों में, पीएम मोदी के दृष्टिकोण और शाह की नीतियों ने प्रदर्शित किया है कि महिला सशक्तिकरण कुछ पार्टियों के लिए एक राजनीतिक एजेंडा या एक राजनीतिक मुद्दा हो सकता है। मोदी के लिए महिला सशक्तिकरण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि मान्यता का विषय है।
महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध अमित शाह का मानना है कि ‘जहां महिलाएं जन प्रतिनिधि होती हैं, वहां नारी शक्ति के साथ-साथ योजनाओं का लाभ देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है।’ इस विधेयक के कानून बनने के बाद संसद में एक तिहाई सीटें महिला सांसदों के लिए आरक्षित हो जाएंगी, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
