कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@GunstPhilip)

11-12 दिसंबर को कनाडा जाएँगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,मार्क कार्नी से व्यापार,ऊर्जा और सुरक्षा पर होगी अहम बातचीत

नई द‍िल्‍ली,16 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत और कनाडा के संबंधों को नई दिशा देने के प्रयासों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष 11 और 12 दिसंबर को कनाडा की यात्रा करेंगे। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस दौरे की जानकारी देते हुए कहा कि उनका देश दिसंबर में भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए उत्सुक है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा एवं सुरक्षा और लोगों के आपसी संपर्क जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर रहने की उम्मीद है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है,जब दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक गति को मजबूत करने और आर्थिक साझेदारी का विस्तार करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कैलगरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारतीय प्रधानमंत्री का कार्यक्रम टोरंटो और ओटावा में होगा। कार्नी ने कहा कि कनाडा दिसंबर में प्रधानमंत्री मोदी के आगमन का इंतजार कर रहा है। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को आगे ले जाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

कनाडा में भारतीय दूतावास ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से इस यात्रा की जानकारी साझा की। दूतावास के मुताबिक,हाल ही में दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच हुई बातचीत में भारत-कनाडा संबंधों में बन रही सकारात्मक गति को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी। दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में ठोस परिणाम हासिल करने के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने पिछले एक वर्ष में भारत और कनाडा के बीच विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते संपर्क का स्वागत किया। बातचीत में वित्त,रक्षा एवं सुरक्षा,लोगों के बीच संबंध और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषय प्रमुख रहे।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने माना कि द्विपक्षीय संबंधों में बनी नई गति का लाभ उठाने के लिए निरंतर संवाद और सहयोग आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों देशों के बीच साझेदारी को इस तरह आगे बढ़ाया जाए,जिससे नागरिकों,कारोबारियों और अन्य संबंधित क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

प्रधानमंत्री मोदी की दिसंबर में होने वाली यात्रा को इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। इस दौरान दोनों देशों के नेतृत्व को आपसी प्राथमिकताओं पर चर्चा करने और सहयोग के नए अवसर तलाशने का मौका मिलेगा। हालाँकि,यात्रा के दौरान किन समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे या किन नई पहलों की घोषणा की जाएगी,इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

भारत और कनाडा के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करना इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण विषय हो सकता है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी सीईपीए पर चल रही बातचीत को जल्द से जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। दोनों पक्षों की कोशिश है कि वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य की दिशा में ठोस प्रगति की जाए। समझौते को अंतिम रूप दिए जाने से बाजार तक पहुँच, निवेश और विभिन्न क्षेत्रों में कारोबारी सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंधों में ऊर्जा, तकनीक, वित्तीय सेवाओं और कृषि जैसे क्षेत्रों की अहम भूमिका है। आर्थिक साझेदारी को विस्तार देने के लिए दोनों देशों को व्यापार से जुड़ी बाधाओं, निवेश संबंधी जरूरतों और बाजार में उपलब्ध अवसरों पर मिलकर काम करना होगा। दिसंबर में होने वाली उच्चस्तरीय बातचीत इन विषयों पर आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

फोन पर बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक अस्थिरता के प्रभावों पर भी विचार-विमर्श किया। बदलते वैश्विक हालात के बीच ऊर्जा और कृषि क्षेत्रों में भरोसेमंद साझेदारों की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।

ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों और विश्वसनीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ संबंध मजबूत करना जरूरी है। दूसरी ओर,कनाडा के पास ऊर्जा संसाधनों और कृषि उत्पादों से जुड़ी व्यापक क्षमताएँ हैं। ऐसे में दोनों देश आपसी जरूरतों और आर्थिक हितों के अनुरूप सहयोग के अवसर तलाश सकते हैं।

प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी द्विपक्षीय साझेदारी के महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभरे हैं। दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग से अनुसंधान,नवाचार, निवेश और कुशल पेशेवरों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिल सकता है।

भारत और कनाडा के बीच सुरक्षा सहयोग को लेकर भी हाल के दिनों में संपर्क बढ़ा है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने पिछले सप्ताह भारत में हुई द्विपक्षीय सुरक्षा वार्ता का स्वागत किया। यह बातचीत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर पर जारी सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन संबंधी संवाद का हिस्सा थी।

दोनों देशों के बीच सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नियमित संपर्क बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिसंबर में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पहले भी दोनों नेता आपसी संवाद जारी रखने पर सहमत हुए हैं। इससे संकेत मिलता है कि आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन से जुड़े विषय भी द्विपक्षीय एजेंडे में प्रमुख स्थान रखेंगे।

दोनों नेताओं की बातचीत में रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का मुद्दा भी शामिल रहा। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने यूक्रेन पर रूस के युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की व्यापक भू-राजनीतिक परिस्थितियों से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में भारत और कनाडा के बीच वैश्विक चुनौतियों पर संवाद बनाए रखना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 11-12 दिसंबर की प्रस्तावित कनाडा यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगी। व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने,ऊर्जा और प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने तथा सुरक्षा संवाद को निरंतर बनाए रखने पर दोनों देशों का जोर रहेगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस यात्रा के दौरान बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और भारत-कनाडा साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए कौन से ठोस कदम सामने आते हैं।