यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड (तस्वीर क्रेडिट@FMNewsLive)

यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड: 9 यात्रियों की मौत,एफआईआर में चालक-परिचालक पर गंभीर लापरवाही के आरोप

ग्रेटर नोएडा,24 सितंबर (युआईटीवी)- यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात हुए भीषण बस अग्निकांड ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में अब तक नौ यात्रियों की मौत हो चुकी है,जबकि कई यात्री गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आग इतनी तेजी से फैली कि यात्रियों को सँभलने तक का मौका नहीं मिला और देखते ही देखते बस का बड़ा हिस्सा आग की चपेट में आ गया। हादसे के बाद पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। प्राथमिकी में बस चालक और परिचालक पर यात्रियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस को दी गई शिकायत में एक यात्री ने हादसे से पहले बस के भीतर जलने जैसी तेज गंध आने का दावा किया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक,यात्रियों ने समय रहते चालक और परिचालक को बस में कुछ जलने जैसी तेज बदबू आने की जानकारी दी थी। इसके बावजूद कथित तौर पर बस को रोककर उसकी जाँच नहीं की गई। यात्री का आरोप है कि यदि उस समय बस रोककर स्थिति की जाँच कर ली जाती तो शायद आग लगने की घटना को टाला जा सकता था। हालाँकि,शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस जाँच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक,हमीरपुर जिले के राठ थाना क्षेत्र के मोहाल खुशीपुरा निवासी सुनील कुमार पुत्र बदीप्रसाद दिल्ली के कश्मीरी गेट से राज कल्पना ट्रेवल्स की बस में सवार हुए थे। बताया गया है कि बस में करीब 30 से 35 यात्री मौजूद थे। बस दिल्ली से आगरा की ओर जा रही थी। बुधवार देर रात जब बस नोएडा से आगरा जाने वाले मार्ग पर यमुना एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 33 के आसपास पहुँची,तभी यात्रियों को बस के चालक केबिन की दिशा से जलने जैसी तेज गंध महसूस हुई।

शिकायतकर्ता के अनुसार,बस में मौजूद कुछ यात्रियों ने तत्काल चालक और परिचालक को इसकी जानकारी दी। यात्रियों ने उन्हें बताया कि बस के अंदर किसी चीज के जलने जैसी गंध आ रही है और स्थिति सामान्य नहीं लग रही है। आरोप है कि चालक ने यात्रियों की चिंता को गंभीरता से नहीं लिया। शिकायत में कहा गया है कि चालक ने कथित तौर पर यात्रियों से कहा कि बस में इस तरह की गंध आती रहती है। इसके बाद भी बस को तत्काल रोककर यह पता लगाने की कोशिश नहीं की गई कि गंध कहाँ से आ रही है और उसका कारण क्या है।

यात्रियों की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार,कुछ समय बाद स्थिति अचानक गंभीर हो गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चालक और परिचालक अपने केबिन में बीड़ी-सिगरेट पी रहे थे। इसके कुछ ही देर बाद चालक की सीट के आसपास से अचानक आग की तेज लपटें निकलने लगीं। आग देखते ही बस में सवार यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। यात्रियों ने शोर मचाकर बस रोकने और बाहर निकलने की कोशिश की। आग तेजी से फैलने के कारण कुछ ही समय में बस के भीतर धुआँ भर गया और यात्रियों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो गया।

प्राथमिकी के लिए दी गई शिकायत में चालक और परिचालक के व्यवहार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि जब यात्रियों ने आग लगने की आशंका जताते हुए बस रोकने के लिए कहा,तब उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। आरोप है कि चालक और परिचालक यात्रियों की परेशानी के बीच आपस में हँस रहे थे और कुछ यात्रियों को कथित तौर पर धमकाया भी गया। शिकायत में चालक के हवाले से यह भी आरोप लगाया गया है कि उसने कहा, “मरना है,तो मरो,बस नहीं रोकेंगे।” हालाँकि,यह आरोप फिलहाल शिकायत में दर्ज दावे तक सीमित हैं। पुलिस जाँच के दौरान इन आरोपों की सत्यता और घटनाक्रम में चालक तथा परिचालक की वास्तविक भूमिका की पुष्टि की जाएगी।

आग लगने के बाद बस के भीतर कुछ ही पलों में हालात बेकाबू हो गए। धुएँ और आग की लपटों के बीच यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कई यात्रियों ने अपनी जान बचाने के लिए बस से बाहर निकलने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता सुनील कुमार ने बताया कि उन्होंने अन्य यात्रियों के साथ किसी तरह बस से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। हालाँकि, सभी यात्रियों को समय रहते बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। आग और धुएँ के कारण कई यात्री बस के अंदर फँस गए और गंभीर रूप से झुलस गए।

घटना की जानकारी मिलने के बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुँचा। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को उपचार के लिए कैलाश अस्पताल,जेवर ले जाया गया। हादसे में कई यात्रियों के गंभीर रूप से घायल होने की बात सामने आई है। घायलों में कुछ की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आग लगने के बाद यात्रियों को बस से बाहर निकलने के लिए बेहद कम समय मिला।

हादसे के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि बस में आग आखिर किस वजह से लगी। इसके साथ ही बस की तकनीकी स्थिति,चालक और परिचालक की भूमिका,आग लगने से पहले यात्रियों द्वारा दी गई जानकारी और उसके बाद उठाए गए कदमों की भी जाँच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आग की शुरुआत बस के किस हिस्से से हुई और उसे फैलने में कितना समय लगा।

जाँच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि क्या बस में आग से बचाव के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरण मौजूद थे और यदि मौजूद थे तो उनका इस्तेमाल किया गया या नहीं। इसके अलावा पुलिस बस की फिटनेस, रखरखाव और तकनीकी स्थिति से जुड़े दस्तावेजों की भी जाँच कर सकती है। यह भी देखा जाएगा कि चालक के पास वाहन चलाने के लिए आवश्यक वैध दस्तावेज थे या नहीं और यात्रा के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

यात्री की शिकायत ने इस हादसे से जुड़े कई गंभीर सवाल सामने रखे हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि अगर आग लगने से पहले बस के भीतर जलने जैसी गंध महसूस हो रही थी,तो उस समय वाहन को रोककर जाँच क्यों नहीं की गई। यात्रियों ने कथित तौर पर चालक और परिचालक को इसकी जानकारी दी थी,इसके बावजूद बस आगे बढ़ती रही। यदि जाँच में यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है। हालाँकि,अंतिम निष्कर्ष जाँच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

इस घटना ने लंबी दूरी की बस सेवाओं में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान खींचा है। रात के समय चलने वाली बसों में किसी भी तकनीकी खराबी,धुआँ या जलने की गंध जैसी स्थिति को नजरअंदाज करना यात्रियों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसी परिस्थितियों में वाहन को सुरक्षित स्थान पर रोकना और खराबी की जाँच करना जरूरी होता है। यात्रियों को भी किसी असामान्य स्थिति की जानकारी मिलने पर चालक या परिचालक को तत्काल सूचित करने के साथ आपातकालीन निकास और सुरक्षा उपकरणों की जानकारी रखना महत्वपूर्ण होता है।

फिलहाल पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है। हादसे में नौ यात्रियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है,जबकि घायल यात्रियों का उपचार जारी है। पुलिस आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के साथ यह भी जाँच रही है कि क्या हादसे से पहले किसी तरह की चेतावनी या असामान्य स्थिति के संकेत मिले थे। यात्रियों की ओर से लगाए गए आरोपों,बस की तकनीकी जाँच और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यमुना एक्सप्रेसवे जैसे व्यस्त मार्ग पर हुई इस घटना ने एक बार फिर यात्री वाहनों में सुरक्षा व्यवस्था और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। फिलहाल हादसे के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर अंतिम तस्वीर पुलिस जाँच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घटना में जान गंवाने वाले यात्रियों के परिजनों को जवाब मिले और घायल यात्रियों को उचित उपचार मिल सके। पुलिस की जाँच अब इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।