नई दिल्ली,2 नवंबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस ने भारत-ग्रीस सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया है। दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई इस बातचीत में व्यापार, रक्षा, शिपिंग और कनेक्टिविटी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की गई। हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद द्विपक्षीय संबंधों में आई प्रगति की सराहना भी की गई और समुद्री कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की योजनाओं पर विचार किया गया।
ग्रीस के प्रधानमंत्री मित्सोताकिस ने पीएम मोदी को हाल में हुए लोकसभा चुनाव में पुनर्निर्वाचन के लिए बधाई दी और भारत-ग्रीस संबंधों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद जताई। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस बातचीत के बारे में लिखा कि उन्होंने और मित्सोताकिस ने भारत-ग्रीस सामरिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। मोदी ने कहा कि उनका लक्ष्य व्यापार, रक्षा, शिपिंग और कनेक्टिविटी में सहयोग को और मजबूत करना है, और ग्रीस भारत का यूरोपीय संघ में एक महत्वपूर्ण साथी है।
Yesterday, had a productive conversation with PM @kmitsotakis, reaffirming our shared commitment to strengthening the India-Greece Strategic Partnership. Together, we aim to deepen our collaboration across trade, defence, shipping and connectivity. Greece is a valued partner for…
— Narendra Modi (@narendramodi) November 2, 2024
इस बातचीत के दौरान, इस साल की शुरुआत में पीएम मित्सोताकिस की भारत यात्रा के बाद की प्रगति पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर के विकास पर विचार किया और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों, खासकर पश्चिम एशिया में हो रहे बदलावों पर चर्चा की।
इस साल की शुरुआत में, मित्सोताकिस ने भारत का दौरा किया था, जहां उन्होंने नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। इस दौरे के दौरान, दोनों नेताओं ने समुद्री कनेक्टिविटी और आईएमईसी जैसे गलियारों के माध्यम से साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया था। आईएमईसी पर हुई चर्चा में भारत और ग्रीस के बीच मजबूत कनेक्टिविटी के लिए सभी संभावित विकल्पों पर विचार किया गया।
पीएम मोदी और मित्सोताकिस की यह बातचीत दिखाती है कि दोनों देशों के बीच संबंधों को और अधिक गहरा करने की कोशिशें जारी हैं, जिससे न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता में भी योगदान होगा।
