टोक्यो,29 जुलाई (युआईटीवी)- चार देशों के समूह क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर टोक्यो पहुँचे। टोक्यो में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संबोधित करते हुए कहा कि ये आसान समय नहीं है। वैश्विक आर्थिक विकास को सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है,साथ ही इसे जोखिमों से भी मुक्त करना भी बड़ी चुनौती है। क्वाड के सदस्य देशों में भारत,ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान हैं। भारत में इस साल के अंत में क्वाड नेताओं की बैठक होनी है।
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए दो दिवसीय दौरे पर जापान पहुँचे हैं। ऑस्ट्रेलिया,जापान और अमेरिका के अपने समकक्षों और गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में एस जयशंकर ने क्वाड बैठक को संबोधित किया,जिसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक,सुरक्षा और मानवीय मुद्दों पर आपसी समझ विकसित करने पर जोर दिया गया।
एस जयशंकर ने विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान अपने संबोधन में कहा, यहाँ टोक्यो में फिर से मिलना अच्छा रहा। इससे पहले न्यूयॉर्क में 10 महीने पहले हमारी आखिरी क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी। उस दौरान हम एक-दूसरे से द्विपक्षीय रूप से या अन्य कार्यक्रमों के अवसर पर मुलाकात किए थे। हालाँकि,हमारे शेरपाओं के नेतृत्व में हमारे सिस्टम लगातार बातचीत कर रहे हैं। इसलिए आज हमारे पास विचार-विमर्श करने,आगे की योजना बनाने तथा सहमत होने के लिए बहुत कुछ है।
एस जयशंकर ने कहा कि,हमारे लिए वैश्विक आर्थिक विकास को सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है,साथ ही इसे जोखिमों से मुक्त करना भी बड़ी चुनौती है। हमारी आपूर्ति शृंखलाएँ लचीलेपन के लिए विशेष तौर पर केंद्रित हैं। जैसे भरोसेमंद और पारदर्शी डिजिटल साझेदारी पर हमने विशेष ध्यान दिया,जिससे प्रौद्योगिकी क्षेत्र में असाधारण प्रचार-प्रसार हुआ। एक तरह से, हम पुनः वैश्वीकरण के दौर में हैं। हमारे पास आज उसी प्रकार की संभावनाएँ मौजूद हैं,जिस प्रकार से हम सोचते,रहते और काम करते हैं। एक स्पष्ट संदेश देते हुए उन्होंने अपने संबोधन को समाप्त किया,जिसमें क्वाड के अटल रहने,मजबूती से काम करने और आगे बढ़ते रहने का भाव था। हमारे पास राजनीतिक लोकतंत्रों,बहुलवादी समाजों और बाज़ार की अर्थव्यवस्थाओं के रूप में बहुत सारी अहम ज़िम्मेदारियाँ हैं। हमारे पास शासन आधारित व्यवस्था को कायम रखने का बड़ा सवाल है।
यह सिर्फ एक ऐसा सहयोग है,जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त,स्थिर,खुला,सुरक्षित तथा समृद्ध बने रहने को सुनिश्चित कर सकता है। हम सभी ने वैश्विक सुरक्षा पर जो प्रतिबद्धता जताई है,उसकी प्रतिध्वनि इस सीमा से कहीं आगे तक है। इसलिए राजनीतिक समझ को मजबूत करना,प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा देना,आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देना इत्यादि बहुत आवश्यक है। आगे उन्होंने कहा कि हमारे लोगों के मध्य सहजता को बढ़ाया जाना चाहिए और एक स्पष्ट संदेश हमारी बैठक से जाना चाहिए कि यहाँ क्वाड काम कर रहा है और आगे की ओर बढ़ रहा है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को किसी भी प्रभाव से मुक्त रखने के लिए एक नई रणनीति को विकसित करने के उद्देश्य से नवंबर 2017 में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने ‘क्वाड’ की स्थापना की थी। हिंद और प्रशांत महासागरों के बीच दक्षिण चीन सागर स्थित है। दक्षिण चीन सागर के अधिकांश हिस्सों पर चीन अपना दावा जताता है,जबकि इसी समुद्री क्षेत्र को मलेशिया,वियतनाम,फिलीपींस,ब्रुनेई और ताइवान भी अपना हिस्सा बताते हैं।
