वॉशिंगटन,19 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र को लेकर बड़े स्तर पर बदलाव किए जाने का दावा किया है। प्रशासन के अनुसार,संयुक्त राष्ट्र के बजट में 1 अरब डॉलर से अधिक की कटौती सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के करीब 3,000 पदों को कम करने और दुनिया भर में तैनात शांति सैनिकों की संख्या में 25 प्रतिशत से अधिक की कमी करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र को संबोधित करने वाले हैं।
अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों से बातचीत में संयुक्त राष्ट्र के बजट और उसके कामकाज में किए जा रहे बदलावों की जानकारी दी। अधिकारी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के बजट में 1 अरब डॉलर से अधिक की कटौती की गई है। प्रशासन ने इन कदमों को संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों को सीमित करने और उसके उपलब्ध संसाधनों को शांति एवं सुरक्षा जैसे मुख्य मुद्दों पर केंद्रित करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।
अधिकारी के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में लगभग 3,000 पदों में कटौती की जा रही है। इसके अलावा दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में तैनात 25 प्रतिशत से अधिक शांति सैनिकों को वापस बुलाया जा रहा है। हालाँकि,ब्रीफिंग के दौरान यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन विशेष पदों को समाप्त किया जा रहा है या किन शांति अभियानों से कितने सैनिकों को वापस भेजा जाएगा। बजट में की गई कुल बचत का विस्तृत ब्योरा भी सार्वजनिक नहीं किया गया।
अमेरिकी अधिकारी ने इन बदलावों को संयुक्त राष्ट्र के 80 वर्ष के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। हालाँकि,इस दावे के समर्थन में ब्रीफिंग के दौरान विस्तृत आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए। अधिकारी ने कहा कि प्रशासन इन प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र को अधिक सीमित और केंद्रित भूमिका में लाने की कोशिश के तौर पर देखता है। उन्होंने इसे अनौपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र को ‘डाइट’ पर रखने की नीति बताया।
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि संयुक्त राष्ट्र ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी जिम्मेदारियों का दायरा काफी बढ़ा लिया है और संगठन को अपनी प्राथमिकताओं पर दोबारा ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। अमेरिकी अधिकारी के अनुसार,संयुक्त राष्ट्र को विशेष रूप से संघर्षों को रोकने और उनका समाधान खोजने जैसे मूल उद्देश्यों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। प्रशासन का मानना है कि संसाधनों को कई अलग-अलग गतिविधियों में फैलाने के बजाय शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अधिक केंद्रित किया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र के बजट में कटौती को लेकर अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण है,क्योंकि अमेरिका लंबे समय से संगठन का सबसे बड़ा वित्तीय योगदानकर्ता रहा है। इसलिए अमेरिकी योगदान और उसके रुख में बदलाव का संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से बजट कटौती को लेकर यह भी कहा गया कि इस फैसले तक पहुँचने के लिए आम सहमति बनाने और व्यापक कूटनीतिक प्रयास करने पड़े।
यह पूरी कवायद ऐसे समय में हो रही है,जब ट्रंप अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले हैं। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति अपने भाषण में संयुक्त राष्ट्र में सुधार और संगठन की भूमिका से जुड़े मुद्दों को उठा सकते हैं। हालाँकि, ट्रंप के भाषण की अंतिम सामग्री उस समय तक सार्वजनिक नहीं की गई थी।
अमेरिकी प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र में बदलाव के अपने अभियान को एक तरह से संस्था को फिर से सक्रिय करने की कोशिश के रूप में पेश किया है। अधिकारी ने इसके लिए एक नया अनौपचारिक नारा भी इस्तेमाल किया,जिसका आशय संयुक्त राष्ट्र को फिर से प्रभावी और केंद्रित बनाने से है। प्रशासन का कहना है कि उसका उद्देश्य संगठन को कमजोर करना नहीं,बल्कि उसकी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करना और उपलब्ध संसाधनों का अधिक सीमित तथा लक्षित इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र को लेकर अमेरिकी प्रशासन ने इसके कूटनीतिक महत्व पर भी जोर दिया है। वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक,न्यूयॉर्क में एक ही समय पर दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों,प्रधानमंत्रियों,विदेश मंत्रियों, कारोबारियों और राजनयिकों का एकत्र होना ऐसा अवसर पैदा करता है,जिसे किसी दूसरे मंच पर उसी स्तर पर दोहराना मुश्किल है। इसलिए प्रशासन संयुक्त राष्ट्र महासभा को केवल औपचारिक बैठकों के बजाय व्यापक कूटनीतिक बातचीत के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखता है।
अधिकारी ने पिछले वर्ष की महासभा बैठक का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान ट्रंप ने खाड़ी देशों के साथ-साथ पाकिस्तान,तुर्की और इंडोनेशिया सहित कई मुस्लिम बहुल देशों के नेताओं को एक साथ लाने की कोशिश की थी। अमेरिकी प्रशासन ने उन चर्चाओं को बाद में हुए शर्म अल-शेख शांति समझौतों और गाजा से संबंधित ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना से जोड़ा है। प्रशासन का कहना है कि इस वर्ष भी महासभा की बैठक का इस्तेमाल मौजूदा समझौतों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ उन कूटनीतिक मुद्दों पर बातचीत के लिए किया जाएगा,जिनका समाधान अभी बाकी है।
ट्रंप सोमवार दोपहर न्यूयॉर्क पहुँचेंगे। उनके कार्यक्रम की शुरुआत उसी शाम ट्रंप टॉवर में होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों से होगी। इसके बाद मंगलवार सुबह वह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। उनके कार्यक्रम में कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें शामिल हैं। वह ब्रिटेन और जापान के प्रधानमंत्रियों के साथ मुलाकात करेंगे। इसके अलावा खाड़ी सहयोग परिषद के नेताओं के साथ एक बहुपक्षीय सत्र में भी शामिल होंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति विश्व नेताओं के लिए एक स्वागत समारोह की मेजबानी भी करेंगे। इसके अलावा वाशिंगटन लौटने से पहले वह वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में क्षेत्रीय सुरक्षा,आर्थिक संबंधों और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विभिन्न विवादों पर चर्चा होने की संभावना है।
ट्रंप के महासभा संबोधन में शांति समझौतों और विभिन्न देशों के साथ चल रही बातचीत को प्रमुखता मिलने की उम्मीद है। प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रपति उन मुद्दों को भी सामने रखेंगे,जिन्हें उनके अनुसार पिछली अमेरिकी सरकारों ने पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी। ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएँ और गाजा में शांति योजना की दिशा में हुई प्रगति भी उनके भाषण के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकती है।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े बजट और शांति अभियानों के अलावा अमेरिकी प्रशासन ने महासभा के दौरान अपने व्यापक कूटनीतिक एजेंडे की भी रूपरेखा तैयार की है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वैश्विक नियमन और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। अमेरिका इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियमों और सहयोग की दिशा में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल भी अमेरिकी कूटनीतिक एजेंडे में शामिल हैं। ये केबल वैश्विक इंटरनेट और डिजिटल संचार व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनके संरक्षण, सुरक्षा और रणनीतिक महत्व को लेकर विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जा सकती है। इसके अलावा समुद्र तल में मौजूद खनिज संसाधनों से जुड़े मुद्दे भी अमेरिकी एजेंडे का हिस्सा हैं।
प्रशासन ने अंतर्राष्ट्रीय सहायता की पारंपरिक नीति के बजाय व्यापार और आर्थिक साझेदारी पर अधिक जोर देने की अपनी प्राथमिकता भी स्पष्ट की है। अमेरिका का कहना है कि विभिन्न देशों के साथ संबंधों को केवल सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित रखने के बजाय व्यापार,निवेश और आर्थिक सहयोग के माध्यम से अधिक टिकाऊ साझेदारी विकसित की जानी चाहिए।
इस तरह संयुक्त राष्ट्र महासभा के आगामी सत्र से पहले ट्रंप प्रशासन ने बजट कटौती, कर्मचारियों की संख्या में कमी और शांति अभियानों के आकार को घटाने से जुड़े फैसलों को अपनी व्यापक विदेश नीति का हिस्सा बताया है। वहीं,महासभा के दौरान राष्ट्रपति की बैठकों और वार्ताओं के जरिए अमेरिका कई अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखने की तैयारी कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के बजट में 1 अरब डॉलर से अधिक की कटौती और हजारों पदों में कमी की घोषणा से संगठन की भविष्य की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हो सकती है। खासकर शांति अभियानों में 25 प्रतिशत से अधिक सैनिकों की कमी का असर उन क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जहां संयुक्त राष्ट्र लंबे समय से सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े अभियानों में सक्रिय है। हालाँकि,इन कटौतियों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि किन अभियानों और विभागों में कितनी कमी की जाती है।
आने वाले दिनों में ट्रंप का संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन यह स्पष्ट कर सकता है कि अमेरिकी प्रशासन संगठन के भविष्य और अपनी अंतरराष्ट्रीय भूमिका को किस तरह देखता है। बजट कटौती के साथ सुधारों पर जोर,शांति और सुरक्षा को प्राथमिकता तथा व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर आधारित कूटनीति ट्रंप प्रशासन की मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय नीति के प्रमुख हिस्से के रूप में सामने आ रही है।
