मुंबई,22 मई (युआईटीवी)- भारतीय जीवन बीमा निगम ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन करते हुए अपने समेकित शुद्ध लाभ में 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी ने गुरुवार को जारी अपने वित्तीय नतीजों में बताया कि जनवरी से मार्च 2026 के दौरान उसका नेट प्रॉफिट बढ़कर 23,467 करोड़ रुपए हो गया,जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 19,039 करोड़ रुपए था। बेहतर प्रीमियम आय, निवेश से मजबूत कमाई और कारोबार के विस्तार ने कंपनी के मुनाफे को नई ऊँचाई तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।
कंपनी के मजबूत प्रदर्शन के साथ ही एलआईसी के बोर्ड ने निवेशकों के लिए बड़ा ऐलान करते हुए प्रति इक्विटी शेयर 10 रुपए के अंतरिम डिविडेंड की सिफारिश की है। कंपनी के शेयर का फेस वैल्यू 10 रुपए है और बोनस शेयर जारी होने से पहले यह डिविडेंड प्रति शेयर 20 रुपए के बराबर माना जाएगा। कंपनी ने बताया कि डिविडेंड पाने के लिए रिकॉर्ड डेट 25 जून 2026 तय की गई है। इसके अलावा एलआईसी ने अपने बहुप्रतीक्षित 1:1 बोनस इश्यू के लिए 29 मई को रिकॉर्ड डेट घोषित किया है। कंपनी के अनुसार बोनस इक्विटी शेयरों का आवंटन 1 जून 2026 तक पूरा होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बोनस शेयर और डिविडेंड की घोषणा निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है और इससे बाजार में कंपनी के प्रति भरोसा और मजबूत हो सकता है। हाल के वर्षों में एलआईसी ने अपनी परिचालन क्षमता,निवेश प्रबंधन और बीमा कारोबार में लगातार सुधार किया है,जिसका असर अब उसके वित्तीय नतीजों में साफ दिखाई दे रहा है।
एलआईसी ने अपनी एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि चौथी तिमाही के दौरान उसकी शुद्ध प्रीमियम आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। कंपनी की नेट प्रीमियम आय 12 प्रतिशत बढ़कर 1.65 लाख करोड़ रुपए पहुँच गई,जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1.48 लाख करोड़ रुपए थी। कंपनी के अनुसार यह वृद्धि रिन्यूअल प्रीमियम और सिंगल प्रीमियम दोनों श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन के कारण संभव हो सकी।
जनवरी-मार्च तिमाही में पहले वर्ष का प्रीमियम आय भी मजबूत रही। कंपनी ने इस अवधि में 13,009 करोड़ रुपए का फर्स्ट ईयर प्रीमियम दर्ज किया,जो पिछले साल की समान अवधि में 11,103 करोड़ रुपए था। यानी इसमें लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं रिन्यूअल प्रीमियम आय भी बढ़कर 82,233 करोड़ रुपए हो गई,जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 79,425 करोड़ रुपए थी।
बीमा कारोबार के अलावा निवेश से होने वाली कमाई ने भी कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी। एलआईसी की निवेश आय चौथी तिमाही में बढ़कर 1.09 लाख करोड़ रुपए पहुँच गई,जबकि एक साल पहले यह 93,443 करोड़ रुपए थी। यानी निवेश आय में करीब 17 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार और बॉन्ड बाजार में बेहतर रिटर्न के साथ कंपनी की निवेश रणनीति ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कंपनी ने इस तिमाही में कुल अधिशेष 89,058 करोड़ रुपए दर्ज किया,जबकि पिछले साल यह आँकड़ा 77,053 करोड़ रुपए था। सहयोगी कंपनियों और अल्पमत हिस्सेदारी से जुड़े लाभ को समायोजित करने के बाद अधिशेष 24,964 करोड़ रुपए रहा,जो एक साल पहले 20,271 करोड़ रुपए था। इससे साफ संकेत मिलता है कि एलआईसी का कोर व्यवसाय लगातार मजबूत हो रहा है।
हालाँकि,तिमाही के दौरान कंपनी के खर्चों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्रबंधन खर्च बढ़कर 20,699 करोड़ रुपए हो गया,जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 16,526 करोड़ रुपए था। कर्मचारियों के वेतन और कल्याण पर खर्च भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा और यह 8,891 करोड़ रुपए तक पहुँच गया। एक साल पहले यह खर्च 5,943 करोड़ रुपए था। इसके अलावा अन्य परिचालन खर्च बढ़कर 4,074 करोड़ रुपए हो गए,जबकि पिछले वर्ष यह 2,848 करोड़ रुपए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते परिचालन खर्चों के बावजूद एलआईसी ने अपने राजस्व और निवेश आय में मजबूत वृद्धि दर्ज कर लाभप्रदता बनाए रखी है। यह कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और व्यापक बाजार उपस्थिति को दर्शाता है।
एलआईसी की वित्तीय मजबूती का एक और महत्वपूर्ण संकेत उसका सॉल्वेंसी रेशियो है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी का सॉल्वेंसी रेशियो बढ़कर 2.35 हो गया,जबकि एक साल पहले यह 2.11 था। यह अनुपात नियामकीय आवश्यकता से काफी ऊपर है और दर्शाता है कि कंपनी भविष्य की देनदारियों और दावों को पूरा करने की मजबूत क्षमता रखती है।
हालाँकि,पॉलिसीधारकों के लंबे समय तक जुड़े रहने को मापने वाले पर्सिस्टेंसी रेशियो में हल्की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का 13वें महीने का पर्सिस्टेंसी रेशियो 67.77 प्रतिशत रहा,जबकि पिछले साल यह 68.62 प्रतिशत था। वहीं 61वें महीने का पर्सिस्टेंसी रेशियो घटकर 54.13 प्रतिशत रह गया,जो एक साल पहले 58.54 प्रतिशत था। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बीमा उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताओं का असर इस पर दिखाई दे सकता है।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के आँकड़ों पर नजर डालें तो एलआईसी का प्रदर्शन और भी मजबूत दिखाई देता है। पूरे साल के दौरान कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा 19 प्रतिशत बढ़कर 57,453 करोड़ रुपए हो गया,जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 48,320 करोड़ रुपए था। वहीं पूरे साल की शुद्ध प्रीमियम आय 10 प्रतिशत बढ़कर 5.38 लाख करोड़ रुपए हो गई,जो पिछले वर्ष 4.90 लाख करोड़ रुपए थी।
एलआईसी ने यह भी बताया कि 31 मार्च 2026 तक लिंक्ड एसेट्स को छोड़कर पॉलिसीधारकों का कुल फंड 53.68 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। पिछले साल यह आंकड़ा 51.64 लाख करोड़ रुपए था। वहीं शेयरधारकों का निवेश भी उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपए हो गया,जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 1.03 लाख करोड़ रुपए था। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी की परिसंपत्तियों और निवेश पोर्टफोलियो में लगातार विस्तार हो रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि एलआईसी का यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है,जब भारतीय बीमा क्षेत्र में निजी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद एलआईसी अपनी विशाल ग्राहक पहुँच,मजबूत ब्रांड भरोसे और व्यापक एजेंट नेटवर्क के दम पर बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखने में सफल रही है।
हाल के वर्षों में कंपनी ने डिजिटल सेवाओं और तकनीकी ढाँचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। ऑनलाइन पॉलिसी सेवाओं,डिजिटल क्लेम सेटलमेंट और निवेश प्रबंधन में सुधार ने कंपनी की परिचालन क्षमता को बेहतर बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में तकनीकी निवेश और नए बीमा उत्पाद कंपनी की वृद्धि को और गति दे सकते हैं।
एलआईसी के मजबूत वित्तीय नतीजों के बाद निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की नजर अब कंपनी की भविष्य की रणनीतियों पर टिकी हुई है। बोनस शेयर और डिविडेंड की घोषणा से शेयरधारकों का उत्साह बढ़ा है,जबकि मजबूत लाभ और प्रीमियम वृद्धि ने कंपनी की दीर्घकालिक क्षमता को भी उजागर किया है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास रफ्तार मजबूत बनी रहती है और बीमा क्षेत्र में माँग बढ़ती है,तो एलआईसी आने वाले वर्षों में भी अपने प्रदर्शन को और बेहतर कर सकती है। फिलहाल कंपनी के ताजा नतीजों ने यह संकेत दे दिया है कि एलआईसी केवल देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी ही नहीं,बल्कि भारतीय वित्तीय क्षेत्र की सबसे मजबूत संस्थाओं में से एक बनी हुई है।
