नई दिल्ली,25 फरवरी (युआईटीवी)- फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2 – गोइज बियॉन्ड’ को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। फिल्म के टीजर को हटाने या डिलीट किए जाने की खबरों के बीच निर्माताओं ने आधिकारिक बयान जारी कर इन दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। फिल्म का निर्माण करने वाली सनशाइन पिक्चर्स ने स्पष्ट किया है कि टीजर और ट्रेलर को लेकर जो खबरें सोशल मीडिया और कुछ मीडिया संस्थानों में प्रसारित की जा रही हैं,उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। कंपनी के मुताबिक मामला अभी केरल हाई कोर्ट में विचाराधीन है और अदालत ने टीजर या ट्रेलर हटाने का कोई आदेश जारी नहीं किया है।
निर्माताओं ने अपने बयान में कहा कि फिल्म का टीजर और ट्रेलर उनके सभी आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स पर पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। उन्होंने मीडिया,डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और आम दर्शकों से अपील की कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी भी प्रकार की अफवाह या गलत सूचना न फैलाएँ। कंपनी का कहना है कि इस तरह की भ्रामक खबरें अनावश्यक भ्रम और विवाद को जन्म देती हैं,जिससे न केवल फिल्म बल्कि समाज में भी गलत संदेश जाता है।
यह स्पष्टीकरण उस समय आया जब गुरुवार को केरल हाई कोर्ट ने फिल्म के निर्माताओं को एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान नोटिस जारी किया। यह याचिका फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा दी गई मंजूरी को चुनौती देती है। याचिकाकर्ता ने फिल्म के टीजर और ट्रेलर पर गंभीर आपत्तियाँ जताई हैं और आरोप लगाया है कि इनमें कई राज्यों की महिलाओं को प्रेम संबंधों के जरिए फँसाकर जबरन धर्म परिवर्तन कराने का चित्रण किया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि कहानी भले ही कई राज्यों से जुड़ी घटनाओं पर आधारित बताई जा रही हो,लेकिन फिल्म का शीर्षक और प्रचार-प्रसार केवल केरल राज्य को केंद्र में रखकर किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इस तरह आतंकवाद, जबरन धर्मांतरण और साजिश जैसी संवेदनशील घटनाओं को एक राज्य विशेष से जोड़कर दिखाना न केवल भ्रामक है,बल्कि इससे सामाजिक और सांप्रदायिक तनाव भी बढ़ सकता है।
विवाद का एक बड़ा कारण टीजर के अंत में दिया गया हिंदी नारा “अब सहेंगे नहीं,लड़ेंगे” भी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह नारा प्रतिशोध की भावना को उकसाने वाला है और इससे समाज में वैमनस्य फैल सकता है। याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि सीबीएफसी ने फिल्म को प्रमाणन देते समय सिनेमैटोग्राफ अधिनियम,1952 की धारा 5बी का समुचित पालन नहीं किया। इस धारा के अनुसार ऐसी फिल्मों को प्रमाणन नहीं दिया जाना चाहिए जो सार्वजनिक व्यवस्था,शालीनता या नैतिकता के खिलाफ हों या अपराध के लिए उकसावे का कार्य करें।
फिल्म का टीजर 30 जनवरी को जारी किया गया था और उसी समय से इसे लेकर बहस शुरू हो गई थी। टीजर में तीन हिंदू लड़कियों की कहानी दिखाई गई है,जिनकी भूमिकाएँ उल्का गुप्ता,ऐश्वर्या ओझा और अदिति भाटिया ने निभाई हैं। कहानी में प्रेम संबंधों के बाद कथित तौर पर धर्म परिवर्तन की साजिश का खुलासा होता है। टीजर में दिखाया गया है कि लड़कियाँ हिजाब पहने अपने साथ हुए अनुभवों और दर्द को साझा करती हैं। अंत में “अब सहेंगे नहीं… लड़ेंगे” का नारा सुनाई देता है,जिसने विवाद को और हवा दी।
फिल्म का शीर्षक पहले भाग ‘द केरल स्टोरी’ की याद दिलाता है,जो अपने समय में भी बड़े विवादों के केंद्र में रही थी। ऐसे में इसके दूसरे भाग की घोषणा और टीजर रिलीज के बाद से ही विभिन्न समूहों की प्रतिक्रियाएँ सामने आने लगीं। जहाँ एक ओर कुछ लोग इसे सामाजिक मुद्दे को उठाने वाला प्रयास बता रहे हैं,वहीं दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि फिल्म की प्रस्तुति और प्रचार-प्रसार का तरीका संवेदनशील विषयों को एकतरफा ढंग से पेश कर सकता है।
निर्माताओं ने अपने बयान में कहा है कि वे कानून और न्यायपालिका का पूरा सम्मान करते हैं और अदालत की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक अदालत की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं आता,तब तक फिल्म के प्रचार सामग्री को हटाने का कोई सवाल नहीं उठता। उनका कहना है कि फिल्म एक रचनात्मक अभिव्यक्ति है और इसे देखने या न देखने का निर्णय दर्शकों पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और अगली सुनवाई में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। इस बीच,सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर बहस जारी है। समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क रख रहे हैं। आने वाले दिनों में अदालत का रुख और संभावित निर्देश यह तय करेंगे कि फिल्म की रिलीज और प्रचार को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है। तब तक ‘द केरल स्टोरी 2 – गोइज बियॉन्ड’ विवाद और चर्चा के केंद्र में बनी रहने की संभावना है।
