भोपाल,22 मई (युआईटीवी)- भोपाल की मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने की सिफारिश कर दी है। शुक्रवार को राज्य सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि केंद्र सरकार को इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंपने के लिए औपचारिक संदेश भेज दिया गया है। सरकार के इस फैसले को मामले में बढ़ते विवाद,निष्पक्ष जाँच की माँग और लगातार उठ रहे सवालों के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके स्थित बाग मुगालिया एक्सटेंशन में हुई थी। उनकी मौत के बाद से ही यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। शुरुआती पुलिस जाँच में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया था,लेकिन ट्विशा के परिवार ने इस दावे को खारिज करते हुए दहेज हत्या और साजिश के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद से परिवार लगातार स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग कर रहा था।
मध्य प्रदेश सरकार के गृह विभाग द्वारा जारी बयान में बताया गया कि कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 133/2026 के तहत मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 80(2),85 और 3(5) के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही दहेज निषेध अधिनियम 1961 की धारा 3 और 4 भी जोड़ी गई हैं। इन धाराओं के तहत दहेज उत्पीड़न,संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
सरकार ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि इस मामले की जाँच को सीबीआई को सौंपने के लिए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 की धारा 6 के तहत राज्य की सहमति दे दी गई है। इसका अर्थ यह है कि अब सीबीआई को पूरे मध्य प्रदेश में इस मामले की जाँच करने और आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार मिल जाएगा। अधिसूचना में यह भी कहा गया कि जाँच केवल मुख्य अपराध तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि मामले से जुड़ी किसी भी उकसाने वाली कार्रवाई और आपराधिक साजिश की भी जाँच की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मामले को सीबीआई को सौंपने का निर्णय तब लिया जाता है,जब राज्य सरकार को लगता है कि मामले की संवेदनशीलता और सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखने के लिए स्वतंत्र एजेंसी की जाँच आवश्यक है। ट्विशा शर्मा मामले में भी पिछले कुछ दिनों में जिस तरह के आरोप सामने आए,उन्होंने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया था।
दरअसल,हाल ही में ट्विशा शर्मा के वकील ने दावा किया था कि उनकी मौत के बाद आरोपी पक्ष के संपर्क में कई प्रभावशाली लोग थे। इनमें कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारी,डॉक्टर,न्यायपालिका से जुड़े लोग और सीसीटीवी संचालन से जुड़े व्यक्तियों के नाम सामने आने का दावा किया गया था। इन आरोपों के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी सवाल उठने लगे थे कि क्या स्थानीय स्तर पर जाँच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से हो पाएगी।
ट्विशा शर्मा के परिवार ने कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की थी और मामले की सीबीआई जाँच की माँग की थी। परिवार का कहना था कि उन्हें स्थानीय जाँच एजेंसियों पर भरोसा नहीं रह गया है और केवल स्वतंत्र जाँच एजेंसी ही सच्चाई सामने ला सकती है। परिवार ने आरोप लगाया था कि प्रभावशाली लोगों के कारण जाँच प्रभावित हो सकती है।
सरकार के इस फैसले को परिवार की माँग और बढ़ते जनदबाव के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सीबीआई जाँच से मामले में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी पहलुओं की गहराई से जाँच संभव हो सकेगी। खास तौर पर डिजिटल साक्ष्य,कॉल रिकॉर्ड,सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसे पहलुओं की नए सिरे से जांच की संभावना है।
इस मामले में ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह अब भी फरार बताए जा रहे हैं। पेशे से वकील समर्थ सिंह पर दहेज प्रताड़ना और अन्य गंभीर आरोप लगे हैं। वहीं उनकी माँ और भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह को इस मामले में पहले गिरफ्तार किया गया था, हालाँकि,बाद में उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई। गिरिबाला सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि वायरल ऑडियो क्लिप और व्हाट्सएप चैट फर्जी हैं।
उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर इन डिजिटल सामग्रियों की न्यायिक निगरानी में जाँच कराने की माँग की है। इसके अलावा उन्होंने अपने घर से जब्त किए गए सीसीटीवी डीवीआर की जाँच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। ऐसे में अब सीबीआई जाँच के दौरान इन तमाम डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ट्विशा शर्मा की मौत ने पूरे देश में दहेज उत्पीड़न और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग इस मामले में सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जाँच की माँग कर रहे हैं। कई महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी मामले को गंभीर बताते हुए स्वतंत्र जाँच एजेंसी की माँग की थी।
मध्य प्रदेश सरकार के फैसले के बाद अब औपचारिक प्रक्रियाएँ पूरी होने का इंतजार है। केंद्र सरकार की मंजूरी और आवश्यक दस्तावेजों के हस्तांतरण के बाद सीबीआई औपचारिक रूप से जाँच अपने हाथ में ले सकती है। इसके बाद सीबीआई की टीम घटनास्थल का निरीक्षण करने,संबंधित लोगों से पूछताछ करने और अब तक की जाँच का पुनर्मूल्यांकन करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीआई जाँच से मामले की दिशा पूरी तरह बदल सकती है। यदि जाँच के दौरान प्रभावशाली लोगों की भूमिका या जाँच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है,तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है। दूसरी ओर यदि पुलिस की शुरुआती जाँच सही पाई जाती है,तो इससे कई विवादों पर भी विराम लग सकता है।
फिलहाल ट्विशा शर्मा का परिवार इस फैसले को न्याय की दिशा में पहला बड़ा कदम मान रहा है। परिवार का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि सीबीआई निष्पक्ष तरीके से जाँच करेगी और उनकी बेटी की मौत की सच्चाई देश के सामने आएगी। वहीं पूरे मामले पर अब देशभर की नजरें टिकी हुई हैं,क्योंकि यह केवल एक संदिग्ध मौत का मामला नहीं रह गया है, बल्कि न्याय व्यवस्था,दहेज उत्पीड़न और प्रभावशाली लोगों की भूमिका जैसे कई संवेदनशील सवालों से जुड़ चुका है।
