नई दिल्ली,15 अप्रैल (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अहम टेलीफोनिक बातचीत हुई है। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की,बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस संवाद की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए साझा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में बताया कि उन्होंने अपने मित्र राष्ट्रपति ट्रंप के साथ विभिन्न क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग में हुई प्रगति का आकलन किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है,जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक समुदाय इसकी दिशा को लेकर चिंतित है।
इस चर्चा का सबसे अहम पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति रहा। दोनों नेताओं ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला और सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है,जहाँ से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस का परिवहन होता है। ऐसे में यहाँ किसी भी तरह का अवरोध वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
गौरतलब है कि अस्थायी संघर्ष विराम के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच यह पहली बातचीत है। इससे पहले भी 24 मार्च को दोनों नेताओं के बीच फोन पर चर्चा हुई थी,जिसमें उन्होंने मध्य पूर्व के हालात पर चिंता व्यक्त की थी। उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया था कि भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहता है और सभी पक्षों को तनाव कम करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
हाल के घटनाक्रमों पर नजर डालें तो ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच सकी। इस असफल वार्ता के बाद तनाव और बढ़ गया है। इसी के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी की बात कही थी,जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता को और गहरा कर दिया है।
ईरान की ओर से भी इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना दावा जताया गया है,जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते टकराव ने वैश्विक शक्तियों को सक्रिय कर दिया है। यूरोप के प्रमुख देश फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए जल्द ही एक ऑनलाइन बैठक आयोजित करने की घोषणा की है।
यह वर्चुअल बैठक इस महीने की शुरुआत में यूनाइटेड किंगडम की अगुवाई में हुई एक बड़ी बैठक का अगला चरण मानी जा रही है,जिसमें 40 से अधिक देशों के मंत्री शामिल हुए थे। उस बैठक में भी होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और वहाँ फँसे हजारों जहाजों तथा उनके चालक दल की सुरक्षा पर चर्चा की गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। इससे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए इस मार्ग की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत ने हमेशा से पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता का समर्थन किया है। प्रधानमंत्री मोदी की ट्रंप के साथ हुई बातचीत इसी नीति को दर्शाती है,जिसमें भारत ने एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभाने का प्रयास किया है। भारत का यह रुख न केवल उसके राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है,बल्कि वैश्विक शांति और सहयोग को भी बढ़ावा देता है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई यह बातचीत मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत और अमेरिका न केवल अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए भी मिलकर काम करना चाहते हैं। आने वाले दिनों में इस संवाद के परिणाम और प्रभाव वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकते हैं।
