नई दिल्ली,31 मार्च (युआईटीवी)- अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। नासा ने अपने बहुप्रतीक्षित आर्टेमिस II मिशन के लिए सभी अंतिम तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। यह मिशन 1 अप्रैल को कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा और इसे मानव अंतरिक्ष यात्रा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत यह पहला मिशन होगा,जिसमें इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
इस ऐतिहासिक मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं,जो लगभग 10 दिन की यात्रा पर चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाकर वापस पृथ्वी पर लौटेंगे। इस मिशन की खासियत यह भी है कि अपोलो कार्यक्रम के बाद पहली बार इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा यानी लो-अर्थ ऑर्बिट से बाहर जाकर अंतरिक्ष की गहराइयों में प्रवेश करेंगे। यह उपलब्धि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग मानी जा रही है।
आर्टेमिस II मिशन में शामिल अंतरिक्ष यात्रियों में रीड वाइसमैन,विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच शामिल हैं। इनके साथ कनाडा स्पेस एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन भी इस मिशन का हिस्सा होंगे। यह मिशन अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है,जिसमें विभिन्न देशों के वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री मिलकर काम कर रहे हैं।
इस मिशन को नासा के अत्याधुनिक स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा। इसके साथ ओरियन स्पेसक्राफ्ट का उपयोग किया जाएगा,जिसमें पहली बार इंसानों के साथ लाइफ-सपोर्ट सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा। यह परीक्षण भविष्य के लंबे अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अंतरिक्ष यात्रियों को लंबे समय तक सुरक्षित और स्वस्थ रखा जा सके।
नासा के अनुसार,लॉन्च के दिन मौसम की स्थिति काफी हद तक अनुकूल रहने की संभावना है। लगभग 80 प्रतिशत तक परिस्थितियाँ मिशन के लिए सही मानी जा रही हैं,हालाँकि बादल और तेज हवाएँ कुछ हद तक चुनौती पेश कर सकती हैं। इसके बावजूद वैज्ञानिकों को विश्वास है कि मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किया जाएगा।
लॉन्च के बाद ओरियन स्पेसक्राफ्ट पहले पृथ्वी की उच्च कक्षा में जाएगा और फिर ‘फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी’ के जरिए चंद्रमा के दूर वाले हिस्से का चक्कर लगाएगा। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें वापसी के लिए अतिरिक्त ईंधन की जरूरत नहीं पड़ती और स्पेसक्राफ्ट स्वतः ही पृथ्वी की ओर लौट आता है। यह प्रणाली मिशन की सुरक्षा और दक्षता दोनों को बढ़ाती है।
इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड भी बना सकते हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड अपोलो 13 मिशन के नाम था। यदि यह मिशन सफल रहता है,तो यह अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक नई उपलब्धि के रूप में दर्ज होगा।
आर्टेमिस II मिशन के दौरान कई महत्वपूर्ण तकनीकों और प्रणालियों का परीक्षण किया जाएगा। इसमें आपातकालीन प्रक्रियाएँ,रेडिएशन से सुरक्षा उपाय और लेजर आधारित उन्नत संचार प्रणाली शामिल हैं। ये सभी तकनीकें भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए आधार तैयार करेंगी,खासकर उन मिशनों के लिए जो चंद्रमा पर मानव बस्ती बसाने और आगे चलकर मंगल ग्रह तक जाने की योजना से जुड़े हैं।
नासा का कहना है कि यह मिशन केवल एक यात्रा नहीं,बल्कि भविष्य की अंतरिक्ष रणनीति का अहम हिस्सा है। आर्टेमिस कार्यक्रम का उद्देश्य चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करना और वहाँ से आगे के अंतरिक्ष अभियानों के लिए आधार तैयार करना है। इस कार्यक्रम के तहत आने वाले वर्षों में और भी मिशन भेजे जाएँगे,जिनमें चंद्रमा की सतह पर मानव लैंडिंग और वहाँ अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की योजना शामिल है।
नासा इस मिशन का लाइव प्रसारण भी करेगा और इसके सभी महत्वपूर्ण अपडेट अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर साझा करेगा,ताकि दुनियाभर के लोग इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बन सकें। कुल मिलाकर,आर्टेमिस II मिशन अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नई दिशा तय करने वाला कदम है, जो मानवता को चंद्रमा से आगे मंगल ग्रह तक पहुँचाने की राह खोल सकता है।
