डोनाल्ड ट्रम्प और शी जिनपिंग

चीन दौरे से पहले ट्रंप ने की शी जिनपिंग की तारीफ,बोले- दोनों देशों के लिए बहुत अच्छी चीजें होंगी,17 बड़े बिजनेसमैन के साथ बीजिंग पहुँचेंगे

वाशिंगटन,12 मई (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आगामी चीन दौरा वैश्विक राजनीति और व्यापार जगत में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। 13 से 15 मई तक होने वाले इस दौरे को अमेरिका और चीन के बीच संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसे समय में जब दुनिया कई भू-राजनीतिक तनावों से गुजर रही है,ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। इस यात्रा से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जमकर तारीफ की और उम्मीद जताई कि उनकी यह यात्रा दोनों देशों के लिए सकारात्मक साबित होगी।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर चीन यात्रा को लेकर उत्साह जाहिर किया। उन्होंने लिखा कि वह चीन की यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ट्रंप ने चीन को एक शानदार देश बताते हुए कहा कि वहाँ के नेता राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं,जिनका पूरी दुनिया सम्मान करती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस यात्रा से दोनों देशों के लिए बहुत अच्छी चीजें सामने आएँगी। ट्रंप के इस बयान को अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों में संभावित नरमी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

व्हाइट हाउस के अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप मंगलवार को स्थानीय समयानुसार वाशिंगटन से चीन के लिए रवाना होंगे। इस यात्रा की खास बात यह है कि राष्ट्रपति के साथ अमेरिका की कई बड़ी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी चीन जा रहे हैं। बताया गया है कि ट्रंप के प्रतिनिधिमंडल में कुल 17 बड़े कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव शामिल होंगे। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि यह दौरा केवल राजनीतिक नहीं,बल्कि आर्थिक और व्यापारिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है।

अमेरिका की जिन बड़ी कंपनियों के अधिकारी इस दौरे में शामिल होंगे, उनमें तकनीक, बैंकिंग, एयरोस्पेस, फाइनेंस और डिजिटल पेमेंट सेक्टर की दिग्गज कंपनियाँ शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में एप्पल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक,टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क,ब्लैकरॉक के लैरी फिंक,ब्लैकस्टोन के स्टीफन श्वार्जमैन,बोइंग की केली ऑर्टबर्ग,गोल्डमैन सैक्स के डेविड सोलोमन और माइक्रोन के संजय मेहरोत्रा जैसे बड़े नाम मौजूद रहेंगे। इसके अलावा मास्टरकार्ड,मेटा,क्वालकॉम,वीजा,सिस्को और जनरल इलेक्ट्रिक एयरोस्पेस जैसी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी यात्रा का हिस्सा होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी उद्योग जगत के इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल का चीन जाना इस बात का संकेत है कि दोनों देश व्यापारिक रिश्तों को फिर से मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध, तकनीकी प्रतिबंध और टैरिफ विवादों ने दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा किया था। ऐसे में ट्रंप का यह दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा दे सकता है।

इस बीच अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार यह भी मान रहे हैं कि ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात में केवल व्यापार ही नहीं,बल्कि वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर भी चर्चा होगी। खास तौर पर ईरान से जुड़े हालिया तनाव,ताइवान का मुद्दा और ऊर्जा सुरक्षा बातचीत के प्रमुख विषय हो सकते हैं। सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने खुद कहा कि उनकी चीन यात्रा के दौरान ताइवान और ऊर्जा सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल होंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने बातचीत के दौरान यह भी दावा किया कि उनकी सरकार अब चीन के साथ बहुत बेहतर तरीके से काम कर रही है। उन्होंने पिछली अमेरिकी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले चीन को अमेरिका का फायदा उठाने दिया गया,लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब चीन के साथ “समझदारी वाला कारोबार” कर रहा है।

उन्होंने कहा कि कई वर्षों तक अमेरिका को नुकसान उठाना पड़ा,क्योंकि पिछली सरकारें चीन के साथ सख्त रवैया नहीं अपना सकीं। ट्रंप ने कहा कि अब अमेरिका ऐसी स्थिति में नहीं है और उनकी सरकार चीन के साथ बराबरी और मजबूती के आधार पर संबंध बना रही है। ट्रंप के इस बयान को उनके चुनावी एजेंडे से भी जोड़कर देखा जा रहा है,क्योंकि वह लंबे समय से खुद को अमेरिका के आर्थिक हितों का सबसे बड़ा रक्षक बताते रहे हैं।

मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कई बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तारीफ की। उन्होंने कहा कि उनके और शी जिनपिंग के बीच अच्छे संबंध हैं। ट्रंप ने कहा कि वह शी जिनपिंग का बहुत सम्मान करते हैं और उम्मीद करते हैं कि चीनी राष्ट्रपति भी उनका सम्मान करते होंगे। ट्रंप का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका और चीन के रिश्ते हाल के वर्षों में कई बार बेहद तनावपूर्ण रहे हैं।

ट्रंप ने इस दौरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग पिछली अमेरिकी सरकार का सम्मान नहीं करते थे। ट्रंप ने बाइडेन की आलोचना करते हुए कहा कि वह ठीक से बात भी नहीं कर पाते थे। ट्रंप का यह बयान अमेरिकी राजनीति में चल रहे चुनावी माहौल को भी दर्शाता है,जहाँ वह लगातार बाइडेन प्रशासन को कमजोर नेतृत्व का प्रतीक बताने की कोशिश करते रहे हैं।

विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप का चीन दौरा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम साबित हो सकता है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बेहतर संबंध बनने से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता आने की संभावना बढ़ सकती है। वहीं तकनीकी क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग और प्रतिस्पर्धा का नया दौर शुरू हो सकता है।

हालाँकि,कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और अमेरिका के बीच गहरे मतभेद अब भी मौजूद हैं। ताइवान,दक्षिण चीन सागर,व्यापार संतुलन और तकनीकी प्रतिबंध जैसे मुद्दे दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तनाव पैदा करते रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात इन मुद्दों पर किस दिशा में आगे बढ़ती है।

फिलहाल दुनिया की नजरें इस हाई-प्रोफाइल दौरे पर टिकी हुई हैं। ट्रंप की चीन यात्रा केवल दो नेताओं की मुलाकात नहीं,बल्कि वैश्विक राजनीति,व्यापार और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से एक बड़ा घटनाक्रम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस यात्रा के परिणाम अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर गहरा असर डाल सकते हैं।