ज्वालामुखी

इंडोनेशिया में ज्वालामुखी लेवोटोबी फटा,10 लोगों की गई जान

जकार्ता,5 नवंबर (युआईटीवी)- पूर्वी इंडोनेशिया के फ्लोरेस आइलैंड पर स्थित माउंट लेवोटोबी लाकी-लाकी ज्वालामुखी के रविवार आधी रात को फटने से 10 लोगों की जान चली गई है। यह विस्फोट रविवार, 03 नवंबर को रात 11:57 बजे हुआ, जिससे लावा, ज्वालामुखीय राख और धधकती चट्टानों का एक विशाल स्तंभ आकाश में उठ गया। इसके बाद,तेज बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं ने क्षेत्र में और भी अधिक भय का माहौल पैदा कर दिया। स्थानीय अधिकारी इस विस्फोट के कारण 7 गाँवों को प्रभावित बताते हुए,आस-पास के क्षेत्रों को खाली करने की प्रक्रिया में जुटे हैं।

यह घटना पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के एक गाँव में देर रात हुई। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (बीएनपीबी) के प्रवक्ता अब्दुल मुहारी ने बताया कि 10 मृतकों की पुष्टि की गई है,जिनमें से नौ शव बरामद किए जा चुके हैं,जबकि एक शव मलबे में फँसा हुआ है।

विस्फोट के बाद, ज्वालामुखी से निकलने वाले लावे और राख ने आसपास के गाँवों में तबाही मचाई। 4 किलोमीटर (2 मील) तक के दायरे में स्थित बस्तियों में आग लगने से कई घर जल गए और वहाँ के लोग भारी नुकसान का सामना कर रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार,अब तक 10 लोग मारे गए हैं और 7 गाँवों को विस्फोट से नुकसान पहुँचा है। विस्फोट के बाद बिजली चली गई और फिर तेज बारिश शुरू हो गई,जिसके बाद आस-पास के क्षेत्रों में बिजली गिरने की घटनाएँ भी हुईं,जिससे स्थानीय लोग भयभीत हो गए।

ज्वालामुखी के विस्फोट के बाद,अधिकारियों ने उसे उच्चतम अलर्ट स्तर पर रखा है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचने के प्रयास तेज कर दिए हैं। सोमवार, 04 नवंबर को, अधिकारियों ने विस्फोट के बाद से 20 किलोमीटर (13 मील) दूर अन्य गाँवों में निवासियों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसके अलावा, अधिकारियों ने उन क्षेत्रों में बाढ़ और ठंडे लावा प्रवाह का खतरा भी व्यक्त किया है, जिससे आने वाले दिनों में और भी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

स्थानीय सरकार ने आपातकालीन स्थिति की घोषणा कर दी है,जिसके तहत केंद्र सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए सहायता की योजना बनाई है। इस आपातकाल के तहत लगभग 10,000 प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान की जाएगी। मौमेरे शहर के निकटतम हवाई अड्डे को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है,ताकि राहत कार्यों में कोई रुकावट न आए।

इंडोनेशिया, जो “पैसिफिक रिंग ऑफ फायर” पर स्थित है,एक ऐसा क्षेत्र है,जहाँ भूगर्भीय गतिविधियाँ अधिक होती हैं। इस क्षेत्र में कई सक्रिय ज्वालामुखी हैं और यहाँ भूकंपीय घटनाएँ भी लगातार होती रहती हैं। माउंट लेवोटोबी लाकी-लाकी का विस्फोट कई ज्वालामुखीय घटनाओं में से एक है। इससे पहले,मई 2024 में हलमाहेरा द्वीप पर माउंट इबू और उत्तरी सुलावेसी के रुआंग ज्वालामुखी में विस्फोट हो चुके थे,जिनसे हजारों लोग प्रभावित हुए थे।

इंडोनेशिया में यह ज्वालामुखी विस्फोट बड़े पैमाने पर विनाश का कारण बना है,जिसमें रिहायशी इलाकों में आग भी लग गई है। स्थानीय सरकार ने 4 नवंबर से 31 दिसंबर 2024 तक आपातकाल की स्थिति घोषित की है। आपातकालीन राहत के प्रयासों में मदद के लिए बीएनपीबी के प्रमुख और कर्मचारी प्रभावित क्षेत्र में पहुँचे हैं।

माउंट लेवोटोबी, जो इंडोनेशिया के 127 सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है, एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं के प्रति क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर करता है। राहत कार्य जारी हैं और प्रभावित लोगों के लिए जल्द ही और सहायता की उम्मीद की जा रही है।

यह विस्फोट एक बार फिर यह दर्शाता है कि इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति और ज्वालामुखीय गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए,इन क्षेत्रों में निवासियों के लिए सतर्कता और आपातकालीन तैयारी कितनी महत्वपूर्ण है।