प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

वेनेजुएला भूकंप त्रासदी में भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ,प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन पर राष्ट्रपति रोड्रिगेज ने जताया आभार

नई दिल्ली/काराकस,25 जून (युआईटीवी)- वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के बाद उत्पन्न मानवीय संकट के बीच भारत ने सहायता और एकजुटता का संदेश देते हुए राहत कार्यों में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त की गई संवेदनाओं और मदद की पेशकश का वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने स्वागत किया है। उन्होंने भारत सरकार और भारतीय जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में मिला अंतर्राष्ट्रीय समर्थन उनके देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भूकंप से प्रभावित वेनेजुएला इस समय भारी तबाही और मानवीय संकट का सामना कर रहा है। हजारों लोग प्रभावित हुए हैं,जबकि कई इलाकों में बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुँचा है। ऐसे समय में भारत की ओर से मिली संवेदना और सहायता की पेशकश को वेनेजुएला ने मित्रता और मानवीय सहयोग का प्रतीक बताया है।

सोशल मीडिया मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट का जवाब देते हुए डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा कि वे भारत के प्रधानमंत्री द्वारा व्यक्त की गई भावनाओं का दिल से स्वागत करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विनाशकारी भूकंप से हुई तबाही को लेकर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है और राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग देने की इच्छा जताई है। रोड्रिगेज ने कहा कि इस संकट की घड़ी में भारत का समर्थन वेनेजुएला के लोगों के लिए हौसला बढ़ाने वाला है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूकंप से प्रभावित वेनेजुएला के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा था कि इस प्राकृतिक आपदा से हुई तबाही की खबर से उन्हें गहरा दुख पहुँचा है। उन्होंने भारतीय जनता की ओर से वेनेजुएला की सरकार और वहाँ के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। विशेष रूप से उन्होंने उन परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई जिन्होंने इस आपदा में अपने प्रियजनों को खो दिया है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि भारत घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता है और इस कठिन समय में पीड़ित लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी प्रकार की आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है और जरूरत पड़ने पर राहत कार्यों में सहयोग देने में पीछे नहीं हटेगा।

भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है,जब वेनेजुएला में राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और समय-समय पर जनता को ताजा जानकारी उपलब्ध करा रही हैं। उनके अनुसार अब तक इस विनाशकारी भूकंप में कम से कम 32 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हालाँकि,अधिकारियों को आशंका है कि जैसे-जैसे मलबा हटाने और खोज अभियान आगे बढ़ेगा,मृतकों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है।

विशेषज्ञों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि भूकंप की तीव्रता और उसके प्रभाव का दायरा काफी व्यापक रहा है। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने प्रारंभिक आकलन में चेतावनी दी है कि मृतकों की संख्या आने वाले दिनों में काफी बढ़ सकती है। एजेंसी के अनुमान के अनुसार इस आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या हजारों में पहुँच सकती है और सबसे खराब स्थिति में यह आँकड़ा दस हजार से लेकर एक लाख तक भी जा सकता है। हालाँकि,यह केवल प्रारंभिक मॉडलिंग पर आधारित अनुमान है और वास्तविक आँकड़े राहत एवं बचाव कार्यों के आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।

राजधानी काराकास और उसके आसपास के क्षेत्रों में तबाही के दृश्य बेहद भयावह बताए जा रहे हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के संवाददाताओं ने घटनास्थल से जो जानकारी दी है, उसके अनुसार कई इलाकों में इमारतें ढह गई हैं और सड़कें मलबे से भर गई हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में भी कई मकानों को पूरी तरह ध्वस्त होते देखा गया है। इन दृश्यों ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है।

भूकंप की वैज्ञानिक जानकारी पर नजर डालें,तो संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार पहला झटका बुधवार शाम 7.1 तीव्रता का था। इसके ठीक एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली भूकंप आया। इतने कम अंतराल में आए दो शक्तिशाली झटकों ने नुकसान को कई गुना बढ़ा दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार दो बड़े भूकंप आने से इमारतों की संरचनात्मक मजबूती तेजी से कमजोर हो जाती है, जिससे बड़े पैमाने पर ढहने की घटनाएं होती हैं।

दोनों भूकंपों का केंद्र राजधानी काराकास से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम में स्थित समुद्री तटीय शहर मोरोन के निकट था। भूकंप की गहराई मात्र 10 किलोमीटर दर्ज की गई, जिसे वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत खतरनाक माना जाता है। कम गहराई पर आने वाले भूकंपों का असर सतह पर अधिक तीव्रता से महसूस होता है और वे बड़े पैमाने पर विनाश का कारण बन सकते हैं।

वेनेजुएला के गृह, न्याय और शांति मंत्री डियोसडाडो कैबेलो ने बताया कि भूकंप का प्रभाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा,बल्कि देश के विभिन्न शहरों में नुकसान की खबरें मिली हैं। कई इलाकों में इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं,जबकि सड़क,बिजली और संचार जैसी बुनियादी सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। राहत एजेंसियाँ लगातार प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का प्रयास कर रही हैं।

सरकार ने बचाव कार्यों में सेना,पुलिस,स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। कई स्थानों पर अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां प्रभावित परिवारों को भोजन,पानी और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अस्पतालों में आपातकालीन व्यवस्था लागू की गई है,ताकि घायलों का तत्काल उपचार किया जा सके।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी वेनेजुएला को समर्थन मिलने लगा है। भारत के अलावा कई देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने सहायता की पेशकश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है,क्योंकि प्रभावित देश को राहत सामग्री,चिकित्सा सहायता और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता होती है।

भारत और वेनेजुएला के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। ऊर्जा,व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सहयोग के अलावा दोनों देशों ने मानवीय मुद्दों पर भी एक-दूसरे का समर्थन किया है। ऐसे में इस संकट के समय भारत द्वारा सहायता का आश्वासन दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

फिलहाल वेनेजुएला में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। प्रशासन का ध्यान मलबे में फँसे लोगों को सुरक्षित निकालने,घायलों का इलाज सुनिश्चित करने और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता पहुँचाने पर केंद्रित है। आने वाले दिन इस आपदा की वास्तविक भयावहता को सामने लाएँगे,लेकिन इतना स्पष्ट है कि इस कठिन घड़ी में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानवीय समर्थन वेनेजुएला के लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।