चीन-रूस ने रणनीतिक साझेदारी को दिया नया विस्तार (तस्वीर क्रेडिट@HiralalCPIM)

चीन-रूस ने रणनीतिक साझेदारी को दिया नया विस्तार,सैन्य और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर

बीजिंग,22 मई (युआईटीवी)- चीन और रूस ने 20 मई को जारी संयुक्त घोषणा के माध्यम से अपनी सर्वांगीण रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का संकेत दिया है। दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि वे आने वाले समय में राजनीतिक,सैन्य,आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए मिलकर काम करेंगे। इस संयुक्त घोषणा को वैश्विक राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों और पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते तनाव के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संयुक्त घोषणा में कहा गया कि दोनों देश राष्ट्राध्यक्षों की कूटनीति के नेतृत्व में आपसी सहयोग को और व्यापक बनाएँगे। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि शीर्ष नेतृत्व के बीच बनी समझ और सहमतियों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही सरकारों,संसदों और राजनीतिक दलों के बीच संवाद और आदान-प्रदान को और अधिक मजबूत करने की बात भी कही गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल औपचारिकता नहीं,बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और दीर्घकालिक रणनीतिक समन्वय का संकेत है।

घोषणा में सैन्य सहयोग को विशेष महत्व दिया गया है। चीन और रूस ने कहा कि वे दोनों सेनाओं के बीच पारंपरिक मित्रता को और मजबूत करेंगे तथा सैन्य क्षेत्रों में पारस्परिक विश्वास बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यासों और संयुक्त समुद्री एवं हवाई गश्त के विस्तार पर भी सहमति जताई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा मामलों में मिलकर सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार,हाल के वर्षों में चीन और रूस के बीच सैन्य सहयोग तेजी से बढ़ा है। दोनों देशों ने कई संयुक्त सैन्य अभ्यास किए हैं और विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन किया है। अब नई घोषणा में संयुक्त गश्त और समन्वय बढ़ाने की बात से यह संकेत मिलता है कि दोनों देश सुरक्षा और रक्षा मामलों में और अधिक नजदीक आना चाहते हैं। यह भी माना जा रहा है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और यूरोप में बदलती रणनीतिक परिस्थितियों के बीच दोनों देश अपनी साझेदारी को संतुलन बनाने वाले एक बड़े मंच के रूप में पेश करना चाहते हैं।

संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों देश द्विपक्षीय और बहुपक्षीय ढाँचे के तहत समन्वय को और गहरा करेंगे तथा विभिन्न खतरों और चुनौतियों का मिलकर सामना करेंगे। इसके साथ ही वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता की रक्षा के लिए सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई गई। अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यह बयान पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका और उसके सहयोगियों को एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को लेकर भी दोनों देशों ने सकारात्मक रुख अपनाया है। संयुक्त घोषणा में कहा गया कि पिछले कुछ वर्षों में चीन और रूस के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। दोनों देशों ने इस सहयोग का उच्च मूल्यांकन करते हुए कहा कि वे नई नीतिगत बातचीत को बढ़ावा देंगे और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करेंगे।

घोषणा में यह भी कहा गया कि दोनों पक्ष नए आर्थिक वृद्धि बिंदुओं की तलाश करेंगे और वस्तुओं तथा सेवाओं के व्यापार को और बढ़ावा देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक व्यापारिक तनाव के बीच रूस ने चीन के साथ आर्थिक संबंधों को काफी मजबूत किया है। ऊर्जा,तकनीक,परिवहन और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच लगातार सहयोग बढ़ रहा है। चीन भी रूस के साथ व्यापारिक संबंधों को अपनी दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।

दोनों देशों ने अपनी आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी के स्वतंत्र विकास के अधिकार की रक्षा करने की बात भी कही। इसे पश्चिमी प्रतिबंधों और आर्थिक दबावों के खिलाफ साझा रुख के रूप में देखा जा रहा है। रूस पर लगे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के बाद चीन उसके लिए एक बड़े आर्थिक साझेदार के रूप में उभरा है। ऐसे में यह घोषणा दोनों देशों की आर्थिक निकटता को और मजबूत करती दिखाई देती है।

संयुक्त घोषणा में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों देशों ने साझा रुख अपनाया। चीन और रूस ने दोहराया कि वे प्रभुत्ववाद,एकतरफावाद और विश्व राजनीति में बल प्रयोग की वापसी का डटकर विरोध करते हैं। इसके साथ ही दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठा और अंतर्राष्ट्रीय मामलों में उसकी केंद्रीय भूमिका की रक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान अमेरिका और पश्चिमी देशों की नीतियों की अप्रत्यक्ष आलोचना के रूप में देखा जा सकता है। हाल के वर्षों में चीन और रूस लगातार बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत करते रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय संस्थानों की भूमिका को मजबूत करने की बात कहते रहे हैं। दोनों देश यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वैश्विक मुद्दों का समाधान एकतरफा दबाव या सैन्य शक्ति के बजाय संवाद और बहुपक्षीय सहयोग के जरिए होना चाहिए।

अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों का कहना है कि चीन और रूस की यह नई संयुक्त घोषणा केवल कूटनीतिक बयान नहीं,बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत है। यूक्रेन युद्ध,इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव,वैश्विक व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और पश्चिमी देशों के साथ टकराव की पृष्ठभूमि में दोनों देश एक-दूसरे के और करीब आते दिखाई दे रहे हैं।

हालाँकि,पश्चिमी देशों में चीन और रूस की बढ़ती नजदीकियों को लेकर चिंता भी लगातार बढ़ रही है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य और रणनीतिक सहयोग इसी तरह बढ़ता रहा,तो आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति में नए शक्ति समीकरण उभर सकते हैं। फिलहाल इस संयुक्त घोषणा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चीन और रूस अपने संबंधों को केवल औपचारिक साझेदारी तक सीमित नहीं रखना चाहते,बल्कि वे दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।