नई दिल्ली,2 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने चेतावनी दी है कि उनका देश अमेरिका की ओर से किए गए कथित हमलों और अत्याचारों का दृढ़ता से जवाब देगा। उन्होंने उन सरकारों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को भी निशाने पर लिया,जो ऐसी घटनाओं पर चुप रहती हैं या उन्हें सही ठहराने की कोशिश करती हैं। बाघेई ने कहा कि ऐसी चुप्पी को तटस्थता नहीं माना जा सकता और जो लोग आज चुप हैं,उन्हें कल इसके परिणामों से अछूता नहीं रखा जा सकेगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए अमेरिकी हमलों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि मंगलवार रात सीरिक के कुहेस्ताक इलाके में एक रिहायशी घर को निशाना बनाया गया। बाघेई के मुताबिक,जिस समय हमला हुआ,उस समय एक परिवार वहाँ शादी समारोह का आयोजन कर रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस हमले में 50 से अधिक निर्दोष पुरुष,महिलाएँ और बच्चे मारे गए या घायल हुए हैं।
बाघेई ने इस घटना को ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई की कथित घटनाओं की लंबी सूची में एक और दुखद अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि शादी समारोह के दौरान रिहायशी इलाके में हुआ यह हमला केवल एक अलग घटना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इसे मिनाब, लामेर्द, केशम और अन्य स्थानों पर हुई पिछली घटनाओं के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर की गई कार्रवाई का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि इन हमलों के लिए भ्रामक कारण पेश किए गए थे।
ईरानी प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा कि बम से भी ज्यादा खतरनाक स्थिति तब पैदा होती है, जब बमबारी को सामान्य घटना मान लिया जाए। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की कथित चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक,किसी हमले के बाद केवल चुप रहना ही चिंता की बात नहीं है,बल्कि उस चुप्पी को किसी तरह की वैधता में बदल देना उससे भी अधिक गंभीर है।
बाघेई ने कहा कि ईरान इन कथित क्रूर घटनाओं का दृढ़ता से जवाब देगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो सरकारें और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ ऐसी घटनाओं पर चुप रहती हैं या उन्हें सही ठहराने का प्रयास करती हैं,उन्हें यह समझना चाहिए कि उनकी चुप्पी किसी भी तरह की तटस्थता नहीं है। उनके अनुसार,किसी गंभीर घटना पर प्रतिक्रिया नहीं देना भी एक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जाता है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब गैरकानूनी हमलों और गंभीर अपराधों को राजनीतिक सुविधा के लिए नजरअंदाज किया जाता है,तो इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि गंभीर घटनाओं की निंदा करने के बजाय उन्हें किसी राजनीतिक उद्देश्य के तहत नजरअंदाज या सही ठहराया जाता है,तो अपराध की आलोचना करने और उसे सामान्य मान लेने के बीच की सीमा धीरे-धीरे खत्म होने लगती है।
बाघेई ने कहा कि ऐसी स्थिति में केवल हमले करने वालों की जिम्मेदारी नहीं होती,बल्कि उन्हें नजरअंदाज करने वाले या उनके कृत्यों को सही ठहराने वाले पक्षों की भूमिका पर भी सवाल उठता है। उन्होंने कहा कि अन्याय को नजरअंदाज करने से वह खत्म नहीं होता। इसके उलट,ऐसा रवैया उन लोगों का हौसला बढ़ा सकता है,जो इस तरह की कार्रवाई को अंजाम देते हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपनी चेतावनी में यह भी कहा कि जो लोग आज इन घटनाओं पर चुप हैं, वे भविष्य में इनके परिणामों से खुद को अलग नहीं कर पाएँगे। उनके मुताबिक,किसी संघर्ष के दौरान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया केवल तत्काल मानवीय चिंता तक सीमित नहीं होनी चाहिए,बल्कि गैरकानूनी हमलों और नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
सीरिक के कुहेस्ताक में कथित हमले को लेकर बाघेई के बयान से ईरान और अमेरिका के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ने के संकेत मिले हैं। ईरान लगातार अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को अपनी संप्रभुता और नागरिकों के खिलाफ आक्रामक कदम के तौर पर पेश कर रहा है। दूसरी ओर,अमेरिका की ओर से की गई सैन्य कार्रवाई के पीछे सुरक्षा और रणनीतिक कारण बताए जाते रहे हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज होता दिखाई दे रहा है।
ईरानी पक्ष का कहना है कि नागरिक इलाकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं को किसी भी सैन्य या राजनीतिक तर्क के आधार पर सामान्य नहीं माना जा सकता। विशेष रूप से शादी समारोह जैसे पारिवारिक आयोजन के दौरान रिहायशी घर पर हमले के दावे ने ईरान की प्रतिक्रिया को और तीखा बना दिया है। बाघेई ने अपने बयान में पुरुषों,महिलाओं और बच्चों के मारे जाने तथा घायल होने का दावा करते हुए इस घटना को मानवीय दृष्टि से गंभीर बताया है।
हालाँकि,ईरानी विदेश मंत्रालय की ओर से किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में हमले में हताहत हुए लोगों की वास्तविक संख्या और घटना की परिस्थितियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष स्वतंत्र जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा। फिलहाल ईरानी सरकार ने इसे अमेरिकी कार्रवाई का हिस्सा बताते हुए अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान की चेतावनी से यह स्पष्ट है कि वह अमेरिकी हमलों के खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया को केवल बयानबाजी तक सीमित रखने के संकेत नहीं दे रहा है। बाघेई ने जिस दृढ़ता के साथ जवाब देने की बात कही है,उससे आने वाले दिनों में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। साथ ही,अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और विभिन्न देशों की भूमिका पर ईरान की नाराजगी यह संकेत देती है कि तेहरान इस मुद्दे को वैश्विक मंचों पर भी उठाने की कोशिश कर सकता है।
ईरानी विदेश मंत्रालय का संदेश मूल रूप से दो स्तरों पर केंद्रित है। पहला,अमेरिका को कथित हमलों के जवाब में कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देना और दूसरा,अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बनाना कि वह ऐसी घटनाओं पर स्पष्ट रुख अपनाए। बाघेई के मुताबिक,अन्याय को नजरअंदाज करना समस्या का समाधान नहीं है। उनका कहना है कि चुप्पी और राजनीतिक सुविधा के आधार पर गंभीर घटनाओं को स्वीकार करना भविष्य में और गंभीर परिणामों का रास्ता खोल सकता है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण स्थिति में हर नई सैन्य कार्रवाई और उसके बाद आने वाली प्रतिक्रिया पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर है। ईरान की ओर से ताजा चेतावनी ने यह संकेत दिया है कि अमेरिकी हमलों के बाद दोनों देशों के बीच टकराव का स्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में नागरिकों की सुरक्षा,अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका और क्षेत्रीय स्थिरता आने वाले समय में सबसे अहम मुद्दों में शामिल रहने वाले हैं।
