मैड्रिड,30 अक्टूबर (युआईटीवी)- स्पेन में दो हाईस्पीड ट्रेनों की भीषण टक्कर में 68 लोगों की मौत के बाद देश में आक्रोश का माहौल है। हादसे में बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने से नाराज लोग अब सरकार और रेलवे प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। राजधानी मैड्रिड में बुधवार देर रात तक सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए,जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बोतलें और पटाखे फेंके, जबकि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज और परिवहन मंत्री ओस्कार पुएंते के इस्तीफे की माँग करते हुए रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
स्पेनिश समाचार एजेंसी ईएफई के अनुसार,मैड्रिड में एक हजार से अधिक लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए एकत्र हुए। इस प्रदर्शन में दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों की प्रमुख भूमिका रही। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि रेलवे सुरक्षा में कथित लापरवाही के कारण इतने बड़े पैमाने पर लोगों की जान गई है। उन्होंने सरकार से हादसे की जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने परिवहन मंत्री पुएंते को निशाना बनाते हुए उन्हें ‘मौत का मंत्री’ तक कह दिया।
शुरुआत में सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे प्रदर्शनकारियों का गुस्सा उस समय और बढ़ गया, जब कुछ लोगों ने पुलिस की घेराबंदी तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया,लेकिन प्रदर्शनकारियों की ओर से बोतलें और पटाखे फेंके जाने लगे। इसके बाद दंगा-रोधी पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग करते हुए प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया।
प्रदर्शन के आयोजन में दक्षिणपंथी फालान्ज पार्टी और रेवुएल्टा जैसे संगठनों की भूमिका बताई गई है। इसके अलावा, दक्षिणपंथी राजनीतिक दल वॉक्स से जुड़े संगठन सोलिदारिदाद ने भी अलग से प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों के दौरान रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय करने की माँग प्रमुखता से उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद केवल संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है,बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएँगे।
यह दर्दनाक दुर्घटना बुधवार सुबह मैड्रिड के दक्षिण में स्थित उर्डा शहर के पास हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सरकारी रेलवे कंपनी रेनफे की एक ट्रेन निजी कंपनी इर्यो की ट्रेन से टकरा गई। बताया गया कि एक ट्रेन दूसरी ट्रेन की पटरी पर खड़ी थी,तभी यह टक्कर हुई। हादसे में 68 लोगों की मौत हो गई,जबकि 180 से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों में कई लोगों को गंभीर चोटें आने की खबर है।
स्पेन में हाईस्पीड ट्रेनों का संचालन तेज रफ्तार से होता है और इनकी गति आमतौर पर 200 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रहती है। ऐसे में दो ट्रेनों के बीच टक्कर होने से दुर्घटना की भयावहता बढ़ गई। हादसे के बाद बचाव दलों ने राहत और बचाव अभियान चलाया तथा घायलों को अस्पताल पहुँचाया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत और सैकड़ों यात्रियों के प्रभावित होने के कारण यह घटना देश के हाल के वर्षों के गंभीर रेल हादसों में शामिल हो गई है।
हादसे के कारणों को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में रेलवे सुरक्षा प्रणाली में संभावित खराबी की बात सामने आई है। बताया गया कि सुरक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी के बाद नियंत्रण केंद्र की ओर से एक ट्रेन को दोबारा चलने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद परिस्थितियाँ ऐसी बनीं कि दोनों ट्रेनों की टक्कर हो गई। हालाँकि,इन शुरुआती जानकारियों के आधार पर दुर्घटना की अंतिम वजह तय नहीं की जा सकती। इसके लिए तकनीकी जांच और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल जरूरी होगी।
जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सुरक्षा प्रणाली ने समय रहते खतरे का संकेत दिया था, क्या नियंत्रण केंद्र तक सही जानकारी पहुँची थी और ट्रेन को आगे बढ़ाने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया। साथ ही,रेलवे परिचालन में इस्तेमाल होने वाले संकेतों, संचार व्यवस्था और आपातकालीन प्रक्रियाओं की भी जाँच की जा सकती है। हादसे के बाद उठे सवालों ने रेलवे प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है।
स्पेन में यह इस साल हाईस्पीड रेल से जुड़ी दूसरी जानलेवा टक्कर बताई जा रही है। इससे पहले जनवरी में अडामूज के पास एक अन्य ट्रेन दुर्घटना हुई थी,जिसमें 46 लोगों की मौत हो गई थी। उस हादसे में ट्रेन पटरी से उतर गई थी। लगातार दो गंभीर रेल दुर्घटनाओं के बाद देश में रेलवे सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मैड्रिड में हुए विरोध प्रदर्शन से स्पष्ट है कि हादसे को लेकर लोगों का गुस्सा केवल दुर्घटना तक सीमित नहीं है,बल्कि वे इसकी जिम्मेदारी तय होते देखना चाहते हैं। प्रधानमंत्री और परिवहन मंत्री के इस्तीफे की माँग ने सरकार के सामने राजनीतिक चुनौती भी खड़ी कर दी है। अब सभी की नजर दुर्घटना की जाँच पर है। जाँच से यह सामने आना अहम होगा कि हादसे के पीछे तकनीकी खराबी,मानवीय चूक या परिचालन संबंधी कोई अन्य कारण जिम्मेदार था। साथ ही,यह भी देखना होगा कि सरकार और रेलवे प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।
