मुंबई,3 जून (युआईटीवी)- फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब लगातार गहराता जा रहा है। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की ओर से फिल्म के निर्माताओं को कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद यह मामला मनोरंजन जगत के साथ-साथ कानूनी और सामाजिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। अब फिल्म के निर्माता अमित जानी ने इस पूरे विवाद पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है और स्पष्ट किया है कि उनकी फिल्म न तो सलमान खान के जीवन पर आधारित है और न ही गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की कहानी को केंद्र में रखकर बनाई गई है। उन्होंने कहा कि यदि यह मामला अदालत तक पहुँचता है,तो वह कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह सम्मान करेंगे और अपना पक्ष अदालत में मजबूती से रखेंगे।
अमित जानी ने कहा कि फिल्म को लेकर जिस तरह की धारणाएँ बनाई जा रही हैं,वे वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उनके अनुसार अभी तक फिल्म का न तो टीजर जारी किया गया है और न ही ट्रेलर रिलीज हुआ है। ऐसे में फिल्म की कहानी,उसके पात्रों और उसके संदेश के बारे में निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी ने फिल्म देखी ही नहीं है,तब उसके कंटेंट पर आपत्ति जताना किस आधार पर उचित माना जा सकता है।
निर्माता का कहना है कि यदि सलमान खान या उनकी टीम सीधे तौर पर फिल्म निर्माताओं से संपर्क करती और फिल्म की विषयवस्तु के बारे में जानकारी माँगती,तो वे विस्तार से पूरी कहानी समझाने के लिए तैयार थे। अमित जानी के अनुसार संवाद और चर्चा किसी भी विवाद का बेहतर समाधान हो सकते हैं,लेकिन बिना फिल्म देखे सीधे कानूनी नोटिस भेजना उन्हें उचित नहीं लगता।
उन्होंने कहा कि उनकी फिल्म का मूल विषय बिश्नोई समाज के उन लोगों का संघर्ष है,जिन्होंने अपने अधिकारों और न्याय के लिए लंबे समय तक कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ी। उनके अनुसार फिल्म का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं,बल्कि एक समुदाय की सोच,संघर्ष और न्याय की माँग को प्रस्तुत करना है। उन्होंने दावा किया कि फिल्म में किसी भी अभिनेता,राजनेता या अन्य सार्वजनिक व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की गई है।
फिल्म के पोस्टर को लेकर उठे विवाद पर भी अमित जानी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि किसी पोस्टर में एक व्यक्ति को बंदूक के साथ दिखाया गया है और कहीं भी सलमान खान का नाम या पहचान नहीं दी गई है,तो केवल चेहरे की समानता के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि फिल्म उन्हीं पर आधारित है,उचित नहीं है। उनके अनुसार सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और अटकलों के आधार पर किसी फिल्म के उद्देश्य को परिभाषित नहीं किया जा सकता।
निर्माता ने यह भी कहा कि भारतीय संविधान और कानून प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं और फिल्म निर्माण भी उसी अधिकार का हिस्सा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश और दुनिया की कई चर्चित घटनाओं तथा सार्वजनिक व्यक्तित्वों पर समय-समय पर फिल्में बनाई जाती रही हैं। ऐतिहासिक घटनाओं, राजनीतिक नेताओं,सामाजिक आंदोलनों और चर्चित मामलों पर आधारित अनेक फिल्मों का निर्माण हुआ है। ऐसे में किसी विषय पर फिल्म बनाना अपने आप में कोई असामान्य या विवादास्पद बात नहीं है।
अमित जानी ने अपनी पिछली फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस फिल्म को लेकर भी कानूनी विवाद सामने आया था और मामला अदालत तक पहुँचा था। उस समय न्यायालय के निर्देश पर संबंधित पक्षों को फिल्म रिलीज से पहले दिखाई गई थी। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान मामले में भी अदालत कोई निर्देश देती है,तो उनकी टीम उसका पूरी तरह पालन करेगी। उनके अनुसार न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक और निर्माता का कर्तव्य है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सलमान खान व्यक्तिगत रूप से फिल्म देखने की इच्छा जताते,तो वे उसके लिए भी तैयार थे। उनका मानना है कि किसी भी रचनात्मक कार्य के बारे में राय बनाने से पहले उसे देखना और समझना जरूरी होता है। केवल पोस्टर या अफवाहों के आधार पर किसी फिल्म को लेकर निष्कर्ष निकालना सही नहीं माना जा सकता।
दरअसल इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई,जब सलमान खान की कानूनी टीम ने फिल्म के निर्माताओं को एक नोटिस भेजा। नोटिस में यह दावा किया गया कि फिल्म कथित रूप से वर्ष 1998 के चर्चित काले हिरण शिकार मामले से प्रेरित हो सकती है और इससे अभिनेता की सार्वजनिक छवि प्रभावित होने की आशंका है। कानूनी टीम ने यह भी तर्क दिया कि संबंधित मामला अभी राजस्थान उच्च न्यायालय में विचाराधीन है,इसलिए उस विषय से जुड़ी किसी फिल्म का निर्माण या प्रदर्शन न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
काले हिरण शिकार मामला भारतीय मनोरंजन जगत के सबसे चर्चित कानूनी मामलों में से एक रहा है। इस मामले ने वर्षों तक सुर्खियाँ बटोरीं और समय-समय पर न्यायालयों में इसकी सुनवाई होती रही है। यही कारण है कि जब ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ नामक फिल्म की घोषणा हुई,तो कई लोगों ने इसे उसी मामले से जोड़कर देखना शुरू कर दिया।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब फिल्म का पहला पोस्टर सार्वजनिक हुआ। पोस्टर में एक व्यक्ति को बंदूक पकड़े हुए दिखाया गया था। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने दावा किया कि पोस्टर में दिखाई गई आकृति का लुक सलमान खान से मिलता-जुलता है। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि फिल्म अप्रत्यक्ष रूप से अभिनेता और काले हिरण शिकार मामले को केंद्र में रखकर बनाई जा रही है।
हालाँकि,फिल्म निर्माताओं ने इन दावों को लगातार खारिज किया है। उनका कहना है कि पोस्टर के आधार पर फिल्म की पूरी कहानी का आकलन नहीं किया जा सकता। निर्माता का दावा है कि फिल्म का उद्देश्य किसी व्यक्ति की छवि को प्रभावित करना नहीं है,बल्कि एक सामाजिक और कानूनी संघर्ष को प्रस्तुत करना है।
फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि किसी भी विवादित विषय पर आधारित फिल्म को लेकर अक्सर कानूनी और सामाजिक बहस देखने को मिलती है। कई बार फिल्म के प्रदर्शन से पहले ही उसके विषय को लेकर सवाल उठने लगते हैं। ऐसे मामलों में अदालतें और सेंसर बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं,ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन बना रहे।
फिलहाल ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ को लेकर विवाद जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर कायम हैं। एक ओर सलमान खान की कानूनी टीम फिल्म को लेकर आपत्ति जता रही है,वहीं दूसरी ओर निर्माता अमित जानी का कहना है कि उनकी फिल्म को बिना देखे उसके बारे में धारणा बनाना उचित नहीं है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी रूप से किस दिशा में आगे बढ़ता है,इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि मामला अदालत तक पहुँचता है,तो वहाँ फिल्म की विषयवस्तु,उसके उद्देश्य और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जा सकता है। फिलहाल यह विवाद मनोरंजन जगत की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो चुका है और फिल्म की रिलीज से पहले ही इसे व्यापक चर्चा का विषय बना चुका है।
