मुंबई,19 सितंबर (युआईटीवी)- आईआईटी बॉम्बे के पवई परिसर में एक छात्र की मौत के बाद छात्रों के बीच आक्रोश और चिंता का माहौल है। ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद बड़ी संख्या में छात्र परिसर में एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने संस्थान के प्रशासन से घटना से जुड़ी परिस्थितियों पर अधिक पारदर्शिता बरतने और पूरे मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग की। बताया जा रहा है कि पिछले छह महीनों में पवई परिसर में छात्र की मौत से जुड़ी यह तीसरी आत्महत्या की घटना है।
संस्थान के अनुसार,साहिल वाकोडे को परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पाया गया था। आईआईटी बॉम्बे ने बताया कि छात्र ने परीक्षा के दौरान एक सवाल का जवाब खोजने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया था। हालाँकि,संस्थान का कहना है कि इस मामले को लेकर छात्र के खिलाफ तत्काल कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। परीक्षा प्रशिक्षक और संबंधित विभाग के प्रमुख ने छात्र से इस घटना को लेकर बातचीत की थी।
आईआईटी बॉम्बे के मुताबिक,बातचीत के दौरान छात्र को स्थिति समझाई गई और यह भरोसा दिलाया गया कि परीक्षा में हुई इस घटना का उसके करियर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। बातचीत समाप्त होने के बाद साहिल अपने छात्रावास के कमरे में लौट गया। बाद में उसी शाम वह अपने कमरे में मृत पाया गया। छात्र की मौत की सूचना सामने आने के बाद संस्थान में शोक और चिंता का माहौल बन गया।
आईआईटी बॉम्बे ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में छात्र के दोस्तों, सहपाठियों, शिक्षकों और अन्य प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। संस्थान की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित अधिकारी छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। इस जाँच के जरिए घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने का प्रयास किया जा रहा है।
छात्र की मौत के बाद परिसर में छात्रों का एक समूह विरोध के लिए जुट गया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। छात्रों का कहना था कि उन्हें मामले में स्पष्ट जानकारी और प्रशासन की ओर से जवाब चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने संस्थान से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था और छात्र सहायता प्रणाली को मजबूत करने की भी माँग की।
विरोध कर रहे कुछ छात्रों ने दावा किया कि परीक्षा में मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जुड़े मामले को लेकर साहिल को एक वर्ष के निलंबन की आशंका या कथित तौर पर धमकी का सामना करना पड़ा था। छात्रों के अनुसार,इस तरह की कार्रवाई की स्थिति में छात्र को छात्रावास छोड़कर परिसर से बाहर रहने की आवश्यकता पड़ सकती थी। प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना था कि लंबे निलंबन की स्थिति में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम पूरा करने में निर्धारित समय से अधिक समय लग सकता था।
हालाँकि,इन दावों और छात्र की मौत के बीच सीधे संबंध की पुष्टि जाँच पूरी होने से पहले नहीं की गई है। संस्थान ने अपने बयान में कहा है कि छात्र के खिलाफ घटना के बाद कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी और उसे उसके करियर पर नकारात्मक असर नहीं पड़ने का भरोसा दिलाया गया था। ऐसे में छात्रों की ओर से लगाए गए आरोपों और संस्थान के आधिकारिक पक्ष के बीच मौजूद अंतर को जाँच के जरिए स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल घटना को लेकर विरोध दर्ज कराना नहीं है,बल्कि प्रशासन से जवाबदेही और पारदर्शिता की माँग करना भी है। एक छात्र ने कहा कि परिसर में छात्र की मौत हुई है और इसी वजह से विद्यार्थी एकत्र हुए हैं,ताकि प्रशासन से घटना के संबंध में जवाब माँगा जा सके। छात्रों का कहना है कि संस्थान में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मानसिक और शैक्षणिक दबाव से निपटने के लिए पर्याप्त सहायता और स्पष्ट प्रक्रियाएँ उपलब्ध होनी चाहिए।
छात्रों ने यह भी दावा किया कि इस वर्ष परिसर में छात्रों से जुड़ी कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। हालाँकि,ऐसी घटनाओं की पूरी संख्या और उनके कारणों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इस वजह से छात्रों ने प्रशासन से अधिक स्पष्ट जानकारी साझा करने की माँग की है,ताकि अफवाहों और अधूरी जानकारी की स्थिति पैदा न हो।
विरोध प्रदर्शन के दौरान परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दत्तात्रेय नलावडे ने बताया कि छात्र की मौत की जाँच की जा रही है। उन्होंने कहा कि घटना के बाद छात्र अपनी चिंताओं और माँगों को सामने रखने के लिए एकत्र हुए थे। वहीं,संस्थान प्रशासन ने स्थिति को शांत करने और छात्रों से बातचीत के जरिए उनकी चिंताओं को समझने का प्रयास किया।
छात्र प्रतिनिधियों और संस्थान प्रशासन के बीच बातचीत भी हुई। इस दौरान छात्रों ने घटना की जाँच,प्रशासनिक पारदर्शिता और अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं से जुड़े सवाल उठाए। छात्रों की ओर से यह मांग भी सामने आई कि किसी भी अनुशासनात्मक मामले में विद्यार्थियों को संभावित कार्रवाई और उसके प्रभाव के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही,ऐसे मामलों में छात्रों को अपनी बात रखने का उचित अवसर मिलने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया।
यह घटना उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक अनुशासन और छात्रों पर पड़ने वाले दबाव को लेकर भी चर्चा का विषय बन गई है। परीक्षा में मोबाइल फोन या कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर संस्थानों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हो रही हैं। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि परीक्षा के दौरान डिजिटल साधनों के दुरुपयोग को रोकने के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए अनुशासनात्मक प्रक्रियाएं किस तरह स्पष्ट,संतुलित और पारदर्शी रखी जाएँ।
वहीं,छात्र की मौत के बाद यह पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है कि गंभीर तनाव या संकट से गुजर रहे विद्यार्थियों तक सहायता किस तरह समय पर पहुँचाई जाए। प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगिता, परीक्षा संबंधी तनाव और भविष्य को लेकर चिंताएँ विद्यार्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। ऐसे में संस्थानों में परामर्श,छात्र सहायता और शिकायत निवारण की व्यवस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
आईआईटी बॉम्बे ने कहा है कि वह घटना से प्रभावित छात्रों और अन्य सदस्यों को सहायता उपलब्ध करा रहा है। फिलहाल छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच जारी है। जाँच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना से पहले क्या-क्या परिस्थितियाँ बनी थीं और विभिन्न दावों में कितनी सच्चाई है।
साहिल वाकोडे की मौत के बाद पवई परिसर में छात्रों की ओर से उठाए गए सवालों ने संस्थान के भीतर पारदर्शिता,अनुशासनात्मक प्रक्रिया और छात्र सहायता व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर प्रशासन ने कहा है कि छात्र के खिलाफ तत्काल कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी और उसे उसके करियर को लेकर आश्वस्त किया गया था,वहीं प्रदर्शनकारी छात्र परीक्षा संबंधी कार्रवाई को लेकर अलग दावे कर रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष जाँच और तथ्यों की स्पष्ट जानकारी इस पूरे मामले को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल पुलिस और संस्थान से जुड़े अधिकारी मामले की परिस्थितियों की जाँच कर रहे हैं। छात्र समुदाय की माँग है कि जाँच के दौरान पूरी पारदर्शिता बरती जाए और सामने आए तथ्यों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएँ। इस घटना ने एक बार फिर उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा,सहायता और तनाव से निपटने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जरूरत को सामने ला दिया है।
