कैनबरा,15 जून (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच हुए नए शांति समझौते का दुनिया भर में स्वागत किया जा रहा है। इस समझौते को न केवल पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए भी इसे राहत भरी खबर बताया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया,जर्मनी समेत कई देशों के नेताओं ने इस समझौते का समर्थन करते हुए दोनों पक्षों से संयम बनाए रखने और समझौते को पूरी गंभीरता के साथ लागू करने की अपील की है।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह क्षेत्रीय तनाव को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ जारी संयुक्त बयान में उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार विशेष रूप से इस बात से संतुष्ट है कि समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और समुद्री मार्गों पर नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं।
अल्बनीज ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया लंबे समय से पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने की वकालत करता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी संघर्ष के लंबे समय तक जारी रहने से उसका प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता,बल्कि पूरी दुनिया को उसकी कीमत चुकानी पड़ती है। उनके अनुसार,युद्ध और टकराव जितना लंबा चलता है,आर्थिक और मानवीय संकट उतना ही गहरा होता जाता है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा कि संघर्ष को और बढ़ने से रोकने के लिए सभी पक्षों को लगातार संयम बरतना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल समझौता कर लेना पर्याप्त नहीं है,बल्कि उसे ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ लागू करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह समझौता क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि ऑस्ट्रेलिया पश्चिम एशिया में शांति,सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करता रहेगा। साथ ही सरकार यह सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास करेगी कि क्षेत्रीय संघर्षों का नकारात्मक प्रभाव ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों और उनकी आर्थिक गतिविधियों पर न्यूनतम पड़े।
दूसरी ओर,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को अपनी सरकार की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि करार दिया है। उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच वह समझौता अंतिम रूप ले चुका है,जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा और अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाई गई नाकाबंदी समाप्त कर दी जाएगी।
ट्रंप ने कहा कि यह समझौता कई महीनों तक चले तनाव और संघर्ष के बाद संभव हो सका है। उनके अनुसार,इस अवधि के दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता बनी रही और दुनिया भर में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। उन्होंने कहा कि समझौते के बाद अब अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार सामान्य होने की उम्मीद है।
सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर किए गए एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरी तरह संपन्न हो चुका है और इसके लिए सभी पक्ष बधाई के पात्र हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को टोल-फ्री आधार पर फिर से खोलने की मंजूरी दे रहे हैं और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तत्काल प्रभाव से हटाया जा रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि अब दुनिया भर के जहाज बिना किसी बाधा के इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजर सकेंगे और तेल की आपूर्ति एक बार फिर सामान्य रूप से शुरू होगी। उन्होंने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर बताया।
इस बीच जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता है और इसके लिए दोनों पक्षों को बधाई दी जानी चाहिए। मर्ज के अनुसार,यह समझौता न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देगा,बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की रिकवरी में भी मददगार साबित हो सकता है।
जर्मन चांसलर ने कहा कि समझौते के तहत तय की गई शर्तों को पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी पक्ष ने समझौते की भावना का सम्मान नहीं किया,तो क्षेत्र में फिर से अस्थिरता पैदा हो सकती है। इसलिए सभी पक्षों के लिए यह आवश्यक है कि वे कूटनीतिक संवाद को जारी रखें।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का दोबारा खुलना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा सँभालता है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला अधिकांश कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर एशिया,यूरोप और अन्य बाजारों तक पहुँचता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।
पिछले कई महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई थीं। कई बार ऐसी आशंकाएँ जताई गईं कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो तेल आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। इसके चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना रहा।
अब जबकि दोनों देशों के बीच समझौता हो गया है और जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की घोषणा की गई है, दुनिया भर के देशों को उम्मीद है कि ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होगी और तेल कीमतों में स्थिरता आएगी। साथ ही यह समझौता पश्चिम एशिया में लंबे समय से चली आ रही अस्थिरता को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
हालाँकि,कई अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि समझौते की वास्तविक सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। यदि दोनों पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करते हैं और संवाद की प्रक्रिया जारी रखते हैं,तो यह समझौता क्षेत्रीय शांति और वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान इस ऐतिहासिक समझौते को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
