थिम्पू,19 सितंबर (युआईटीवी)- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को भूटान की अपनी आधिकारिक यात्रा पूरी की। इस दौरान भारत और भूटान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ विकास, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने आपसी साझेदारी के अलग-अलग क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की और भविष्य में सहयोग को और व्यापक बनाने पर जोर दिया।
भूटान यात्रा पूरी होने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि भूटान की सफल यात्रा पूरी हुई और दोनों देशों के बीच दोस्ती के अनोखे रिश्तों की गर्माहट ने उन्हें प्रभावित किया। यह यात्रा भूटान के विदेश और बाहरी व्यापार मंत्री ल्योंपो डी. एन. ढुंग्येल के निमंत्रण पर हुई।
यात्रा के दौरान जारी संयुक्त बयान में भारत और भूटान ने दोनों देशों के बीच विशेष और बहुआयामी साझेदारी को आगे बढ़ाने में हुई प्रगति का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने कहा कि भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत-भूटान संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों ने द्विपक्षीय विकास सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की भी सराहना की।
भारत ने भूटान के विकास लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के प्रति अपने निरंतर समर्थन को दोहराया। वहीं,भूटान ने अपनी 13वीं पंचवर्षीय योजना 2024-29 के तहत विभिन्न कार्यक्रमों और विकास परियोजनाओं के लिए भारत की ओर से दिए जा रहे सहयोग की सराहना की। दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी लंबे समय से द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है और इस यात्रा के दौरान इसे आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भी बातचीत का प्रमुख विषय रहा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके भूटानी समकक्ष ल्योंपो डी. एन. ढुंग्येल ने मार्च 2024 में दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी को लेकर तैयार किए गए संयुक्त दृष्टिकोण के क्रियान्वयन पर संतोष जताया। दोनों पक्षों ने हाल के वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति को भी रेखांकित किया।
इस दौरान 1020 मेगावाट की पुनातसांगचू-दो जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन, इसके टैरिफ प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर और 1200 मेगावाट की पुनातसांगचू-एक जलविद्युत परियोजना के बाँध निर्माण को दोबारा शुरू किए जाने का उल्लेख किया गया। भारत और भूटान के बीच जलविद्युत क्षेत्र में सहयोग लंबे समय से द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी का प्रमुख आधार रहा है। दोनों देशों ने इस क्षेत्र में आगे भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया।
संयुक्त बयान में भूटान में ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 4000 करोड़ रुपये की रियायती ऋण सुविधा से जुड़े समझौते का भी स्वागत किया गया। दोनों पक्षों ने भूटान की जलविद्युत परियोजनाओं में भारतीय कंपनियों की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच मौजूदा ऊर्जा सहयोग को और गति मिलने की संभावना है।
भारत और भूटान के बीच सहयोग केवल जलविद्युत तक सीमित नहीं है। दोनों देशों ने विकास, बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े क्षेत्रों में भी साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। भारत ने भूटान के विकास लक्ष्यों के अनुरूप आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं, भूटान ने अपनी विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में भारत के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक की गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी से जुड़ी परिकल्पना के लिए भारत सरकार के समर्थन को भी दोहराया। इस परियोजना को लेकर दोनों देशों के बीच संवाद जारी रखने पर सहमति बनी। संयुक्त बयान के अनुसार, गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी से जुड़े मुद्दों पर सहयोग विकसित करने के लिए संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से बातचीत को आगे बढ़ाया जाएगा।
गेलेफू परियोजना भूटान की भविष्य की विकास योजनाओं में महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारत ने इस परियोजना को लेकर भूटान के दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को समझते हुए सहयोग जारी रखने की बात कही है। दोनों पक्षों ने इस संबंध में आवश्यक संवाद और समन्वय को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
जयशंकर की यात्रा ऐसे समय हुई,जब भारत और भूटान अपने पारंपरिक रूप से घनिष्ठ संबंधों को विकास और आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों तक ले जाने पर काम कर रहे हैं। यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं में दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं के साथ-साथ भविष्य की परियोजनाओं और मौजूदा समझौतों के क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया गया।
भारत और भूटान के बीच विशेष संबंधों की नींव आपसी विश्वास, करीबी संपर्क और साझा हितों पर आधारित रही है। विदेश मंत्री की इस यात्रा में विकास सहयोग, ऊर्जा साझेदारी और नई परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर बनी सहमति से दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में निरंतरता दिखाई दी।
