रिलायंस ग्रुप (आरएएजीए कंपनियों) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल अंबानी (तस्वीर क्रेडिट@kkjourno)

एलआईसी निवेश मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई,अनिल अंबानी समेत कई लोगों पर एफआईआर

नई दिल्ली,19 सितंबर (युआईटीवी)- भारतीय जीवन बीमा निगम के साथ कथित निवेश धोखाधड़ी के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिलायंस कैपिटल लिमिटेड और कंपनी से जुड़े कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। यह मामला एलआईसी की ओर से दी गई लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। प्राथमिकी में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, मुंबई, कंपनी के पूर्व चेयरमैन अनिल डी. अंबानी, रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह के समूह प्रबंध निदेशक सतीश सेठ के अलावा अज्ञात सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।

केंद्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक,एलआईसी ने आरोप लगाया है कि अप्रैल 2012 से मार्च 2018 के बीच रिलायंस कैपिटल की ओर से जारी किए गए पाँच गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर में उसने कुल 3,900 करोड़ रुपये का निवेश किया था। ये डिबेंचर कंपनी की सामान्य कारोबारी जरूरतों,वित्तीय आवश्यकताओं और मौजूदा कर्ज के पुनर्वित्त के उद्देश्य से जारी किए गए थे। एलआईसी के अनुसार,निवेश के दौरान उसे उपलब्ध कराई गई जानकारी और परिस्थितियों के आधार पर इन प्रतिभूतियों में पैसा लगाया गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्तियों ने कथित तौर पर आपराधिक साजिश के तहत एलआईसी को निवेश के लिए प्रेरित किया। आरोपों में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात,आपराधिक कदाचार, धन के कथित डायवर्जन या गबन तथा खातों में हेरफेर जैसे अपराध शामिल हैं। शिकायत के अनुसार,एलआईसी को कथित तौर पर गलत या भ्रामक जानकारी दी गई,जिसके आधार पर उसने रिलायंस कैपिटल में निवेश किया। इसके बाद निवेश के तौर पर उपलब्ध कराए गए धन को कथित रूप से ऐसे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया,जो मूल उद्देश्य से अलग थे।

एलआईसी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि निवेश की गई रकम के एक हिस्से का कथित तौर पर दूसरी जगह इस्तेमाल या डायवर्जन किया गया। इस कथित गतिविधि के कारण एलआईसी को 2,684.57 करोड़ रुपये का नुकसान होने का आरोप है। शिकायत के मुताबिक,इतनी ही राशि का कथित लाभ आरोपियों को हुआ। सीबीआई अब इन आरोपों की विस्तृत जाँच करेगी और यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि निवेश से प्राप्त रकम का वास्तविक इस्तेमाल कहाँ और किस उद्देश्य से किया गया।

जाँच एजेंसी ने कहा है कि मामले में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जाँच की जाएगी। इसमें निजी व्यक्तियों के साथ-साथ अज्ञात सरकारी अधिकारियों की संभावित भूमिका भी शामिल है। जाँच का एक प्रमुख हिस्सा कथित आपराधिक साजिश की पूरी कड़ी का पता लगाना होगा। इसके अलावा निवेश की गई रकम के अंतिम उपयोग,धन के संभावित डायवर्जन और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जाँच की जाएगी।

इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद रिलायंस समूह से जुड़ी वित्तीय संस्थाओं के खिलाफ चल रही जाँच का दायरा और बढ़ गया है। सीबीआई के अनुसार,यह पहली ऐसी कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी एजेंसी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड,रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के खिलाफ अलग-अलग शिकायतों के आधार पर मामले दर्ज किए हैं।

सीबीआई के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों,कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और एलआईसी की ओर से मिली शिकायतों के आधार पर इन कंपनियों से संबंधित कुल आठ प्राथमिकी पहले दर्ज की जा चुकी हैं। इन मामलों में जाँच के दौरान एजेंसी ने अब तक छह आरोपपत्र दाखिल किए हैं और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। संबंधित मामलों में जाँच अभी भी जारी है।

सीबीआई ने कहा है कि इन सभी मामलों की जाँच व्यापक स्तर पर की जा रही है। एजेंसी के मुताबिक,वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामलों में धन के प्रवाह, कंपनियों के बीच लेनदेन, निवेश की गई रकम के इस्तेमाल और कथित अनियमितताओं की कड़ियों को जोड़ना जाँच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नए मामले में भी जाँच अधिकारी यह पता लगाएँगे कि एलआईसी से प्राप्त रकम किन खातों या संस्थाओं तक पहुंची और उसका अंतिम इस्तेमाल किस तरह किया गया।

इस पूरी जाँच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड सामने आते हैं। जाँच एजेंसी संबंधित कंपनियों के वित्तीय दस्तावेजों, लेनदेन और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल कर सकती है। साथ ही उन अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका भी जाँच के दायरे में रहेगी,जिनका नाम या भूमिका जाँच के दौरान सामने आती है।

सीबीआई ने यह भी कहा है कि रिलायंस समूह से जुड़े इन मामलों की निगरानी सुप्रीम कोर्ट कर रहा है। एजेंसी के अनुसार,अदालत की निगरानी में चल रही इन जांचों को आगे बढ़ाया जा रहा है। सीबीआई ने कहा है कि वह मामलों की व्यापक और तेजी से जाँच करने के लिए प्रतिबद्ध है।

एलआईसी से जुड़े ताजा मामले में अब जाँच का मुख्य केंद्र 3,900 करोड़ रुपये के डिबेंचर निवेश और उसमें से कथित तौर पर हुए 2,684.57 करोड़ रुपये के नुकसान से संबंधित आरोप होंगे। जाँच के दौरान यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा कि निवेश के समय एलआईसी को कौन-सी जानकारी दी गई थी,धन का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया और कथित डायवर्जन में किन लोगों या संस्थाओं की भूमिका रही।

फिलहाल सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जाँच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। एजेंसी अब मामले से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जाँच के साथ संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाने में जुटेगी। आने वाले समय में जाँच के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और आरोपपत्र से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।